सीता कहे दर्द

सीता कहे दर्द | Kavita Sita Kahe Dard

सीता कहे दर्द

( Sita Kahe Dard )

बड़ी दर्द भरी मेरी कहानी।
अँखियो में ला दे सबकी पानी।।
जिनके लिए धरा पर थी आई।
उन्हीं के द्वारा गई सताई।।

वन को गई थी मैं प्रभु जी संग।
रंग कर प्रभु की प्रीति-भक्ति रंग।।
सृष्टि हितार्थ अग्नि में समाई।
मेरी छाया मेरा पद पाई।।

दुष्ट रावण छाया को चुराया।
रघुनाथ ने फिर उससे छुड़ाया।।
अग्नि से बाहर गई मैं लाई।
हुआ वातावरण फिर सुखदाई।।

खुशी-खुशी अयोध्या में पग धरी।
छाई राजतिलक की खुशी बड़ी।।
बीती थी आनंद की कुछ घड़ी।
शुरू हो गई फिर दुःखों की झड़ी।।

ऊंगली उठा चरित्र पर एक दिन।
“रही ये लंका में रघुनाथ बिन।।
मैला मन इसका, मैला चोला।
ले आया राघव, कुछ ना बोला।।”

अवध में मेरे चरित्र पर लांछन।
सुनकर ,दुःखी हुआ राघव का मन।।
“सीता सती है ,मैं जानता हूँ।
मेरा रूप ,मैं पहचानता हूँ।।”

सिंहासन हो रहा था बदनाम।
रहा न यहाँ मेरा कोई काम।।
वन में रही छोड़ कर राजमहल।
प्रभु का हिय गया निर्णय से दहल।।

जन्मी वहाँ रघुकुल दीपकें दो।
उठा दिए ऊंगली उस पर भी लो।।
सह न सकी मैं और अत्याचार।
पुकारी धरती माँ को इस बार।।

भूल नहीं मेरी कोई माते।
जगत वासी हैं लांछन लगाते।।
जो मैं सती राघव श्री राम की।
समा लो स्वयं में, हे माता श्री!!

प्रकटी माता सुन करूण क्रंदन।
समायी मैं तोड़ नाते-बंधन।।
बड़े स्वार्थी हैं धरा के लोग।
कहते “हम ही करें सब सुख भोग”।।

सत्य प्रमाण सतीत्व का दे गई।
घाव हृदय में लेके चली कई।।
सोची अब कभी नहीं आऊँगी।
प्रभु बिना रह भी तो न पाऊँगी।।

Suma Mandal

रचयिता – श्रीमती सुमा मण्डल
वार्ड क्रमांक 14 पी व्ही 116
नगर पंचायत पखांजूर
जिला कांकेर छत्तीसगढ़

यह भी पढ़ें :-

बारिश में सीता | Kavita Baarish me Sita

Similar Posts

  • अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस | Beti Divas

    अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस ( Antarrashtriya antarrashtriya beti divas )    बेटी की आहट से खुलते,खुशियों के अनंत द्वार मनुज सौभाग्य जागृत, मंगलता गृह प्रवेश । सुख समृद्धि सरित प्रवाह, आह्लाद पूर्ण परिवेश । दर्शन कर भव्य उपमा , आशा उमंग असीम संचार । बेटी की आहट से खुलते,खुशियों के अनंत द्वार ।। सृजन दिव्य अठखेलियां,…

  • प्रार्थना 

    प्रार्थना  हो दया का दान प्रभु , विनती यही है आप से  हम बने इस योग्य प्रभु , बचते रहें हर पाप से।  जो मिला जीवन हमें ,प्रभु एक ही आधार हो  कर  सकें  नेकी  बदी , ऐसा मेरा व्यवहार हो हो  बुराई  दूर  खुद , हे! प्रभु  तेरे  प्रताप  से,  हो दया का दान…

  • चूडियाँ | Kavita choodiyaan

     चूडियाँ  ( Choodiyaan )   सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 1.चाँद सा गोल आकार, कुछ बड़ी कुछ छोटी सी | रंगीन कुछ सतरंगी सी, कुछ पतली कुछ मोटी सी | सोने पीतल और चाँदी की, कुन्दन काँच मोती की | हांथो मे बजती खन-खन, कलाई सजाती गोरी की | सोलह श्रंगारों मे “चूडी” || 2.लाल…

  • जिंदगी जब हम जीने लगे | Hindi Poem on Zindagi

    जिंदगी जब हम जीने लगे ( Zindagi jab hum jeene lage )    जिंदगी जब हम जीने लगे गम के घूंट थोड़े पीने लगे अश्रु टपके नयन से हमारे अपनो को वो पसीने लगे जिंदगी जब हम जीने लगे लबों को धीरे से सीने लगे बातों में वजन कितना है साबित होने में महीने लगे…

  • लगन | Hindi chhand kavita

    लगन ( Lagan )  मनहरण घनाक्षरी   मीरा सी लगन लगे, मन में उमंग जगे। प्रेम की तपन कोई, उर मे जगाइए।   मौसम सुहाना छाए, काली घटा घिर आए। मन में लगन जगे, जतन बढ़ाइए।   काम कोई छोटा नहीं, कर्मठ को टोटा नहीं। मेहनत लगन से, शुभ फल पाइए।   आमद अच्छी कमाओ,…

  • न्यूज़ के नाम पर कुछ भी | News par kavita

    न्यूज़ के नाम पर कुछ भी ? ( News ke naam par kuch bhi )    ‘बिंदास बोल’ के बहाने कुछ भी नहीं दिखा सकते, स्वतंत्रता का अनुचित लाभ नहीं उठा सकते। नफरती न्यूज पर सर्वोच्च न्यायालय की गाज गिरी है, सुदर्शन टीवी के कार्यक्रम प्रसारण को- अनुमति नहीं मिली है। नफ़रत फैलाने वाले किसी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *