Ram Naam ki

राम नाम की चादर ओढ़े | Ram Naam ki

राम नाम की चादर ओढ़े

( Ram naam ki chadar odhe ) 

 

राम नाम की चादर ओढ़े राम नाम की माला।
राम धुन में रत हो रहा श्रीराम भक्त मतवाला।

पवन वेग से पवनपुत्र गिरी द्रोण उठा कर लाया‌
संजीवन बूटी लक्ष्मण को झट से प्राण बचाया।

लांघ गया सौ योजन सिंधु कर रामनाम जयकार।
तिर जाते पत्थर पानी में राम जग के सृजनहार।

अंजनी का लाला बजरंग पवन पुत्र हनुमान
अष्ट सिद्धि नवनिधि दाता राम-राम में ध्यान।

तन सिंदूर गदा हाथ ले संकट मोचन हनुमान।
हर लेते हर पीर वीर बल बुद्धि कृपा निधान।

 

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

डमरू वाला है दातार | Damru Wala

 

Similar Posts

  • सोच कर देखो | Pakshi par Kavita

    सोच कर देखो ( Soch kar dekho ) पक्षी पर कविता   किसी आशियाना को कोई कब तक बनाएगा, जब उखाड़ फेंकने पर कोई तुला हो, बाग बगीचा वन उपवन को छिन्न-भिन्न कर हमें बसाना कौन चाहता है? आज कल वह कौन है जो पेड़ लगाने वाला कोई मिला हो, सुबह होते ही हम कलरव…

  • बोझ स्वाभिमान का | Bojh Swabhiman ka

    बोझ स्वाभिमान का ( Bojh swabhiman ka )   भर लिए भंडार ज्ञान का सर पर लादे बोझ स्वाभिमान का दब गई बेचारी विनम्रता संशय हर बात पर अपमान का बढ़ गई अकड़ दंभ से मिलने का मन बहुत कम से आंकने लगे कीमत और की बढ़ी औकात खुद की सबसे अदब, लिहाज सब छोटे…

  • सरहदें

    सरहदें कौन कहता है,सरहदों का कोई रंग नहीं होता,वो बताएँगे सरहद का रंग,जिसने इन लकीरों को बनते देखा,बहते गर्म लहू से,बनती खिंचती रेखा सरहद का रंग लाल होता हैगाढ़ा तरल लालजो बहता रहता हैगलेशियर से निकलीनदी की तरहजो कभी सूखती नहीं धर्म और भाषा का भेदबड़ा होता है, बहुत बड़ाजिसे नहीं मिटा पायागाँधी जैसा महामानव…

  • फ़र्क नहीं पड़ेगा | Poem fark nahi padega

    फ़र्क नहीं पड़ेगा ( Fark nahi padega )   बहुत सारी खामियां है मुझमें तो क्या हुआ……? तुमने कभी उन ख़ामियों को क्या मिटाना चाहा कभी….? नहीं ना…….!   तुम चाहते ही नहीं थे कभी कि हम भी उभर पाएं और तुम्हारे साथ खड़े हो सकें तुमने चाहा ही नहीं ऐसा कभी हम तुम्हारे साथ…

  • चढ़ते सूरज | Chadhate suraj

    चढ़ते सूरज ( Chadhate suraj )   चढ़ते सूरज की सवारी मेरे सिर पे आ गई । हम सफर थी मेरी परछाई उसे भी खा गई ।।   आपको जुल्मों का कर के तजुर्बा तारीफ में । कर रहा था बयां कड़वाहट जुबां पे आ गई ।।   सहन करने के अलावा और कुछ वश…

  • वीरों का शहर झुंझुनू | Kavita veeron ka shahar jhunjhunu

    वीरों का शहर झुंझुनू ( Veeron ka shahar jhunjhunu )   बलिदानों की परिपाटी में जिला झुंझुनू प्यारा है देश सेवा को आगे रहता दमकता एक सितारा है   मरुभूमि का शहर पुरातन अरावली की पर्वतमाला हरी-भरी सुंदर घाटियां मनोरम दृश्य बड़ा निराला   भित्ति चित्र सुंदर हवेलियां पर्यटक को लुभाती है राव शेखाजी ने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *