उपहार

उपहार

“मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे अपने प्रेम की कोई निशानी दो। मुझे तुमसे एक शर्ट चाहिए।” लव बोला “बिल्कुल दूँगी। मैं भी काफी दिनों से तुम्हें कुछ उपहार देने की सोच रही थी।

तुम्हें पता भी नहीं है, मैंने दो दिन पहले ही तुम्हारे लिए एक उपहार ले लिया है लेकिन आज लाना भूल गयी। मुझे पता ही नहीं था कि आज हम मिलने वाले हैं। अगली मुलाकात में पक्का तुम्हें तुम्हारा उपहार मिल जायेगा।” रीता ने अपने प्रेमी लव का हाथ हाथों में लेकर कहा।

“क्या बात है। इसका मतलब तुमने तो मेरे दिल की बात बिन कहे ही समझ ली।” लव आगे बोला…
“क्या मैं जान सकता हूँ कि तुमने मेरे लिए लिया क्या है?”

“एक शर्ट… वो भी अपनी पसन्द की।” रीता इतरा के बोली।

“सच में, तुमने शर्ट ले भी ली वो भी अपनी पसन्द की… बहुत सुंदर… वैसे तुम्हें क्या लगता है कि जो शर्ट तुमने ली, वो मुझे पसन्द आ जायेगी?”

“अब तक तुमने अपनी पसंद की शर्ट पहनी है। अब मेरी पसन्द से तुम्हें कपड़े पहनने होंगे। चाहे पसन्द आएं या नहीं? सोच लो माई लव।”

“अच्छा ऐसी बात है! फिर तो मैं तुम्हारी पसन्द को अपनी पसंद बना लूंगा, लेकिन तुम्हें भी मेरा कहना मानना होगा। मेरी भी एक शर्त है।” लव अपनी बात रखते हुए बोला।

“अब मुझे अपनी पसंद के कपड़े पहनाने के लिए तुम्हारी शर्त भी माननी पड़ेगी?” रीता ने सवाल किया।

“जी हाँ” लव इतराकर बोला।

“अच्छा, तो फिर बताओ, फिर क्या शर्त है?”

“शर्त यह है कि तुम्हें वह शर्ट सबसे पहले खुद पहननी होगी। तुम्हारे पहनने के बाद वह शर्ट मैं खुशी-खुशी पहनूंगा। अगर ऐसा करोगी तो मुझे बेहद खुशी होगी। मुझे अच्छा लगेगा।” लव बोला।

रीता लव की शर्त सुनकर सोच में पड़ गयी। वह समझ न पा रही थी कि लव आखिर चाहता क्या है? उसके लिए शर्ट उपहार है या मेरा स्पर्श?

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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