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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • रिश्तों का एटीएम
    आलेख

    रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए

    ByAdmin June 12, 2025June 12, 2025

    रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को ‘होम-डिलीवरी’ में बदल दिया है। दिलचस्पी कम होते ही लगाव की नींव दरकने लगती है—माँ-बेटे के फ़ोन-कॉल में ‘ऑर्डर डिलिवर्ड’ का नोटिफ़िकेशन रह जाता है, दोस्ती ‘वीडियो क्लिप फ़ॉरवर्ड’ तक सिमट जाती है, और दाम्पत्य…

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  • विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2
    ग़ज़ल

    विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2

    ByAdmin June 12, 2025September 1, 2025

    मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…

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  • प्यार जताओ, मगर संभलकर
    कहानियां

    प्यार जताओ, मगर संभलकर

    ByAdmin June 11, 2025June 11, 2025

    काव्या की डायरी उठाकर अलमारी में रखते समय अचानक डायरी से एक पर्ची निकलकर नीचे गिरी। काव्या की मम्मी ने उस पर्ची पर लिखा पढ़ना शुरू किया-“तुम बेहद खूबसूरत हो। तुम्हारी आंखें, तुम्हारे होंठ, सब मुझे तुम्हारी ओर खींचते हैं। जी करता है कि बस तुम्हें देखता रहूं। तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी बातें सुनता रहूँ। तुम्हारी…

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  • मेरी कहानी में तुम
    कविताएँ

    मेरी कहानी में तुम

    ByAdmin June 11, 2025June 11, 2025

    मेरी कहानी में तुम पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी। कभी कोई बात,कभी कोई लम्हा,तो कभी वो खामोशियाँ,जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं। मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,अधूरे ख्वाब थे,अधूरी बातें थीं,और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं…

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  • Sant Kabir Das
    निबंध

    कबीर जयंती: भारतीय चेतना के शाश्वत आलोक-स्तंभ

    ByAdmin June 11, 2025June 11, 2025

    आज, जब हम कबीर जयंती का पावन पर्व मना रहे हैं, यह केवल एक ऐतिहासिक तिथि का स्मरण नहीं है, बल्कि भारतीय सामाजिक, दार्शनिक और साहित्यिक चेतना के उस अविचल आलोक-स्तंभ का नमन है, जिसने सदियों के अंधकार को भेदकर सत्य, प्रेम और समता का आलोक फैलाया। कबीर केवल एक संत नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा,…

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  • birsa munda
    निबंध

    बिरसा मुंडा: एक आदिवासी नायक, एक “उलगुलान” का प्रतीक और आधुनिक भारत की चेतना

    ByAdmin June 10, 2025June 10, 2025

    बिरसा मुंडा, भारतीय इतिहास के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने समुदाय के अधिकारों, संस्कृति और अस्मिता के लिए भी आजीवन संघर्ष किया। उनका नाम सुनते ही ‘उलगुलान’ (महान विप्लव) की गूंज सुनाई देती है, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी ज़मींदारों…

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  • Vriksh Sanrakshan
    आलेख

    विश्व पर्यावरण दिवस: एक वैश्विक चेतना और सतत भविष्य की दिशा में एक विस्तृत विश्लेषण

    ByAdmin June 7, 2025June 7, 2025

    विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day – WED) एक ऐसा वार्षिक कार्यक्रम है जो हर साल 5 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन पर्यावरण संरक्षण के महत्व, पर्यावरणीय चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक पर्यावरणीय कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए समर्पित है। 1972 में संयुक्त…

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  • पर्यावरण
    आलेख

    पर्यावरण: एक दिन की चिंता नहीं, हर दिन की ज़िम्मेदारी

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    आजकल सोशल मीडिया पर एक आम दृश्य देखने को मिलता है — लोग पौधे लगाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और फिर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। एक पौधा लगाकर फोटो डालना तो याद रहता है, लेकिन उस पौधे को रोज़ पानी देना, उसकी देखभाल करना अक्सर भुला दिया जाता है। नतीजा यह…

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  • मैने बिरयानी खा ही ली
    संस्मरण

    ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    यह मेरे लिए बड़ी परेशानी वाली बात थी कि कोयम्बटूर में शाकाहारी होटल नही के बराबर है.. ईक्का दुक्का होंगी भी तो मेरी नजरो से नही गुजरी.. रेलवे स्टेशन पर ही होटल हरिप्रिया में मेरा मुकाम था और यही एक शाकाहारी होटल थी जहाँ मैं दक्षणी भारत का भोजन करता था।        शुरुआती कुछ दिन…

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  • अहिल्या
    आलेख

    अहिल्या : एक जीवनी – एक दर्शन

    ByAdmin June 3, 2025June 3, 2025

              राष्ट्र सेविका समिति ने  आरंभिक काल में ही देवी अहिल्या बाई होल्कर को कर्तव्य के आदर्शवादी रूप में माना है। गंगाजल की तरह निर्मल, पवित्र, पुण्यश्लोक देवी अहिल्या अपने ऐतिहासिक युग का स्वर्णिम युग रही हैं। उनके प्रति समस्त जनसमुदाय की श्रद्धा, निष्ठाभाव, आदर और अपनेपन की भावनात्मक को अभिव्यक्त, प्रतिबिम्बित करने वाली एक…

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