• मुझे संभालो | Mujhe Sambhalo

    मुझे संभालो  ( Mujhe Sambhalo )   मुझे संभालो न मेरे दोस्त अमानत की तरह पडा़ रहने दो मुझे यहाँ आफत की तरह इस कदर सबके सीने में उतर जाउंगा मैं की छोड़ न पाओगे मुझे आदत की तरह|| याद रखो मुझे तुम एक कहावत की तरह छोड़ना नहीं कभी मुझे बगावत की तरह यूँ मुसाफ़िर…

  • चिड़िया रानी | Kavita Chidiya Rani

    चिड़िया रानी ( Chidiya Rani )   चिड़िया रानी चिड़िया रानी क्यो करती इतना मनमानी! रोज सवेरे तुम हो आती आकर पुन:कहां हो जाती !! चाहूं साथ खेलना तेरे क्या खेलोगी साथ तुम मेरे ! आना-जाना अब तुम छोड़ो खेलो साथ में मिलकर मेरे !! देखो फिर ना फुर हो जाना नये नये नित गीत…

  • दर्दे वेवफा | Dard- e – Bewafa

    दर्दे वेवफा ( Dard-e bewafa ) दर्दे वेवफा कुछ वफा कीजिये हाँ नहीं कह सको तो न ना कीजिये अपनो से युद्ध करना सरल भी नही अमृत न मिले गर गरल ही सही उम्र भर साथ देना गर वश मे नही दो कदम साथ मेंरे चला कीजिये प्रेम मेरा गलत राह दिखाता नही गलत बात…

  • जगजननी जानकी | Kavita Jag Janani Janaki

    जगजननी जानकी ( Jag Janani Janaki )   अपने चरित्र और चिंतन से नारी जीवन के दर्शन दिखलाइए, विपदाओं से घिरी जानकी ने कुल की मर्यादा को बतलाया ।। जिस धोबी ने स्त्री को करके कलंकित घर से निकाला था, माता की हर भाव को पीड़ा में देख वह भी बहुत पछताया था।। समझ लेता…

  • वृद्ध मां बाप | Kavita Vridh Maa Baap

    वृद्ध मां बाप ( Vridh maa baap )   वृद्धाश्रमों में जब किसी के मां बाप रोते और बिलखते हैं, उस पुत्र के लिए बददुआ के लाखों बिजलियां कड़कते हैं। पैदा करने से जवानी तक जो हमें खून पिलाकर पालते हैं, क्यों वृद्ध हो जाने पर वो ही वृद्धाश्रमों में भेजे जाते हैं। क्या यही…

  • सीता नवमी | Kavita Sita Navami

    सीता नवमी ( Sita Navami )   जनक नंदिनी वैभव,राम सत्ता आधार जनक दुलारी महिमा अद्भुत, प्रातः वंदनीय शुभकारी । राम रमाकर रोम रोम, पतिव्रता दिव्य अवतारी । शीर्ष आस्था सनातन धर्म, सुरभि संस्कृति परंपरा संस्कार । जनक नंदिनी वैभव,राम सत्ता आधार ।। मृदु विमल अर्धांगिनी छवि, प्रति पल रूप परछाया । प्रासाद सह वनवास…

  • बिन मानवता | Kavita Bin Manavta

    बिन मानवता ( Bin Manavta )   मैं घंटा शंख बजाऊं,या मंदिर मस्जिद जाऊं। बिन मानवता के एक पल भी,मानव न कहलाऊं।। पहले हवन बाद में दहन,क्यों दुर्गति करवाऊं।। सीधा सादा जीवन अपना,मानव ही कहलाऊं।। दिन में रोजा रात में सो जा,मुर्गी मुर्गा खाऊं। अपनों की परवाह नहीं,दूजा घर भात पकाऊं।। जाति धर्म और भाई…

  • कहाँ तक | Kahani Kahan Tak

    ”  हलो ..भाई साहब , आप मेजर गौरव शर्मा बोल रहे है न ? ओके , मैं लाहौर से मरियम रहमान बोल रही हूँ । भाई  साहब शायद मेरे शौहर आपके साथ भारत- पाक , जंग में आपके साथ थे । उन्ही के विषय मे मैं आपसे बात करना चाहती हूँ। क्या आप मेरी दस…

  • बनारस | Kavita Banaras

    बनारस ( Banaras )   कण कण में हैं शंकर जिसके , और मिट्टी है पारस ! तीन लोक से न्यारी नगरी , जिसका नाम बनारस !! आबोहवा यहां का अनुपम, फिजा में बसती मस्ती ! मोक्ष धाम है महादेव का , मानवता की बस्ती !! स्नेह समन्वय सदाचार संग, बहती ज्ञान की गंगा! सुख…

  • परिवार सब टूट रहे हैं

    परिवार सब टूट रहे हैं संस्कार छूट रहे हैं कुटुंब परिवार सब टूट रहे हैं। संदेह के घेरे फूट रहे हैं अपने हमसे रूठ रहे हैं। घर-घर दांव पेंच चालों का दंगल दिखाई देता है। कलही कारखाना घर में अमंगल दिखाई देता है। संस्कारों की पतवार जब भी हाथों से छूट जाती है। परिवार की…