सबसे बड़ी समस्या-‘शुगर (डायबिटीज)’
“मैडम जी, कल आप स्कूल नहीं आई। आप तो मुझसे स्कूल आने को बोल रही थी, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ? घर परिवार में सब खैरियत से तो है?” असद सर ने रूमा मैडम से पूछा।
“क्या बताऊं भैया? मैं तो अपने एकलौते बेटे जुनैद(28 वर्ष) की ओर से बहुत दुखी हूँ। कमबख्त कहना ही नहीं मानता। हर समय बस मीट ही खिलाये जाओ उसे। बिना मीट के रोटी नहीं पचती उसकी। आए दिन होटलों का बाहर का खाना खाता रहता है, घर की दाल रोटियां उसे पसंद नहीं आती।” रूमा मैडम ने मुँह बनाकर कहा।
“मीट खाने से कोई दिक्कत हुई क्या जुनैद को?”
“पिछले एक सप्ताह से उसकी आंखों में बहुत दिक्कत चल रही थी, लेकिन उसने हमें बताया नहीं। जब कल रात उसको दिखना बंद सा हो गया, उसको कोई वस्तु स्पष्ट नजर ना आई तब जाकर उसने हमें इस बारे में बताया। 2 दिन तो वह अपनी आंखों को हाथों से बंद करके बिस्तर पर पड़ा रहा।
रात आंखों से कुछ भी स्पष्ट नजर ना आने पर वह चीखने-चिल्लाने लगा और रोने लगा। रात में ही जुनैद के पापा उसको आंखों के डॉक्टर के पास लेकर गये। वहाँ जाकर पता चला कि जुनैद की शुगर बहुत ज्यादा बढ़ गई है, जिस वजह से उसको दिखने में दिक्कत हो रही है। जब तक शुगर कंट्रोल न होगी तब तक मैं कोई दवा न दे सकूँगा।
आँखों की सही स्थिति का पता तभी चलेगा। फिर जुनैद को शुगर कंट्रोल करने की दवा दिलाई। तब जाकर उसकी स्थिति में थोड़ा-थोड़ा सुधार हुआ। अब उसको थोड़ा-थोड़ा दिखने लगा है। पूरी तरह सामान्य होने में अभी उसको लगभग एक सप्ताह लग जाएगा।” रूमा मैडम ने विस्तार से जुनैद की स्थिति के बारे में बताया।
“मात्र 28 वर्ष की उम्र में जुनैद को शुगर हो गया? मुझे यकीन नहीं हो रहा। क्या जुनैद को शुगर बचपन से ही है?” असद ने हैरानी से पूछा।
“नहीं, वह बचपन से बिल्कुल ठीक था। उसे कोई दिक्कत नहीं थी, हालांकि जुनैद के पापा को शुगर की समस्या है। लेकिन उन्होंने पिछले 10 सालों से शुगर को कंट्रोल कर रखा है।” रूमा मैडम ने बताया।
“ये विचारणीय प्रश्न है कि जुनैद को शुगर कैसे हुई? डॉक्टर ने कुछ बताया इस बारे में?” असद ने सवाल किया।
“जुनैद ने इस बारे में हमें कुछ नहीं बताया, लेकिन डॉक्टर को उसने सब सच-सच बता दिया था। आपको तो पता ही है सर। अबसे 8 वर्ष पहले जुनैद को हमने बीटेक करवाने के लिए अलीगढ़ भेज दिया था। उस दौरान जुनैद अलीगढ़ के एक होस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था।
तब इसने आए दिन होटलों में खूब मीट खाया, खूब फास्ट फूड खाये, और पानी की जगह सुबह-शाम, उठते-जागते-बैठते कोल्ड ड्रिंक का सेवन किया। जुनैद को बिगाड़ने में जुनैद के पापा का बड़ा हाथ है। जुनैद के पिताजी ने जुनैद की परवरिश में और पैसे भेजने में किसी तरह की कोई कमी ना की। इसका जुनैद ने खूब फायदा उठाया।
इसका परिणाम यह हुआ कि इसको शुगर हो गई। जुनैद ने डॉक्टर साहब को बताया कि बीटेक के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लगातार 6 महीने तक इसने पानी की एक बूंद भी न पी। खाना खाने से पहले, खाने के बाद हर जगह कोल्ड ड्रिंक्स का इस्तेमाल किया। डॉक्टर साहब ने बताया कि कोल्ड ड्रिंक पीना गन्दी आदत है।
इसका जितना कम इस्तेमाल किया जाए, उतना ही अच्छा है। ज्यादा कोल्ड ड्रिंक्स पीने से लीवर फैटी हो जाता है, दिमाग पर भी गलत प्रभाव पड़ता है, पेट पर चर्बी जमा होने लगती है जिससे हार्ट और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, शुगर लेवल हाई हो जाता है जिससे मोटापा तेजी से बढ़ता है, मोटापा बढ़ने से शरीर के सभी अंगों को बहुत नुकसान होता है। हॉस्टल टाइम से ही जुनैद को कोल्ड ड्रिंक्स, फास्ट फूड व मीट की लत लग गई थी जो इसकी अब तक जारी रही।
इन चीजों का नियमित सेवन करने से जुनैद को इतनी भयंकर शुगर हो गयी कि जुनैद की आंखों में धुंधलापन एवं प्लॉटर की समस्या पैदा हो गई। डॉक्टर साहब ने बताया समय के साथ शुगर से जुनैद की आंखों को और भी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जिससे दृष्टि कमजोर हो सकती है, अंधापन भी हो सकता है। अतः शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है और साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच करवानी बहुत जरूरी है।” डॉक्टर वाली बात मैडम ने असद को बताई।
“शुगर इतनी खतरनाक बीमारी है, मुझे नहीं पता था। मैडम जी, डॉक्टर ने और क्या-क्या बताया शुगर के बारे में? जुनैद की शुगर ठीक भी हो पाएगी या नहीं? मुझे चिंता हो रही है। क्या जुनैद की यह समस्या अनुवांशिक है?” असद ने एक साथ कई सवाल किए।
“यदि परिवार में माता-पिता या उनकी पीढ़ियों में किसी को शुगर की बीमारी हो तो अनुवांशिकता के कारण उनकी आने वाली पीढ़ियों में शुगर होने का खतरा बना रहता है। इसके साथ-साथ शारीरिक कार्य न करने और आरामदायक जीवन भी शुगर को जन्म देता है।
यदि परिवार में TYPE – 2 शुगर का इतिहास है तो यह पता लगाना मुश्किल है कि आपका शुगर जीवनशैली कारकों या अनुवांशिकी के कारण है। यदि शुगर अनुवांशिक है तो संतान में भी इसकी होने की आशंका 50% बढ़ जाती है, लेकिन खराब जीवनशैली भी शुगर की एक बड़ी वजह है।
इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, जंक फूड से दूरी व पोषण युक्त भोजन से इसके होने की आशंका को कम किया जा सकता है। शुगर में मीट का सेवन हानिकारक है लेकिन इस लड़के को कौन समझाये? मीट में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है जो ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देती है। इससे शरीर में इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है और धीरे-धीरे शुगर की समस्या शुरू हो जाती है।” मैडम ने बताया।
“मैडम जी, अभी आपने TYPE-2 डायबिटीज(शुगर) का नाम लिया। क्या यह भी डायबिटीज का प्रकार है? शुगर तो शुगर होती है। क्या शुगर भी कई प्रकार की होती है?” असद ने सवाल किये।
“शुगर अक्सर हल्के लक्षणों से शुरू होता है जैसे बहुत भूख लगना, बहुत थकान महसूस करना, बहुत अधिक बार पेशाब करने की आवश्यकता होना, बहुत अधिक प्यास लगना, शुष्क मुँह रहना, खुजली वाली त्वचा और धुंधली दृष्टि। शुगर दो तरह की होती है:- TYPE-1 और TYPE-2
टाइप 1 में शुगर के लक्षण जल्दी प्रकट होते हैं तथा अत्यधिक गंभीर होते हैं। जबकि टाइप टू में लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं।
टाइप वन में शुगर किशोरावस्था में दिखाई देती है। यदि आपकी उम्र 45 वर्ष या उससे अधिक है, आपके परिवार में शुगर का इतिहास रहा है, यदि आपको मोटापा है या आपका वजन अधिक है तो आपको शुगर होने की संभावना अधिक रहती है, इस तरह की शुगर टाइप 2 में आती है।
मुख्य अंतर टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के बीच यह माना जाता है कि टाइप 1 एक ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया के कारण होता है और जीवन में जल्दी विकसित होता है। जबकि टाइप 2 मधुमेह कई वर्षों के दौरान विकसित होता है। जीवनशैली के कारकों जैसे निष्क्रिय रहना और अधिक वजन उठाना से सम्बंधित है।
टाइप 1 डायबिटीज बच्चों और किशोरों में अधिक होता है। हालांकि इस बीमारी से पीड़ितों की संख्या कम है लेकिन यह टाइप 2 के मुकाबले अधिक घातक है। इस बीमारी में इंसुलिन नहीं बनता है। टाइप 2 डायबिटीज में राहत की बात यह होती है कि बॉडी में कुछ इंसुलिन बनता है।
Type 2 का कोई इलाज नहीं है. लेकिन आप इसे प्रबंधित कर सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव, दवा और रक्त शर्करा की निगरानी के साथ – इस तरह से कि आपके रक्त शर्करा के स्तर को स्वस्थ सीमा में रखा जा सके।
Type- 1 का भी वर्तमान में कोई इलाज नहीं है, टाइप 1 मधुमेह को इंसुलिन और स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखकर नियंत्रित किया जा सकता है।
डायबिटीज के मरीजों को खाने में कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए। जो लोग डायबिटीक पेशेंट्स होते हैं, उन्हें खाने में नमक का इस्तेमाल कम ही करना चाहिए। इसके साथ ही कोल्ड्रिंक्स, चीनी, आइसक्रीम, टॉफी जंक फ़ूड या ऑयली फ़ूड से भी शुगर लेवल के बढ़ने का काफी खतरा रहता है।
सेब, संतरा, अनार, पपीता और तरबूज खाने से आपको सही मात्रा में फाइबर मिल सकता है जबकि केला, आम और अंगूर जैसे हाई कैलोरी वाले फलों से बचना चाहिए.. हालांकि, मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। डायबिटीज के मरीजों के लिए कच्चा केला, लीची, अनार, एवोकाडो और अमरूद का सेवन करना सेहतमंद हो सकता है।
” डायबिटीज के प्रति असद की उत्सुकता देखते हुए रूमा मैडम ने विस्तार से उनको जानकारी दी। रूमा मैडम जी असद को इतनी ज्यादा जानकारी भी इसलिए दे पायीं क्योंकि मैडम के पति और बेटे को शुगर थी।
जब रूमा मैडम के द्वारा असद को मधुमेह(डायबिटीज या शुगर) के बारे में विस्तार से जानकारी मिल गयी। तब उसने उसी समय यह प्रण किया कि वह संतुलित आहार लेते हुए, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स व मीट का कम से कम सेवन करेगा ताकि उसको और उसके परिजनों को उसकी वजह से दिक्कतें न उठानी पड़ें।
इस दुनिया में आखिर शरीर ही तो अपना है जो जिंदगी के आखिरी दिन तक साथ निभायेगा। क्यों न इस शरीर को स्वस्थ रखने की कोशिश की जाये?

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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