Poem holika dahan
Poem holika dahan

होलिका दहन

( Holika Dahan )

 

होलिका भी जल गई, ले भक्त प्रह्लाद को गोद।
हर्षित सारा जग हुआ, सब जन मनाते मोद।

 

सद्भावों की लहर चली, छाई रंगों की बहार।
होली पर्व उमड़ रहा, घट घट में हर्ष अपार।

 

भक्त प्रल्हाद ध्यानमग्न, प्रभु का परम आराधक।
बाल न बांका हो सके, जब साधना करे साधक।

 

भक्त वत्सल भगवान, भक्तों का देते सदा साथ।
लाख तूफां आए चाहे, जब रक्षा करते दीनानाथ।

 

हिरण्यकश्यप मरा, हरि ने लिया न्रसिंह अवतार।
सबकी रक्षा हरी करते, जो सारे जग का करतार।

 

भाईचारा प्रेम से हम, सब मनाते होली त्योहार।
उर उमंग हिलोरें ले रही, रंगों की लेकर बहार।

 

एक दूजे को रंग लगा, आओ सब मनाएं होली।
मधुर तराने गीत सुहाने, झूमे रसिकों की टोली।

 

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कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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