सॉल्वर
2014 की बात है। एक दिन बाजार में सामान खरीदते वक्त मुझे मेरा कॉलेज समय का दोस्त विनोद टकरा गया। बातों बातों में उसने बताया कि वह बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) है।
“बैंक में पी०ओ० बनने के लिए आपने बहुत मेहनत की होगी। मैंने सुना है कि बैंक पी०ओ० का एग्जाम बड़ा कठिन होता है।” मैंने सवाल किया।
“नहीं, ऐसा नहीं है। अगर आपको बैंक पी०ओ० बनना है, तो बताओ। आपकी भी बैंक में नौकरी लगवा देंगे।” विनोद बोला।
“नहीं भैया, मैं टीचर ही ठीक हूँ और इसी में खुश हूँ। अभी आपने बोला कि आपको भी बैंक पी०ओ० बनवा देंगे, क्या बैंक पी०ओ० बनना इतना आसान है?” मैंने सवाल किया।
“किसी को बताना मत। राज की बात है। बस अपने तक सीमित रखना।”
“ठीक है, बताओ। मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा।”
“ऐसा है भाई। आपने सॉल्वर का नाम सुना होगा। सॉल्वर वे लोग होते हैं जो दूसरों की जगह एग्जाम देते हैं। बस इतना समझ लो कि मैं साइड से सॉल्वर का भी काम करता हूँ। मेरे साथ-साथ और भी बहुत से लोग इस काम में लगे हुए हैं। इस तरह से हम एक्स्ट्रा इनकम कर लेते हैं। हमें एकमुश्त इकट्ठा मोटी रकम मिल जाती है।”
“क्या आपको पकड़े जाने का डर नहीं लगता?”
“बिल्कुल डर होता है, लेकिन हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऊपर से लेकर नीचे तक रुपए देकर गुपचुप तरीके से सब काम संपन्न हो जाते हैं। कोई पकड़ में नहीं आता। अगर दिन ही खराब हो तो कह नहीं सकते। वैसे जानकारी के लिए बता दूँ कि इस समय बैंक क्लर्क और बैंक पी०ओ० के ऑनलाइन फॉर्म निकले हुए हैं। बैंक क्लर्क में सलेक्शन करवाने के 6 लाख और बैंक पी०ओ० में सलेक्शन करवाने में 10 लाख का खर्चा आ रहा है।”
“आप दूसरों की जगह एग्जाम देते हो और पकड़ में नहीं आते। यह कैसे संभव है?”
“अरे भाई। आप समझे नहीं, विस्तार से बताता हूँ। शुरुआत में जब ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है तब अभ्यर्थी के फोटो के स्थान पर हमारा फ़ोटो और अन्य सारी डिटेल अभ्यर्थी की होती हैं। जब अभ्यर्थी का फाइनल सलेक्शन हो जाता है तो सिस्टम से हमारा फ़ोटो डिलीट करवा दिया जाता है और अभ्यर्थी की फ़ोटो चस्पा कर दी जाती है।
इस काम में बहुत बड़ा नेटवर्क लगा हुआ है। ऊपर से लेकर नीचे तक हर जगह रुपया दिया जाता है ताकि अभ्यर्थी का काम नम्बर 1 में हो जाये। मैंने आपको बताया था कि हम बैंक क्लर्क के 6 लाख और बैंक पी०ओ० के 10 लाख रुपए लेते हैं।
इन रुपए में से हमें 1 से 2 लाख रुपये प्रति सलेक्शन आमदनी हो जाती है। रुपये ऊपर से लेकर नीचे तक बांटे जाते हैं। इस वजह से हम लोग पकड़ में नहीं आते। बाद में सब कुछ वैध रूप से ऑनलाइन दर्ज हो जाता है। अभ्यर्थी को एग्जाम वाले दिन घर से बाहर रहना होता है ताकि कोई आपत्ति न उठा सके। इस तरह हम तीनों का भला हो जाता है।”
“तीनों का? तीनों कौन?”
“अरे भाई, हमारा, मध्यस्थों का और बेरोजगार व्यक्ति का। मुझे और मध्यस्थों को इकट्ठा मोटी रकम मिल जाती है और बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता है। अगर कोई आपका अपना बंदा हो तो बताना। उसका सिलेक्शन हंड्रेड परसेंट करवाने की गारंटी मेरी है।
एक बात और, एग्जाम फॉर्म अभ्यर्थी खुद ऑनलाइन ना भरे, हम खुद अपनी सेटिंग के अनुसार उसका फॉर्म भरेंगे। एग्जाम की जगह और शहर हम चुनेंगे। अभ्यर्थी को बस अपनी डीटेल्स, फोटो, एजुकेशन सर्टिफिकेट्स वगैरह हमें देने होंगे। इसके बाद उसे हमसे कोई मतलब नहीं होगा। उसका फॉर्म भरने से लेकर सलेक्शन करवाने तक की सारी जिम्मेदारी हमारी होती है। सलेक्शन हो जाने के बाद हम उससे इकट्ठा रकम ले लेते हैं। इससे पहले हमें अभ्यर्थी से कुछ नहीं चाहिए होता है।”
“क्या कहा आपने? सलेक्शन के बाद रुपए लेते हो? यह तो बहुत बड़ी बात है। आजकल लोग शुरू में पैसे भी ले लेते हैं और सलेक्शन भी नहीं करवाते। कोई अभ्यर्थी होगा तो बताऊंगा।” विदा लेने से पहले हमने एक दूसरे का मोबाइल नंबर लिया ताकि जरूरत पर उससे संपर्क किया जा सके।
घर आकर भी विनोद की बातें मेरे दिमाग में घूम रही थी। मैं सोचने लगा कि विनोद जैसे सोल्वर्स की गतिविधियां परीक्षा की पवित्रता खराब करती हैं और अन्य छात्रों के साथ अन्याय करती हैं, इसलिए परीक्षा प्रशासन द्वारा और सोल्वर्स को पकड़ने और दंडित करने के विशेष प्रयास किए जाते हैं।
बावजूद इसके ज्यादातर सॉल्वर्स पकड़ में नहीं आते। इसका कारण यही है कि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने में ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। लोग चंद रुपयों के लालच में, परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करके… अन्य छात्रों के लिए परीक्षा में उत्तर लिखने का काम खुलेआम कर रहे हैं। भ्रष्टाचार की जड़े हमारी सरकारी तंत्र में निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर के अधिकारियों में बहुत गहराई से समाई हुई है।
इन सब बातों को दरकिनार कर, मुझे मधु मैडम का ध्यान आया। मधु मैडम पांच बहनें और एक भाई थे। सब बहनों की शादी हो चुकी थी, सिर्फ भाई अविवाहित और बेरोजगार था। मधु मैडम अपने भाई की किसी भी सरकारी डिपार्टमेंट में नौकरी लगवाने के लिए लालायित थी, इसके लिए वे रुपए देने तक के लिए तैयार थी।
उन्होंने एक दो बार मुझसे पहले भी अपने भाई की नौकरी के संबंध में बात भी की थी। तब मैंने टाल दिया था लेकिन अब विनोद द्वारा ऑफर दिए जाने पर मैंने मधु मैडम से संपर्क करना उचित समझा और इस संदर्भ में उनसे मुलाकात करके पूछा-
“मैडम जी, आप अपने भाई की नौकरी लगवाने के लिए चिंतित थी। क्या आपके भाई का कहीं सलेक्शन हुआ?”
“अरे कहाँ सर, नौकरी मिलना कहाँ आसान है? मेरा भाई खूब मेहनत कर रहा है, कोचिंग भी जा रहा है लेकिन उसका कहीं सलेक्शन नहीं हो पा रहा है। हम सब बहनें उसके लिए बहुत परेशान हैं। हम तो रुपए देने को भी तैयार हैं, कोई नौकरी लगवाने वाला मिले तो सही।”
“मैडम जी, कल मेरी मुलाकात काफी समय बाद अपने दोस्त से हुई, जो ₹6 लाख लेकर बैंक क्लर्क व 10 लाख में बैंक पी० ओ० बनवाने की गारंटी ले रहा है। अगर आपका अपने भाई की नौकरी बैंक में लगवाने के मन हो तो बता दीजिएगा।”
“बताना क्या है सर, आप बात कर लीजिए। आप बैंक पी०ओ० के लिए बात करना उनसे। बैंक पी०ओ० पोस्ट बड़ी है तो तनख्वाह ज्यादा होगी। हम 10 लाख रुपए देने को तैयार है। मम्मी पापा और हम सब बहनें चाहती हैं कि किसी भी सूरत में भाई सेटल हो जाए, तो सबकी चिंता खत्म हो।”
“ठीक है। मैं आपके भाई के लिए अपने मित्र से बात करता हूँ। पूछता हूँ कि आपके भाई की क्या-क्या इन्फॉर्मेशन चाहिए उसे… ताकि वह बैंक पी०ओ० का फॉर्म भर सके। इसके बाद आपको बताता हूँ।”
शाम को मैंनें विनोद के नंबर पर कॉल की और उसे मैडम से हुई सारी बात बताई। विनोद बोला-
“भाई, मैडम के भाई का काम हंड्रेड परसेंट हो जाएगा लेकिन याद रखो कि 10 लाख बहुत बड़ी रकम होती है। मैडम ईमानदार तो है? क्या आपको मैडम पर भरोसा है? मान लो, अगर मैडम के भाई का सलेक्शन हमने करवा दिया तो सारे रुपये मिलने की कितने परसेंट गारंटी है? सलेक्शन के बाद, अगर दस लाख रुपये देने की 100% जिम्मेदारी आप ले लो तो हम आश्वस्त होकर मैडम के भाई का काम करवाएं।
देखो भाई, बुरा मत मानना, हम आपको जानते हैं लेकिन मैडम को या उनके भाई को नहीं। आप हमारे दोस्त हो। ग्रेजुएशन तक हम साथ पढ़े हैं। एक दूसरे के घर आना जाना रहा है। मैं नहीं चाहता कि रुपयों को लेकर हमारे सम्बन्ध खराब हों। मुझे आप पर पूरा भरोसा है। आपके भरोसे हम काम भी कर देंगे। बस एक बात याद रखना, सलेक्शन के बाद अगर वे रुपए नहीं देते हैं या रुपए कम देते हैं तो उन रुपयों की भरपाई आपको करनी पड़ेगी।” भरपाई की बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया, खामोश हो गया।
विनोद आगे बोला-
“भाई, यह दुनिया बहुत खराब है। काम पड़ने के समय पर लोग कुछ और… तथा काम निकल जाने के बाद कुछ और होते हैं। आज की तारीख में किसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता। वैसे तो हम सलेक्शन लेटर देने के बाद ही पूरी रकम लेते हैं, लेकिन हम विश्वास किसी पर 100% नहीं करते।
इसके लिए हम एक काम करते हैं कि ऑनलाइन आवेदन करते समय ही हम अभ्यर्थी के सभी ओरिजिनल शैक्षिक प्रमाणपत्र, मार्कशीट्स वगैरह अपने कब्जे में लेकर रख लेते हैं ताकि वह अंत में रुपए देने से मुकर न जाये। जब हम उससे सारी रकम ले लेते हैं, तब उसे सलेक्शन लेटर और उसके ओरिजिनल कागजात लौटा देते हैं।
फिर उन कागजात के आधार पर वह नौकरी ज्वाइन कर लेता है। बिना ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स के जॉइनिंग तो मिलने से रही? आप एक काम करो, मधु मैडम से आप उसके भाई के फोटो, सभी ओरिजिनल मार्कशीट्स, डॉक्यूमेंट वगैरह लेकर अपने कब्जे में रख लो। अगर मैडम को परखना है तो एक काम और करो। मैडम से एक लाख रुपये लेकर अपने पास रख लो।”
“₹100000? क्यों? आप तो बाद में रुपए लेते हो ना?” मैंने सवाल किया।
“हाँ, हम रुपए बाद में ही लेते हैं। वे रुपए आप अपने पास रख लेना। मुझे रुपए लास्ट में ही चाहिए होंगे। यह रुपए मैडम को परखने के लिए लेने हैं। रुपए आपके पास रहे या मेरे पास… एक ही बात है। अगर उन्होंने तुरंत ₹100000 दे दिए तो वे काम हो जाने पर 10 लाख रुपए भी आराम से दे देंगी। इससे साबित हो जाएगा कि वे अपने भाई की नौकरी लगवाने के प्रति गंभीर है।
अगर उन्होंने ₹100000 देने में ही आना-कानी की तो समझ लेना वे दस लाख रुपये नहीं दे सकेंगी। फिर आप इस मामले से दूर हो जाना। उनके भाई की नौकरी लगवाने के चक्कर में मत पड़ना। कहीं ऐसा ना हो कि वे आपको मीठी-मीठी बातें करके फंसा ले और बाद में सारी रकम आपको चुकानी पड़े।”
मुझे विनोद की बातों में दम लगा। अगले दिन मैं फिर से मधु मैडम से मिला।
“मैडम जी, आपके भाई का हंड्रेड परसेंट सलेक्शन हो जाएगा। मेरी फ्रेंड से बात हो गई है। आपको दो दिन में पचास हजार (जानबूझकर विनोद द्वारा बताए 1 लाख की बजाय पचास हजार मांगे) रूपये और अपने भाई के फ़ोटो, सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंटस, मार्कशीट्स वगैरह देनी है।”
एडवांस में पचास हजार देने का सुनकर मधु मैडम बोली-
“सर, सभी डाक्यूमेंट्स, फोटो वगैरह तो मैं आज शाम को ही मंगवा लूंगी, लेकिन पचास हजार का इंतजाम मुझसे अभी ना हो पाएगा। एक काम करो सर, आप पचास हजार उन्हें अपने पास से दे दो। 3 महीने बाद जब गन्ने की पर्चियों का पेमेंट मिलेगा, तब हम आपके रुपए चुका देंगे।”
“मैडम जी, अभी मैंनें आपसे मात्र पचास हजार देने को कहा है। सोचो, अगर दो महीने बाद आपके भाई का सलेक्शन हो गया तो 10 लाख रुपयों का आप तुरन्त कहाँ से इंतज़ाम करोगे। रुपये देने के बाद ही वे सलेक्शन लेटर देंगे।”
“अरे सर, ईश्वर की कृपा से हमारे पास रुपये, जमीन, जायदाद, दौलत की कोई कमी नहीं है। समय-समय की बात है कि इस समय हमारे पास रुपए नहीं है। पिछले महीने ही 20 लाख की जमीन खरीदी है। इसलिए हाथ तंग है। सरजी, आपको हंड्रेड परसेंट सारे रुपए मिल जाएंगे।
अभी आप पचास हजार अपने पास से दे दो। आपके और उनके रुपए मारे नहीं जाएंगे। विश्वास रखिये। हम बेईमान नहीं हैं। गन्ने का पेमेंट मिलते ही हम आपके रुपये चुका देंगे तथा सलेक्शन होने पर तत्काल रुपयों की जरूरत पड़ी तो जमीन बेच देंगे।” मधु मैडम से यह जवाब सुनकर मैं खामोश हो गया।
शाम को मैंनें विनोद को पुनः फोन किया और उसको मधु मैडम से हुई सभी बातें बताई। विनोद ने मुझे इस मामले से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि आप मैडम से बोल देना कि मुझसे संपर्क नहीं हो पाया। नंबर बन्द जा रहा है। इस तरह आपके उनसे और मेरे आपसे रिलेशन खराब नहीं होंगे। रुपया प्यार की, सम्बन्धों की कैंची है। मुझे लग रहा था कहीं मैडम तुम्हारा उल्लू ना बना रही हो।
इसलिए लाख रुपये मांगने की बात कही थी। अपना तो सीधा सा फंडा है कि अगर व्यक्ति को परखना है तो उससे रुपये मांग लो। अगर उसने तत्काल रुपए दे दिए तो समझो, उसको आप पर यकीन है। अगर रुपये देने में आनाकानी की तो समझो गड़बड़ है। विश्वास में ही व्यक्ति मारा जाता है। मेरे साथ भी विश्वासघात हो चुका है। विश्वास करने के चक्कर में मुझे चार लाख का नुकसान उठाना पड़ा, वो भी बेहद करीबी रिश्तेदारों से।” विनोद ने कहा।
“वो कैसे?” मैंने कारण जानने की कोशिश की।
“आपको जानकारी नहीं है। बात यह है कि एक जगह से मेरी शादी फिक्स हो गयी थी। शादी में 6 माह से ज्यादा का समय बाकी था। मेरा होने वाला साला बेरोजगार था। उसको गलती से मैंने अपने सॉल्वर के काम के बारे में बता दिया। तब मेरे होने वाले साले ने मुझसे बैंक क्लर्क बनवाने की अपील की और काम हो जाने पर रुपए देने का आश्वासन दिया। मैंनें भी सोचा कि शादी भी मेरी यहीं से होनी है।
यह मेरी होने वाली बीवी का सगा भाई है। जीजा-साले का रिश्ता तो बहुत करीब का रिश्ता होता है। चलो, यकीन कर लेते हैं। मैंने उसके सिर्फ ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स, मार्कशीट्स वगैरह अपने कब्जे में रखें। उससे एडवांस में कोई रुपया नहीं लिया और उसका फाइनल सलेक्शन करवा दिया।
जब सलेक्शन हो गया तो मैंने उससे रुपये मांगे। तब उसने मुझे रुपए देने से इनकार करते हुए कहा- ‘अपने साले से भी रुपये लोगे क्या, जीजा जी?’ मैंने कहा- ‘रिश्तेदारी अपनी जगह है और रुपए अपनी जगह। रुपए तो मुझे चाहिए ही… क्योंकि तुम्हारे सलेक्शन के लिए मुझे नीचे से लेकर ऊपर तक सबको रुपए देने पड़े हैं।
तुम्हारे लिए बस यही छूट दे सकता हूँ कि तुम्हारे सलेक्शन से जो आमदनी मुझे होती, वे रुपये मत दो। रिश्तेदारी के नाते बस इतना कर सकता हूँ। चल एक काम कर, मुझे 6 लाख की जगह चार लाख रुपए दे दे। ये रुपये सच में मुझे अपनी जेब से देने पड़े हैं।
लेकिन उसने बदतमीजी दिखाते हुए मुझे ₹1 भी नहीं दिया। मजबूरन मैंनें भी उसके डॉक्यूमेंट, मार्कशीट्स नहीं लौटाई और ना ही सलेक्शन लेटर दिया। मेरी इस हरकत से गुस्सा होकर उस कमीने साले ने मेरी पुलिस में कंप्लेंन दर्ज कर दी उसने मुझ पर डाक्यूमेंट्स चोरी करने और न लौटाने का आरोप लगाया।
जेल जाने के डर से मजबूरन मुझे उसके सभी डॉक्यूमेंट वापस करने पड़े। उसका सलेक्शन करवाने के चार लाख रुपये मुझे अपनी जेब से भरने पड़े। इसके बाद मैंने उस परिवार से अपना हमेशा-हमेशा के लिए संबंध खत्म कर लिया और अपनी शादी तोड़ दी। उस दिन के बाद से मैं किसी पर आसानी से विश्वास नहीं करता। सबको शक की निगाह से देखता हूँ। व्यक्ति को परखने के बाद ही उनका काम करवाता हूँ।” विनोद ने पूरी बात बताई।
“भाई, आपका तो बड़ा नुकसान हो गया। आपके साथ जो हुआ, गलत हुआ। साले को यह सब नहीं करना चाहिए था। आप अनुभवी हो। धोखा खाये हुए हो। आज आपकी वजह से, आपकी सलाह से मेरा भी नुकसान होने से बच गया। कल को अगर आपने मधु मैडम के भाई का सलेक्शन करवा दिया और उन्होंने भी बाकी रुपये देने से इंकार कर दिया तो मुझे अपनी जेब से रुपये भरने पड़ेंगे।
आपने तो मुझे मैडम से ₹100000 लेने के लिए बोला था, जबकि मैंने तो उनसे मात्र ₹50000 ही मांगे थे और वे रुपये भी उन्होंने तत्काल देने से इनकार कर दिया। साफ-साफ बोल दिया कि आप दे दो, मैं 3 महीने बाद गन्ने का पेमेंट मिलने पर दे दूंगी। काम करवाने वाला रुपये हाथ मे लेकर काम करवाता है, वह टाल मटोल नहीं करता। मैं नासमझ विश्वास में, भलाई करने में मारा जाता।”
मैंने विनोद का तहे-दिल से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया और कसम खाई कि कभी भी इस तरह के नंबर दो के कामों में बीच में नहीं पडूंगा और ऐसे कामों से कोसो दूर रहूँगा।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा
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