शुभ अशुभ | Shubh Ashubh

परमात्मा का बनाया प्रत्येक दिन शुभ होता है इसलिए प्रत्येक दिन ही एक से बढ़कर एक सुंदर और पवित्र दिन है ईश्वर महान है इसलिए उसकी कृतियां भी महान है।

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य कहते हैं कि मनुष्य को चाहिए प्रत्येक दिन को शुभ माने। शुभ कर्मों के लिए हर दिन शुभ का है और अशुभ कामों के लिए हर दिन अशुभ।

लेकिन अक्सर देखा जाता है कि शुभ अशुभ के चक्कर में लोग अक्सर अपना धन और धर्म दोनों गवा देते हैं। अमुक घड़ी में अमुक दिन उत्पन्न हुआ बालक अशुभ होता है ऐसी मान्यताओं ने अनेक बच्चों को आजीवन उपेक्षित और तिरस्कृत रहने के लिए विवश कर दिया। ऐसे बच्चे जिंदगी भर समाज की उपेक्षा के शिकार होते हैं।

देखा गया है यदि किसी लड़का या लड़की को मंगली सिद्ध कर दिया जाए तो उसका दंश वह जीवन भर भोगता रहता है। ऐसे ही हिंदू समाज में मूर में पैदा होने के बातें कही जाती है।

मुख्य बात यह है कि ना कोई मूर होता है ना कोई मंगली होता है यह सब ज्योतिषियों द्वारा समाज को मूर्ख बनाने का धंधा है। जिसकी चपेट में व्यक्ति एक बार यदि आ जाता है तो उसका डंस जीवन भर भोगता रहता है।

मुख्य रूप से 27 नक्षत्र होते हैं जिसमें 6 मूल के होते हैं। इस प्रकार से 22% बच्चे मूल मे उत्पन्न होते हैं । यदि हम मूल की मान्यता माने तो यह सभी बच्चे जीवन भर उपेक्षा के शिकार रहेंगे।

इस प्रकार से मूल में पैदा हुए बच्चों को ना तो पूरा-पूरा प्यार ही मां-बाप का मिलता है और ना ही उनका सही से पालन पोषण होता है ।ऐसे बच्चे जीवन भर भयभीत रहते हैं।

ऐसे ही जिनको मंगली बता दिया जाता है उनको भी मंगली का दंश जीवन भर भोगना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या ऐसे बच्चों का शादी विवाह में भी बड़ी अड़चन आती है क्योंकि लड़के लड़की में मंगली का मिलान कराया जाता है जो कि मिलना बड़ा मुश्किल होता है।

जिसके कारण अक्सर उनके शादी की उम्र भी खत्म हो जाती हैं। यह मूर और मंगली का चक्कर केवल हिंदुओं में ही व्याप्त है। जो इन मूर और मंगली के चक्कर में फसता है।इसमें फसने का तो रास्ता है निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
देखा गया है कि जो व्यक्ति इस प्रकार की विचारधारा नहीं मानता है वह ज्यादा सुखी और संपन्न रहता है।

जो इन चक्करों में एक बार फस गया तो फस गया। जीवन भर वह मूर और मंगली ही उतारता रहता है और समाज की उपेक्षा का शिकार ऊपर से बनता रहता है।

सामान्य जनता को चाहिए कि वह भूल से भी मूल और मंगली के चक्कर में न फंसे। सच्चाई यह है कि हर दिन और हर नक्षत्र शुभ है। किसी दिन ना किसी का जन्म शुभ है ना अशुभ है । प्रयत्न और कर्तव्य से हर व्यक्ति अच्छा हो सकता है और वह बुरा भी हो सकता है। यह अंधविश्वास अकारण ही लोगों के लिए आशंका का कारण बना हुआ है और जिसके दुष्परिणाम लोगों को जीवन भर भोगना पड़ता है।

मनुष्य को चाहिए कि यदि वह जीवन में सुखी रहना चाहता है तो ऐसी मान्यताओं को अपने मन से निकाल दें।
अक्सर देखा गया है ऐसी मान्यताओं के शिकार लोग अपने बच्चों के ही दुश्मन बन जाते हैं।

कानपुर की एक महिला ने अपनी एक साल की लड़की को सरसैया घाट पर गंगा के गहरे जल में फेंक दिया । किंतु मल्लाहो ने त़ैर कर उसे बचा लिया ।उस महिला ने बताया कि उसे ज्योतिषियों ने कहा है कि वह अशुभ घड़ी में पैदा हुई है ।इसके कारण माता-पिता तथा घर वालों को अनेकों कष्ट सहने पड़ेंगे । उन कष्टो से बचने के लिए ही उसने बच्ची को पीछा छुड़ाने के लिए ऐसा कृत्य किया ।

ऐसे ही मेरठ में एक युवक ने अपनी नव विवाहित स्त्री को चारपाई से बांधकर उस पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी ।कहते हैं कि मरने से पहले उस जली हुई स्त्री ने पास पहुंचने वाले लोगों को बताया कि उसके पति ने उसे जलाया है।

युवक का विवाह 1 वर्ष पूर्व ही हुआ था ।तब से वह बीमार चल रहा था। ज्योतिषियों ने उससे कहा कि तुम्हारी स्त्री मंगली है। उससे तुम बीमार रहते हो ।युवक ने इस पर विश्वास करके पत्नी को क्रूरता पूर्वक जला डाला।
(संदर्भ -अंधविश्वास से लाभ कुछ नहीं हानी अपार है पृष्ठ ९-१०)

ऐसी घटनाएं समाज में अक्सर होती रहती है।जिसमें लोग ज्योतिषियों के बहकावे में आकर अपने ही अपनों के दुश्मन बन जाते हैं। समाज के लोगों को चाहिए कि वह ऐसी मूड़ मान्यताओं से स्वयं को बचाएं एवं परिवार तथा समाज को भी बचाने का प्रयास करें।

ऐसी मूर्खताओं के प्रति पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य कहते हैं कल किसका क्या होने वाला है यह रहस्य ईश्वर ने केवल अपने हाथ में छुपा कर रखा है ।मनुष्य को वह विदित नहीं। यदि विदित रहा होता तो भविष्यवक्ता लोग अपने बारे में अवश्य जान लेते। और मुसीबत से बचने का लोग निश्चित प्रयास करते। परंतु सच्चाई यह देखा गया है कि जैसे अन्य लोग अपने परिवार के बारे में चिंतित एवं अनिश्चित रहते हैं वैसे ही वह भी रहते हैं।

इसकी सच्चाई यह है कि ज्योतिष अंधेरे में टटोलने और कहीं की ईट कहीं का रोड़ जोड़ने की अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। जागरूक जनता को चाहिए कि वह शुभ अशुभ के चक्कर में न फसे। परमात्मा द्वारा निर्मित हर दिन शुभ है। कोई भी दिन अशुभ नहीं हो सकता। बस अशुभ कामों के लिए दिन अशुभ होता है। किसी बच्चे का पैदा होना या शादी विवाह होना यह सारे शुभ कर्म है यह अशुभ हो ही नहीं सकता।

परमात्मा की कृति कोई बालक कैसे अशुभ हो सकता है। समाज के जागृत लोगों को चाहिए कि वह मूर मंगली के चक्कर में न फंसे। अपने बालक को जीते जी किसी ज्योतिषी के चक्कर में उपेक्षा का शिकार ना बनाएं।

 

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

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