Tag: कविताएँ
तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita
तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से ( Tumhe chaha adhik sare jahan se ) तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से। मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।। ऐ मेरी जाने गजल तू ही बता, कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।। किसी भी चीज पे गुरुर न कर, हाथ खाली ही आया है वहां से।। मैं …
शटर उठा दो | Kavita
शटर उठा दो ( Shatar utha do ) मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो। मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो। पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…
पुत्री की वेदना शराबी पिता से | Kavita
पुत्री की वेदना शराबी पिता से ( Putri ki vedna sharabi pita se ) पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है, मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है, सब बेच मेरी खुशियों का शराब पी गए, पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है, सब बेच उनके अरमानों का …
संसय | Kavita
संसय ( Sansay ) मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है। साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है। वश में…
बंधु अपने दिल की सुन | Geet
बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon ) चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु अपने दिल की सुन। अपनी धुन में बढ़ता जा, उन्नति शिखर चढ़ता जा। आंधी से तूफानों से, हर मुश्किल से लड़ता जा। हौसला करके बुलंद, गा मस्ती…
प्रतिशोध | Pratishodh
प्रतिशोध ( Pratishodh ) मै हार नही सकता फिर ये, जंग जीत दिखलाऊंगा। फिर से विजयी बनकर के भगवा,ध्वंजा गगन लहराऊगा। मस्तक पर चमकेगा फिर सें, चन्दन सुवर्णा दमकांऊगा। मै सागर जल तट छोड़ चुका पर,पुनः लौट कर आऊँगा। जी जिष्णु सा सामर्थवान बन, कुरूक्षेत्र में लौटूंगा। मैं मरा नही हूँ अन्तर्मन…
आयी देखो फुहार सावन की | Aazam Poetry
आयी देखो फुहार सावन की ( Aayi dekho phuhaar sawan ki ) आयी देखो फुहार सावन की ! खिल रही है बहार सावन की बूंदों में सरगम उल्फ़त की ऐसी दिल करे बेक़रार सावन की प्यास तन की जाने बुझेगी कब कर रहा इंतिजार सावन की गीत गाये ग़ज़ल यादों…
फिजाओं में जहर घोला जा रहा है | Kavita
फिजाओं में जहर घोला जा रहा है ( Fizaon mein jahar ghola ja raha hai ) हवाओं में जहर घोला जा रहा है जंगलों को जड़ से काटा जा रहा है शहरों में ऑक्सीजन है नहीं फिर भी आलीशां महल बनाया जा रहा है। हम भला इंसाफ अब क्या करेंगे लगा के…
सशक्त बनो हे नारी तुम | Kavita
सशक्त बनो हे नारी तुम ( Sashakt bano he nari tum ) उठो नारी आंसू पौंछो खुद की कीमत पहचानो लाज का घूंघट ढाल बना लो अहंकार का तिलक लगा लो स्वाभिमान की तान के चादर खुद में खुद को सुदृढ बना लो उठो नारी आंसू पौंछो खुद की कीमत पहचानो ?☘️ अपनी शक्ति…
मेघा | Kavita
मेघा ( Megha ) बरस रे टूट कर मेघा, हृदय की गाद बह जाए। सूक्ष्म से जो दरारे है, गाद बह साफ हो जाए। बरस इतना तपन तन मन का मेरे शान्त हो जाए, नये रंग रुप यौवन सब निखर कर सामने आए। दिलों पे जम गयी है गर्द जो, उसको बहा देना।…