तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से

तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita

तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से

( Tumhe chaha adhik sare jahan se )

 

तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से।
मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।।

ऐ  मेरी  जाने  गजल  तू  ही  बता,
कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।।

किसी भी चीज पे गुरुर न कर,
हाथ खाली ही आया है वहां से।।

मैं  दुनिया  छोड़कर के आ गया हूं,
वो कब निकले भला अपने मकां से।।

सब्र  भी  चीज  कोई  होती  है,
वो आयेगा जमी पर आसमां से।।

अधेरे  आये  शेष  तो  भी  क्या,,
दिया जलता रहा अपनी गुमा़ं से।।

?

कवि व शायर: शेष मणि शर्मा “इलाहाबादी”
प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद
मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें : –

जब भी चाहेगा तू रूलायेगा | Ghazal

 

Similar Posts

  • करवा चौथ व्रत | Karwa Chauth Vrat

    करवा चौथ व्रत ( Karwa Chauth Vrat )   कार्तिक मास की चतुर्थी का दिन है शुभ आया, सब सुहागिनों देखे इस दिन चांद में पति की छाया। करवाचौथ के व्रत में जो भी करवा मां का पूजन करे, अमर सुहाग रहे उसका पति नित नव उन्नति करे। करक चतुर्थी का यह दिन कहलाता है…

  • गणगौर त्योहार | Gangaur Tyohar par Kavita

    गणगौर त्योहार ( Gangaur tyohar )    ईसर गौरी की पूजा होती पावन गणगौर का त्योहार। गोरी सज धज शिव शंकर को वंदन करती बारंबार। कुंवारी कन्याएं सोलह दिन गौरी पूजन कर आती। जल दूब अर्पण शिव गौरी गौर गौर गोमती गाती। सिंदूर मेहंदी चूड़ा चढ़ाती कर गोरी सोलह सिंगार। मनचाहा वर दो शिव भोले…

  • ज़माना है ना | Zamana hai Na

    ज़माना है ना! ( Zamana hai na )   हंसो यारो हंसो खुल के ,रुलाने को ज़माना है करो बातें बुलंदी की ,गिराने को ज़माना है ॥ नहीं होगा कोई भी खुश ,ऊंचाई देख कर तेरी गगन उन्मुक्त में उड़ लो, डिगाने को ज़माना है॥ लगाओ सेंध बाधाओं में, तोड़ो बेड़िआं सारी निरंतर चल पड़ो,पीछे…

  • Kavita | ये क्या हो रहा है

    ये क्या हो रहा है  ( Ye Kya Ho Raha Hai )     घर से बाहर निकल कर देखिए- मुल्क़ में ये क्या हो रहा है, सबका पेट भरने वाला आजकल सड़कों पर भूखे पेट सो रहा है । मुल्क़ में ये…   खेतों की ख़ामोशियों में काट दी जिसने अपनी उम्र सारी, बुढ़ापे…

  • कविता की कविता | Kavita ki kavita geet

    “कविता की कविता” ( Kavita ki kavita )     अर्थ भावनाओं के जिसके,शब्दों में ढल जाते हैं ! अन्तरतम के वे संवेदन, ही कविता कहलाते हैं !!   हर समाज में रहती है यह चाहे कोई हो भाषा बनी हजारों लाखों इसकी कितनी कितनी परिभाषा प्यार,समझ,विश्वास,त्यागमिल इसकेरूप बनाते हैं सारे श्रेष्ठ भाव मानवता, के…

  • मतदान करो | Kavita Matdan Karo

    मतदान करो ( Matdan Karo )   कन्यादान को हि कहा गया दान सर्वोच्च किंतु, समय की बदलती धारा में अब, मत दान हि है उच्च करना है यह पुण्य कर्म सभी को अत्यावश्यक् है यह धर्म सभी को इसमें नही भेद भाव उच नीच का समझना है भविष्य का मर्म सभी को एक वोट…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *