Pita Beti Samvad

पिता बेटी संवाद पर कविता | Pita Beti Samvad

पिता बेटी संवाद पर कविता

( Pita beti samvad par kavita )

 

बेटी अपने घर आने को भी पूछना पड़ता है
पराया कर दिया है पिता आपने पूछना पड़ता है
बेशक में आपकी बेटी हूं
पत्नी किसी की आपने मुझे बना दिया है
आपकी एक आवाज में दौड़ कर आने वाली मैं
जुड़ गई हूं दूसरे के, सम्मान के साथ सम्मान के लिए पूछना पड़ता हैl
गलत ना समझना पिता मेरे
मुझे तो 2 कुलों का मान
रखना पड़ता है
सीख आपकी ही है मेरे पिता
मर्यादा में रहकर हर काम करना पड़ता है
घट ना जाए मान आपका
फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ता हैl
बेटी सदा रहूंगी आपकी ही
बहू बन हर फर्ज निभाना पड़ता हैl
आपके दिए संस्कारों को
हरे जगह सुशोभित करना पड़ता है
सीखा है आपसे ही बात करना बस कहने का अंदाज नया होता हैj

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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पुष्प | Pushp

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