हँसी

हँसी

बहुत दिनों बाद सब एक साथ इकट्ठा हुए थे। घर का आँगन रौनक से भर गया था। बच्चे दौड़ते फिर रहे थे, औरतें रसोई में व्यस्त थीं, और मर्द हुक्का-चाय का आनंद ले रहे थे।

मिलजुल कर खाना खाने के बाद सभी बरामदे में बैठ गए — बातें चलने लगीं, हँसी-ठिठोली का दौर शुरू हो गया।इन्हीं बातों के बीच, जब माहौल थोड़ा सहज हुआ, स्मिता ने अनमने से लहजे में एक बात कह दी। वो हँसते हुए बोलने की कोशिश कर रही थी, मानो खुद को हल्का करने के बहाने ढूंढ़ रही हो।

“पता है,” स्मिता बोली, “रात को जब वो नशे में होता है, तो जाने क्या-क्या कह देता है। ऐसी-ऐसी बातें, जिनका कोई सिर-पैर नहीं। गालियाँ तक दे देता है कई बार। और जब मैं सुबह उससे नाराज़ होती हूँ, तो ऐसे देखता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

उल्टा मुझसे कहता है कि ‘तुमसे बहुत प्यार करता हूँ स्मिता’… और तो और, माफ़ी भी मांग लेता है।” सभी एक पल को चुप हुए, फिर बड़े देवर ने ठहाका मारते हुए कहा, “अरे भाभी! ये तो बिल्कुल वैसे ही है जैसे पापा करते थे।

रात को जब ज़्यादा पी लेते थे तो मम्मी को थप्पड़ मार देते थे… और सुबह जब मम्मी चुप रहतीं तो पूछते, ‘तू मुझसे नाराज़ है क्या?'”छोटे देवर ने भी हँसते हुए हामी भरी, “हां भाभी, लेकिन सच्ची बात तो ये है कि पापा मम्मी से बहुत प्यार करते थे।” इतने में ननद ने भी हँसते हुए कहा, “पापा तो मम्मी के बिना कहीं जाते ही नहीं थे।” अब पूरे बरामदे में हँसी गूँजने लगी।

हर चेहरा मुस्कुरा रहा था, बीते कल की किसी ‘मजेदार’ याद में डूबा हुआ। स्मिता ने सबके साथ एक झूठी मुस्कान ओढ़ ली। उसी मुस्कान की आड़ में उसने अपने आत्मसम्मान के घाव छुपा लिए। वो ज़ख्म जो हर रात उसके आत्मविश्वास को थोड़ा और खा जाते थे, वो चुभन जो हर सुबह उसके चेहरे पर रह जाती थी जब उसे ही समझदार बनना होता था — सब कुछ उसने अपने अंदर कहीं गहरा दबा लिया।

उसे महसूस हुआ कि सबकी हँसी, सबकी यादें, दरअसल उसके अतीत और वर्तमान दोनों पर एक तीखा कटाक्ष थीं। ऐसा मान लिया गया था कि शराब में कहे गए शब्द मायने नहीं रखते, कि सुबह की एक माफ़ी से रात की हिंसा धुल जाती है, कि प्रेम का मतलब सह लेना है।

स्मिता की आँखें पल भर को नम हुईं — लेकिन वो मुस्कुराई। क्योंकि इस समाज में औरत की चुप्पी ही उसके चरित्र की कसौटी है, और उसकी सहनशीलता ही उसकी ‘इज्ज़त’ की पहचान।उसी हँसी में सब लौट गए अपनी-अपनी बातों में, और स्मिता — अपने नासूरों के साथ — फिर से एक और शाम का हिस्सा बन गई।

गरिमा भाटी “गौरी”
सहायक आचार्या, रावल कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन,
फ़रीदाबाद, हरियाणा।

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • Зеркала Вавада как стильный элемент вашего интерьера

    Зеркала Вавада стильные акценты для вашего интерьера Выбор элемента декора, способного изменить внешний вид помещения, требует внимания к деталям. Эти предметы имеют уникальные формы и текстуры, что позволяет им привлекать взгляд и добавлять изюминку в любой уголок вашего дома. Для современного дизайна важно, чтобы каждое решение было не только красивым, но и функциональным. Помимо эстетики,…

  • Регистрация в Vavada пошаговая инструкция для всех

    Регистрация в Vavada пошаговая инструкция для всех Для успешного начала игры в азартные развлечения важно правильно выполнить процесс создания своего профиля. Это позволит вам мгновенно получать доступ к различным играм и увлекательным предложениям. Начните с перехода по ссылке и изучите, как можно быстро и без лишних усилий осуществить вавада вход. Первый шаг заключается в выборе…

  • तरफदारी

    चाचा-चाची, चिंकी और पिंकी (क्रमशः 4 व 6 वर्षीय) शैतानी कर रही हैं। मेरे समझाने पर भी मेरा कहना नहीं मान रही हैं, आराम से बैठकर नहीं खेल रही हैं। वे बेड के ऊपर कूद रही हैं, शोर मचा रही हैं और बार-बार बिजली के सॉकेट में हाथ डालने की कोशिश कर रही हैं। कहीं…

  • एहसास

    “पापा, मैं आपको कुछ बताना चाहता हूँ,” आरव ने अपने पिता राजेश से कहा। “क्या हुआ बेटा? बताओ,” राजेश ने पूछा। “आज मैं अपने दोस्त विशाल के घर गया था। उसके पिता शराब पीकर घर आए थे। वे बहुत गुस्से में थे और अपनी पत्नी और बच्चों को डांट रहे थे। मैंने देखा कि विशाल…

  • प्यार की खातिर

    असलम की बेवफाई से निराश नुजहत का सारा समय अब मोबाइल पर यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम चलाने व नेट सर्फिंग में ही बीत रहा था। दिन तो किसी तरह कट जाता था, लेकिन रात काटनी उसे भारी गुजरती थी। फ़ेसबुक पर वीडियोज क्लिप्स देखते समय अचानक उसकी नज़र एक आकर्षक एडवर्टाइजमेंट पर पड़ी। जिसमें लिखा था:-…

  • काल | प्रेरक कहानी

    एक मनुष्य शहद बेच रहा था । उसने शहद से भरी उंगली को दीवार से पोछ लिया। दीवार पर शहद लगने की देर थी कि उसकी खुशबू पाकर एक मक्खी उस पर आ बैठी और आंखें बंद करके शहद खाने लगी। अभी शहद खा ही रही थी कि एक छिपकली ने देख लिया कि यह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *