Savita Hindi Poetry

सविता जी की कविताएँ | Savita Hindi Poetry

पुरानी तस्वीर


कुछ तस्वीरें पुरानी सी है।

बीते दिनों की आखिरी निशानी सी है।

पुराने होकर भी कुछ किस्से पुराने नहीं लगते।

अंजान होकर भी कुछ लोग अनजाने नहीं लगते।

यूं तो अक्सर हम आगे बढ़ जाते हैं वक्त के साथ ।

फिर भी कुछ लम्हे वहीं ठहर जाते हैं अपनों के पास।

कभी-कभी लगता है जैसे कल की ही तो बात है।

तुम्हारे साथ बिताए हुए लम्हें हर पल हमें याद है।

हरे गुलाब


ना फूलों की आरजू न कलियों की चाह ।
कोई बस मेरी पलकों को एक हसीन सा ख्वाब दे दें ।

चांद सितारों की ख्वाहिश नहीं हमें,
कोई बस तोहफ़े में हरे गुलाब दे दे ।

ना चाहत है महलों की, ना ख्वाहिश है गहनों की ।
ना मुझे कोई बंगला चाहिए ना ही महंगी गाड़ी चाहिए ।

भटक न जाऊं अपनी मंजिल से कभी,
बस मुझे कोई ज़रा सा रूबाब दे दे ।

चांद सितारों की आरजू नहीं हमें, बस कोई तोहफे में हरे गुलाब दे दे।
ना चाहत है दौलत की ना किसी की शोहरत की ।

ना ही किसी का तख्तों- ताज़ चाहिए, ना हीरे मोती जवाहरात चाहिए ।
गुम ना हो जाऊं अंधेरों में कहीं,

बस कोई मुझे ऐसा आफ़ताब दे दे।
चांद सितारों की आरजू नहीं हमें, बस कोई तोहफ़े में हरे गुलाब दे दे ।

जब इंसान चला जाता है


इंसान चला जाता है फिर लौटकर कभी नहीं आता ।
आंखों में देकर ग़म का सागर बस यादें छोड़ जाता है।


सूरज की किरणों सा, फूलों की खुशबू सा
चिरागों की ज्योति सा और पलकों पर मोती सा ।


लाख पुकारने पर भी वो जाने क्यों नहीं आता है ।
जख्मी कर हर सीने को बस तन्हा छोड़ जाता है।


इंसान चला जाता है फिर लौट कर कभी नहीं आता ।
कभी-कभी ख्यालों में, कभी किसी के सवालों में ।


तन्हा सी रातों में और अधूरी सी बातों में,
ज़िक्र जब भी उसका आता है, हंसती हुई आंखों से भी आंसू झ़लक जाता है ।


इंसान चला जाता है फिर कभी लोट कर नहीं आता ।
आंखों में देकर ग़म का सागर बस यादें छोड़ जाता है ।

अगर ऐसा होता

जिंदगी में अगर गम ना होते,
खुशियों के पल कम ना होते।
तकलीफ ना होती मरने में,
और दर्द ना होता यूं जीने में।
फूलों के संग कांटे ना होते,
मंजिलों के पथ पर रूकावटें ना होती,
अगर ऐसा होता तो कितना अच्छा होता।
उजालों के संग काला घना अंधेरा ना होता।
बस चारों और खुशियों का ही बसेरा होता।
प्यार के संग नफरत ना होती, दोस्ती के संग दुश्मनी ना होती।
ज़मीं पर ये सरहदें ना होती, दिलों पर बंदिशें ना होती ।
अगर ऐसा होता तो कितना अच्छा होता ।
बस चारों तरफ खुशियां ही खुशियां, अमन और चैन होता ।
जी लेते इस जिंदगी को हर लम्हे में, अगर रिश्तों की ये जंजीरे ना होती ।
पा लेते हर मंजिल को अगर उलझी अपनी तक़दीरें ना होती ।
पता नहीं और कितने इम्तिहां लेगी ये जिंदगी।
सब कहते हैं कि हाथों की लकीरों में लिखा है।
पर कितना अच्छा होता अगर ये हाथों की लकीरें ही ना होती ।

गुजरा हुआ कल

आओ फिर लौट चलें उसे गुजरे हुए कल में।
बचपन के उस दौर में और खट्टी मीठी यादों के पल में।
दोस्तों के साथ वो लुक्का-छुपी और पकड़म पकड़ाई खेलना।
तितलियां पकड़ना और झूलों पर झूलना।
छोटी-छोटी बातों पर वो रूठना और मानना।
जाने कहां पीछे छूट गया वो गुजरा जमाना।

वो पंछियों की तरह चहकना और फूलों की तरह महकना ।
वो बारिश में भीगना और खिलखिला कर हंसना ।
याद आ गया आज फिर से वो ज़माना।
बरसों पहले जो कहीं छोड़ आए थे अफसाना ।

कितने हंसी थे वो बचपन के लम्हें,
कितना सुकून था उन गलियारों में।
आओ फिर से लौट चलें उसे गुजरे हुए कल में।
कुछ लम्हें चुरा लाते हैं जो रह गए थे उसे पल में ।

शब्दों में ना रहने दो

आँखों मे जो सपने हैं,
उन्हें यूँ आंसुओं में ना बहने दो ।
जो आपको पैरों पर ना खड़ा होने दे,
उसे अपने जीवन में मत रहने दो।
ये जिंदगी बड़ी हसीन है,
इसे बोझ का बनाओ।
बस हसीन ही रहने दो ।

कैद कर लो इन लम्हों को
कुछ रंगीन तस्वीरों में,
इन्हें यादें पुरानी बनकर मत रहने दो।
वक्त एक बहता दरिया है ।
बहता ही चला जाएगा ।
थोड़ी सी तो कदर कर लो,
इसे यूं व्यर्थ ना जाने दो।

समेट लो खुशियों को,
लम्हों की हर डाल से,
इन्हें सिर्फ ख़्वाहिशों में ना रहने दो।
बिखर जाओ इन हवाओं में खुशबू बनकर,
खुद को जमीं की धूल बनकर मत रहनेदो।


जिंदगी में यदि सफलता चाहते हो
तो भीड़ से आगे निकलिए ।
खुद को इस जमाने की भीड़ मे गुम ना होने दो,
यदि मेरे विचार आपको पसंद आ जाएं तो
इन्हें अपने जीवन में उतारिए ।
इन्हें बस शब्दों में ना रहने दो।
इन्हें बस शब्दो मे का रहने दो।

युद्धक्षेत्र

कुछ बिक गए आन पर,
कुछ बिक गए शान पर।
हमारे हिस्से आए हुए सब लोग,
बिक गए झूठे ईमान पर।
जहां तलक भी देखती हूं,
बस नफरतों के साए नजर आते हैं।
यह एक ऐसा युद्ध क्षेत्र है,
जहां अपने भी साथ छोड़ जाते हैं।

कुछ बिक गए दौलत पर,
किसी को शौहरत ले डूबी।
करके बेवफाई हमसे,
कुछ बिक गए वफा के नाम पर।
जहां वादा करके उम्र भर का,
हमसफर बीच मझधार में छोड़ जाते हैं।
यह एक ऐसा युद्ध क्षेत्र है।
जहां अपने भी मुंह मोड़ जाते हैं।

किसी की रूह बिक गई,
किसी का ज़मीर बिक गया।
हर कदम पर साथ दिया जिनका हमने,
वो भी बिक गए अपने गुमान पर।
जिन राहों पर चलते-चलते,
दोस्त भी भरोसा तोड़ जाते हैं।
यह एक ऐसा युद्ध क्षेत्र है,
जहां अपने भी साथ छोड़ जाते हैं।

सविता

करनाल ( हरियाणा )

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