रामजी के गाँव रे | Ram ji Ke Gaon

रामजी के गाँव रे

( Ram ji ke gaon re ) 

 

चला चली धनिया ई माटी कै नाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।

फल,फूल,मेवा,नरियल,उहाँ हम चढ़ाईब,
सरयू नदी में दूनों डुबकी लगाईब।
जनम -जनम से उनसे आपन लगाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।
चला चली धनिया ई माटी कै नाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।

कनक-भवन देखब, ऊ सीता रसोइयां,
हनुमानगढ़ी देखब जहाँ बजत बा बधइया।
अरे! आयल जिनगी कै अंतिम पड़ाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।
चला चली धनिया ई माटी कै नाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।

धन्य हैं कौशल्या माई, धन्य कैकेई,
धन्य हैं सुमित्रा, धन्य तीनों माई।
धोवल जाई अँसुवन से प्रभु जी कै पांव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।
चला चली धनिया ई माटी कै नाव रे,
होई जाई बेड़ा पार रामजी के गाँव रे।

 

Ramakesh

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

माँ पर नज़्म | Maa par Nazm

Similar Posts

  • सपने | Sapne

    सपने सपने नितांत जरूरी हैंजैसे हवा और पानीसपने बंजर भूमि में खिले फ़ूल हैंजो ख़ुशबू की तरहआपका जीवन महकाते हैंआपके नीरस और बेमक़सद जीवन को उद्देश्य देते हैं सपने देखे जाते हैंकभी सोते हुएकभी जागते हुएसपनों को यूहीं न जाने दोआज नहीं तो कल पूरे होंगेसपनों को यूहीं न जाने दोक्योंकि यदि सपने मर गएतो…

  • ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम

    ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम ( पूर्णिका ) ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम चर्चा फिर भी फूल की।इसी बात पर और कंटीली काया हुई बबूल की। जुड़ने वाले हाथ कटे हैं झुकने वाला सिर गिरवीऐसा लगता है मैंने मंदिर में आकर भूल की। रोज़ खुली रामायण पढ़ते पढ़ते जाते छोड़ पिताबड़े प्रेम से हवा बिछा…

  • कजली तीज | Kavita Kajli Teej

    कजली तीज ( Kajli Teej ) देखो आया कजली (सत्तू) तीज का त्यौहार सखियां सब हो जाओ तैयार मेहंदी हाथों में रचाई करके सोलह श्रृंगार आई हरी- हरी चूड़ियां खनखन करती पायल भी छम छम है बजती बिंदिया की चमक अपार स्वस्थ रहे पिया खुशियों से भरा हो संसार सुहागिनें मंदिर में दर्शन को जाती…

  • श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

    श्री जगन्नाथ रथ यात्रा उड़ीसा राज्य की पावन धरा,जगन्नाथपुरी धाम।पुराणों में बैकुंठ धरा का,शत – शत करें प्रणाम।। विग्रह रुप में तीनों विराजे,है जगन्नाथपुरी नाम।कृष्ण,बहन सुभद्रा और साथ में भाई बलराम।। विश्व कर्मा जी ने प्रतिमाओं का,किया है निर्माण।दर्शन – मात्र से भक्तों का,यहाॅं होता है कल्याण।। रथ – यात्रा का नगर भ्रमण,गूॅंजता है जयकारा।जगन्नाथ…

  • भाव जगाने निकला हूँ | Kavita bhav jagane nikla hoon

    भाव जगाने निकला हूँ ( Bhav jagane nikla hoon )   बुझे हुए मन के भावों को, पुनः जलाने निकला हूँ। सुप्त हो चुके हिन्दू मन में, भाव जगाने निकला हूँ। अपनी काशी अपनी मथुरा,अपनी जो साकेत यहाँ। बुझी हुई चिंगारी से फिर, अग्नि जलाने निकला हूँ। जगा सकूँ कुछ हिन्दू मन को,तो मुझको भी…

  • लौटआओगे तुम | Love Kavita

    लौट आओगे तुम ( Laut aaoge tum )   याद है एक बर्फीली पहाड़ी शाम सफेद चादर सी दूर तक फैली बर्फ देवदार के वृक्ष ठंडे ,काँपतें तुम्हारे हाथों की वो छूअन मात्र से पिघलने लगा मेरा रोम,रोम आँखों में तेरी मदहोशी लवों पर मुस्कान कानों में गूँजती वो निश्चल हँसी खो गये जो पल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *