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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर की कविताएं | Nandlal Mani Tripathi Poetry
    कविताएँ

    नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर की कविताएं | Nandlal Mani Tripathi Poetry

    ByAdmin May 28, 2025August 18, 2025

    तिरंगे कि अभिलाषा आन मान सम्मानगर्व अभिमान भारतकि पहचान।। सीमाओं पर देश कि रक्षाकरते एक हाथ मुझे लिएदूजे में संगीन।। अभिमान से लहराता युगविश्व को बतलाता देखो मैंहूँ भारत का गौरव मान ।। भारत वासी शपथ हमारी लेतावंदे मातरम जन गण मन भारतमाता कि जय गाता ।। मेरी भी अभिलाषा हैभारतवासी से कुछ आशा हैसिर्फ…

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  • शनिदेव की जयंती
    आलेख

    न्याय के देवता शनिदेव की जयंती: कर्म, काल और कैवल्य का दार्शनिक दृष्टिकोण

    ByAdmin May 27, 2025May 27, 2025

    भारतीय मनीषियों ने शनिदेव को केवल एक खगोलीय ग्रह या पौराणिक देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक विराट दार्शनिक अवधारणा के प्रतीक रूप में देखा है। ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाने वाली उनकी जयंती मात्र धार्मिक पूजन का अवसर नहीं, अपितु कर्म, काल और कैवल्य जैसे गहन तत्वों पर आत्ममंथन का पावन क्षण है।…

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  • Facebook par Kavita
    विवेचना

    फेसबुक या फूहड़बुक?: डिजिटल अश्लीलता का बढ़ता आतंक और समाज की गिरती संवेदनशीलता

    ByAdmin May 27, 2025May 27, 2025

    जब सोशल मीडिया हमारे जीवन में आया, तो उम्मीद थी कि यह विचारों को जोड़ने, संवाद को मज़बूत करने और जन-जागरूकता फैलाने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। लेकिन आज, 2025 में, विशेषकर फेसबुक जैसे मंच पर जिस तरह से अश्लीलता और फूहड़ता का आतंक फैलता जा रहा है, वह न केवल चिंताजनक है, बल्कि सभ्यता…

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  • अपेक्षा क्यों
    कविताएँ

    अपेक्षा क्यों

    ByAdmin May 27, 2025May 27, 2025

    अपेक्षा क्यों चाह जब जुड़ जाएंपरिणाम सेअपेक्षा का…होता है आगमनमन की शांति काफिर होता है गमन दूसरे भी हमेंवही सम्मान देंजो हम…उन्हें दे रहेंदूसरे भी हमेंवही प्यार देंजो हम…उन्हें दे रहें यह जरूरी तो नहींकि हो…विचारधाराएं समानअपनी प्राथमिकताका तो…है हमें भानपर दूसरों कीप्राथमिकताओं काभी हो हमें ज्ञान जरा संभल करव्यवहार करना होगाइस रंग बदलते जमाने…

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  • हँसी
    कहानियां

    हँसी

    ByAdmin May 26, 2025May 26, 2025

    बहुत दिनों बाद सब एक साथ इकट्ठा हुए थे। घर का आँगन रौनक से भर गया था। बच्चे दौड़ते फिर रहे थे, औरतें रसोई में व्यस्त थीं, और मर्द हुक्का-चाय का आनंद ले रहे थे। मिलजुल कर खाना खाने के बाद सभी बरामदे में बैठ गए — बातें चलने लगीं, हँसी-ठिठोली का दौर शुरू हो…

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  • वट सावित्री पूजन
    आलेख

    लोक आस्था का पर्व : वट सावित्री पूजन

    ByAdmin May 26, 2025May 26, 2025

    भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं होते, वे जीवन-दर्शन, सामाजिक अनुशासन और सांस्कृतिक उत्तराधिकार के संवाहक भी होते हैं। इन्हीं में से एक है वट सावित्री व्रत, जो विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। यह पर्व जहां सावित्री…

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  • navin
    कविताएँ

    नवीन मद्धेशिया की कविताएं | Navin Maddheshiya Poetry

    ByAdmin May 25, 2025August 28, 2025

    तेरी कलम तलवार बनेगी तेरी कलम तलवार बनेगीमेरी कलम दवा बनेगीबह रहे हैं जो आंसू इस गलफत मेंमेरी कलम दुआ बनेगी करेगी असर मेरी दूआ करेगी असर मेरी दूआइतना है यकीं मुझेमानो ना मानो यारोंखुद पर है यकीन मुझेमैं गफलतों की बातें ना करताअंदाज मेरा है यहीबातें होंगी फैसले भी होंगेतु कर इंतजार अभी तुमसे…

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  • D P Verma Poetry
    कविताएँ

    देवेंद्र प्रताप वर्मा ‘विनीत’ की कविताएं | D P Verma Poetry

    ByAdmin May 25, 2025July 9, 2025

    अस्तित्व वो कहते हैं ये मेरा प्रश्न है,हर उत्तर को निगलेगा,मैं कहता हूँ ये मेरी अनुभूति है,मौन में भी उगलेगा। वो कहते हैं ये मेरी रेखा है,किस्मत तक पहुँच जाएगी,मैं कहता हूँ ये मेरा पथ है,जो नियति को भी मोड़ लाएगी। वो कहते हैं ये मेरा काल है,सब कुछ ढहा जाएगा,मैं कहता हूँ ये मेरी…

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  • एक गोली रोज
    कहानियां

    एक गोली रोज

    ByAdmin May 24, 2025May 24, 2025

    होली से एक दिन पहले की बात है। शाम के 6:00 बज रहे थे। प्रतिदिन की तरह आज भी महेश सर समय पर पूजा करने मंदिर पहुंचे। जैसे ही उन्होंने मंदिर में कदम रखा, वैसे ही उनके फोन की रिंग बजी। कॉल घर से ही थी। उन्होंने फोन रिसीव किया। उधर से बिटिया मीनाक्षी की…

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  • love in society
    आलेख

    ढाई अक्षर प्रेम से बनेगा हिंसा मुक्त समाज

    ByAdmin May 24, 2025May 24, 2025

    सूफी संत कबीर दास ने प्रेम को जानने वालों को पंडित कहा है। प्रेम प्रेम तो सभी कहते रहते हैं परंतु क्या हम प्रेम के अर्थ को समझते हैं । आखिर किस प्रेम की चर्चा कबीर कर रहे हैं जो कि प्रभु प्राप्ति का मार्ग भी है । प्रेम की नासमझी के ही कारण शारीरिक…

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