सुराही जाम टकराने लगे हैं

सुराही जाम टकराने लगे हैं

नज़र मंज़र ये क्या आने लगे हैं
चमन में फूल मुरझाने लगे हैं

सियासत चल रही है ख़ूब उनकी
जो ख़ाबों से ही बहलाने लगे हैं

वज़ीरों की सियासत देखियेगा
बदलकर केचुली आने लगे हैं

बनाकर गीदड़ों ने फौज अपनी
वो शेरों पर ही गुर्राने लगे हैं

भिखारी बन के जो आये थे कल ही
नज़र मिलते ही बलखाने लगे हैं

गिरे जब अश्क़ आँखों से हमारी
वो दामन को ही सरकाने लगे हैं

हमारे क़ुर्ब की ख़ुश्बू जो पहुँची
पड़ोसी भी ग़ज़ल गाने लगे हैं

क़दम रखते ही साग़र अन्जुमन में
सुराही जाम टकराने लगे हैं

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • घर की इज़्ज़त | Ghazal Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat )   यह हुनर दिल में ढाल कर रखना घर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँ कोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँ अपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जाये दर्द दिल का…

  • खुमार सावन का | Ghazal Khumaar Sawan ka

    खुमार सावन का ( Khumaar Sawan ka ) बीता मौसम हज़ार सावन का आप बिन क्या शुमार सावन का बात बनती नज़र नही आती है अधूरा जो प्यार सावन का इक नज़र देख लूँ अगर तुमको । तब ही आये करार सावन का वो न आयेगा पास में मेरे क्यों करूँ इंतज़ार सावन का आप…

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

  • जाइए सो जाइए | Jayie so Jayie

    जाइए सो जाइए ( Jayie so Jayie ) छोड़िए भी अब ज़राफ़त जाइए सो जाइए। हो गयी काफ़ी शरारत जाइए सो जाइए। जानेमन जान-ए-मसर्रत जाइए सो जाइए। बन्द कीजे बाबे उल्फ़त जाइए सो जाइए। नींद सा आराम दुनिया की किसी शय में नहीं नींद है अल्लाह नेअ़मत जाइए सो जाइए। मैं तो पागल हूं न…

  • आज़माया करो | Azmaya Karo

    आज़माया करो सब्र मेरा न यूँ आज़माया करोरूबरू ऐसे सज कर न आया करो इतनी बातें न हमसे बनाया करोजामे – उल्फ़त ख़ुशी से पिलाया करो साक़िया तुम को इस प्यासे दिल की क़समशाम ढलते ही महफ़िल सजाया करो प्यार की मौजें दिल में पटकती हैं सरइस समुंदर में आकर नहाया करो कैसे जानें कि…

  • आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *