• सृजन के देव विश्वकर्मा | Vishwakarma ji par kavita

    सृजन के देव विश्वकर्मा ( Srijan ke dev vishwakarma )   नवसृजन के आदिदेव सृजक विश्वकर्मा महाराज। अस्त्र-शस्त्र आयुध पूजा साधक करते पूर्ण काज।   कलाकार करे ध्यान आपका झोली विद्या से भरते। भवन निर्माण कला कौशल शिल्पी साधना करते।   भित्ति चित्र काष्ठकला स्वर्ण रजत भूषण जवाहरात। मुंह बोले मूर्तिकलाये चित्रकारी की हो अनोखी…

  • नमो नमो मोदी हरे | Narendra Modi par kavita

    नमो नमो मोदी हरे ( Namo Namo Modi Hare )     नमो नमो स्वर लहरी से, जनमानस झूम रहा। राम मय हुआ राष्ट्र, जन जन भक्ति में घूम रहा।   दिल्ली दिल जनता का, अब मोदी दरबार बना। अखिल भारती भूमंडल में, सब खुशियां रहे मना।   सिंहासन पे शेर देश का, लाल किले…

  • तू न नफ़रत किया कर | Ghazal too na nafrat kiya kar

    तू न नफ़रत किया कर ( Too na nafrat kiya kar )     किसी से मगर तू न नफ़रत किया कर सभी से मगर तू मुहब्बत किया कर   बहुत डाट मिलती है मां बाप की ही नहीं घर किसी से शिक़ायत किया कर   गुनाहों से तेरी नहीं जीस्त होगी ख़ुदा की मगर…

  • भक्त से भगवान | Poem Bhakt Se Bhagwan

    भक्त से भगवान  ( Bhakt se bhagwan )   भक्त से भगवान का रिश्ता अनोखा होता हैl जब जब बजेगी बांसुरिया राधा को आना होता हैl द्रौपदी की एक पुकार पर वचन निभाना पड़ता हैl लाज बचाने बहना की प्रभु को आना पड़ता हैl मीरा के विश के प्याले को अमृत बनाना पड़ता हैl कृष्ण…

  • अभियंता | kavita abhiyanta

    अभियंता ( Abhiyantā )   हे अभियंता शिल्प नियंता तुम सृजन के आधार। बुद्धि विवेक ज्ञान के सागर हो सच्चे रचनाकार।   गुण माप तोल सब रखते रचते कीर्तिमान। गढ़ लेते कृति आप बने जीवन का आधार।   सकल जगत को देकर जाते निर्माणों की सौगात। याद करे दुनिया सारी जुबा पे होती सुहानी बात।…

  • पिता | Pita par kavita in Hindi

    पिता ( Pita )   वह तो नहीं है पर याद बहुत आती है आगे बढ़ो खुश रहो हर पल जियो यह मेरे कानों में आवाज आती है गूंजते है शब्द उनके पापा जैसे पास खड़े पलक बंद करूं तो छवि मुस्कुराती है कितने दिन हो गए बरसो ही गुजर गए आज भी मुझे मेरे…

  • पता है | Pata hai

    पता है ( Pata hai )   जब विश्वास टूटता है, उस वेदना का कोई परिसीमन नहीं होता, क्यों कि हर टूटने वाली चीज़ भी दोबारा जोड़ी जा सकती है, लेकिन जब मन टूटता है, तब चाहे सारे हालात पहले की तरह हो जायें, हम खुद को नकार कर भरोसा दोबारा भी बनाने की कोशिश…

  • हिंदी भाषा | Poem Hindi bhasha

    हिंदी भाषा ( Hindi bhasha )   हिंदी वह भाषा जिसमें हंसते गाते तुम l हिंदी वह भाषा जिसमें सहज सुगमता पाते तुमl हिंदी वह भाषा जिसमें सुख समृद्धि पाते तुमl हिंदी वह भाषा है जिसमें संतों गुरुओं का आशीष पाते तुमl हिंदी भाषा से जुड़कर ज्ञान विज्ञान पाते तुम l हिंदी वह भाषा है…

  • हिन्दी | Hindi par poem

    हिन्दी ( Hindi )   बावन वर्णों से सजी हुई,मधुमय रसधार बहाती है। यह हिन्दी ही है जो जग में,नवरस का गीत सुनाती है।। संस्कृत प्राकृत पाली से शुभित, हिंदी जनमानस की भाषा, तू ज्ञान दीप बनकर प्रतिफल,कण कण में भरती है आशा, हिम नग से सागर तक अविरल, सौहार्द मेघ बरसाती है।। यह हिन्दी…

  • जीवन यही है | Poem jeevan yahi hai

    जीवन यही है ( Jeevan yahi hai )   ना धरा में ना नभ में ना गहरे समंदर में। खोज खोज के खुद को खोया झाँका नहीं खुद के अंदर में। राहों से तु भटक ना राही किंचित सही नहीं है। अंतर्मन हि असीम सत्य है, यक़ीनन जीवन यही है। अल्फाज़ों में जो समझाऊं तो…