पिता की सीख
भोला के बेटे ने अपने पिता से पूछा, “पिताजी, मैंने सुना था कि पहले आप बहुत गरीब थे, मजदूरी करते थे। फिर आप इतने अमीर कैसे हो गए?” भोला ने अपने बेटे की जिज्ञासा को शांत करने हेतु अपनी कहानी शुरू करते हुए कहा-
“बेटा, मैं एक छोटे से गाँव में रहता था। मेरे पास जमीन नहीं थी, इसलिए मुझे दूसरों की जमीन पर काम करना पड़ता था। मैंने अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए बहुत संघर्ष किया। मेरे दिन की शुरुआत सूर्योदय से पहले होती थी, और मैं अपने परिवार के लिए रोटी कमाने के लिए हर संभव प्रयास करता था।”
भोला ने आगे की कहानी बताते हुए कहा, “बेटा, एक दिन, जब मैं खेत में काम कर रहा था, तो उस खेत का मालिक रामकिशन मेरे पास आया। वह एक दयालु और न्यायप्रिय व्यक्ति था। उसने मुझे देखा और कहा, ‘मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। तुम मेरे यहाँ पिछले 5 सालों से बहुत परिश्रम से खेती का काम देख रहे हो। तुम्हारी वजह से मेरी जमीन में पिछले कई वर्षों से बहुत अनाज पैदा हो रहा है। मैं और भी ज्यादा अमीर बन गया हूँ।'”
रामकिशन आगे बोला-
“तुम्हारे पास जमीन नहीं है, लेकिन तुम्हारे पास एक अच्छा दिल है। तुम्हारे कर्म अच्छे हैं। तुम्हारी सच्चाई, मेहनत और ईमानदारी से खुश होकर मैं तुम्हें यह जमीन दे रहा हूँ।’ मैं बहुत खुश हुआ और मैंने रामकिशन के पैर छुए।”
भोला ने आगे कहा, “मैंने उस जमीन पर पूरी मेहनत और लगन से काम किया। मैंने जमीन की देखभाल की, बीज बोए, और फसल की रखवाली की। फलस्वरूप मेरी फसल अच्छी हुई और मैंने अच्छा अनाज पैदा किया। धीरे-धीरे अगले 15 सालों में मैं अमीर हो गया। मैंने अपनी जमीन का विस्तार किया और नए-नए तरीके से खेती करने लगा। मैंने अपने परिवार के लिए एक अच्छा जीवन बनाया और तुम्हें और तुम्हारे भाई-बहनों को अच्छी शिक्षा दिलाई।”
भोला ने अपने बेटे को उसकी बातों को तन्मयता से सुनते देखकर कहा, “बेटा, अच्छे कर्म करना और ईमानदारी से मेहनत करना, हमारे हाथ में होता है। ईश्वर हमारी मेहनत का सिला एक न एक दिन जरूर देते हैं। ईश्वर के यहाँ देर है, लेकिन अंधेर नहीं। जीवन में यदि इस सीख को अपनाओगे, तो तुम्हें सच्ची खुशी और संतुष्टि मिलेगी। मैं चाहता हूँ कि तुम भी अपने जीवन में इसी तरह के अच्छे कर्म करो और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करो।”
भोला के बेटे ने अपने पिता की बात सुनी और उसने भी अपने जीवन में अच्छे कर्म करने और मेहनत करने का फैसला किया। उसने अपने पिता की तरह ही खेती में रुचि दिखाई और नए-नए तरीके से खेती करने लगा। धीरे-धीरे उसने भी अपने पिता की तरह ही सफलता प्राप्त की और अपने परिवार के लिए एक अच्छा जीवन बनाया।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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