• हनुमान चालीसा की रचना किसने किया है: एक विश्लेषण

    सामान्य जन में ऐसी मान्यता है कि हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया है जो की अकबर द्वारा बंदी बनाए जाने पर हनुमान जी से प्रार्थना के रूप में किया है जिसे हनुमान जी प्रसन्न होकर पूरे अकबर के दरबार में बंदरों का आक्रमण हो जाता है उसके बाद अकबर तुलसीदास जी…

  • कुंडली | Kundli

    अभि (अभिमन्यु) और प्रिया (सुप्रिया) की प्रेम कहानी वास्तव में एक अद्भुत और सुंदर दास्तान है जो हर किसी के दिल को छू जाती है। उनका प्यार इतना सच्चा और गहरा था कि वह हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता था। वे दोनों एक दूसरे के लिए बनें थे। उनका प्रेम एक दूसरे के…

  • मनोविकार | Manovikar

    शमी, एक हष्ट-पुष्ट नवमीं कक्षा का छात्र था, उसे खाने-पीने का बहुत शौक था । वह होनहार एवं मिलनसार प्रवृत्ति का लड़का था ,परन्तु कुछ दिनों से एकदम शांत और अलग-थलग रहता था । खाने-पीने में कोई रुचि नहीं ले रहा था । उदास मन से स्कूल जाता तथा वापस आने के बाद , पूरे…

  • मैं भी था | Main Bhi Tha

    मैं भी था तुम्हारे हुस्न-ओ-अदा पर निसार मैं भी थातुम्हारी तीर-ए-नज़र का शिकार मैं भी था मेरे गुनाह ख़ताएं भी फिर गिना मुझकोतेरी नज़र में अगर दाग़दार मैं भी था बहुत ही ख़ौफ़ ज़माने का था मगर सचमुचतुम्हें भी अपना कहूँ बेकरार मैं भी था यक़ी न होगा तुझे पर यही हक़ीक़त हैहसीं निगाहों का…

  • दीवार | Deewar

    विशाल का फोन आया कमल पर कार्यक्रम की आप को पता है आप के घर के पीछे ऊंची दीवार बन गया है, कमल ने कहा कि नहीं मे तो बैंक मे हू। कमल तेजी से घर आता है और पीछे जाकर दीवार देखकर नर्वस हो जाता है और शोच ने लगा कि मेरी रानी कविता…

  • मानव यही धर्म | Manav Yahi Dharm

    मानव यही धर्म ‘मानव’ यही रहा है धर्म पुराना,धर्म का न कोई अलग निशाना;न देखा ‘अल्लाह’ को किसी ने,नहीं ‘गॉड’ से भी पाया किसी ने | इंसान ने ही भगवान बनाया,भगवान एक ही आद्य या अंत;अब तो मिटा दिया करो सभी,दिवार जात-पात या धर्म-पंथ | धर्म भेद को भूलाकर सभी,एक साथ रहो मिलकर अभी;धर्म कलह…

  • डा. तरुण राय ‘कागा’ जी

    डा. तरुण राय ‘कागा’ जी रेतीले धोरों की माटी का सच्चा सपूत,कला-साहित्य का जो रखे अद्भुत रूप।चौहटन की धरती से उठाया परचम,डा. तरुण राय ‘कागा’, नाम हुआ अमरतम। कभी कविताओं में बहाए भावनाओं के रंग,कभी विधायक बन सजाए जनता के संग।साहित्य से राजनीति तक सफर किया विशाल,हर क्षेत्र में दिखी आपकी अद्वितीय मिसाल। कलम से…

  • बता गये आँसू | Bata Gaye Aansu

    बता गये आँसू हाले – दिल सब बता गये आँसूजब भी आँखों में आ गये आँसू जब्ते- ग़म करना भी नहीं आसांअपनी फ़ितरत जता गये आँसू दूर तक कैसे चलते खारों परहौसला सब डिगा गये आँसू हमसफ़र जब गले से लग रोयेइक ख़ुशी सी जगा गये आँसू कौन अपना है या पराया हैदुनियादारी सिखा गये…

  • इमली का पेड़ | Imali ka Ped

    इमली का पेड़ वो चुपचाप खड़ाबूढ़ा इमली का पेड़पाठशाला प्रांगण मेंदो मंजिला इमारत के सामनेध्यानमग्नबुद्ध की तरहमानो सत्य का ज्ञान पाकरदे रहा संदेश मानवता कोजड़ता छोड़ोया ऋषि की भांति तपस्या में लीनजिसने सीख लिया सम रहनाइस सावन मेंनहीं आई नवीन पत्तियांफिर भी बाँटता रहताखड़खड़ाती इमली के फलअब उसे नहीं लगता डरआंधी -तूफान सेजैसे उसने समझ…

  • प्रसिद्ध दिव्यांग साहित्यकार सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को काम आया आत्मविश्वास

    कुछ बच्चे प्रारम्भ से ही शारीरिक और मानसिक विकलांगता का शिकार हो जाने के कारण बचपन के अतुलित आनन्द से वंचित रह जाते हैं। उनके लिए बचपन के ये मधुर क्षण, दूर के सुहाने ढोल बनकर रह जाते हैं। कुछ इसी प्रकार की कठोर परिस्थितियों का सामना सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को भी करना पड़ा। सुरेश…