Tag: कविताएँ
क्रांतिवीर | Kranti Diwas Par Kavita
क्रांतिवीर ( क्रांति दिवस पर अमर शहीदों के जज्बातों को सादर वंदन ) है हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है। क्रांति काल में वीरों ने, प्राणों की भेंट चढ़ाई है। हंसते-हंसते झूल गए, वो क्रांतिवीर कमाल हुए। राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, भारत मां के लाल हुए। आजादी का दीवाना, वो जिद पर अड़…
आओ करे ये सतत प्रतिज्ञा | Kavita
आओ करे ये सतत प्रतिज्ञा ( Aao kare ye satat pratigya ) ?☘️ नारी को सम्मान नहीं तो बताओ क्या दोगे बेटी को घर में मान नहीं तो बतलाओ क्या दोगे एक घर सुधरने से बोलो क्या बदलेगा हर सोच बदलने का प्रण बोलो कब लोगे ?☘️ जब तक सारी कायनात ना बदले तो…
श्याम रंग में | Hindi Poetry
श्याम रंग में ( Shyaam rang me ) मोरी रंग दे ओ रंगरेज चुनरिया श्याम रंग में। मेरी वाणी को अविराम सुनो मोहन के रंग में। जिसके रंग में राधा रंग गई, लोक लाज को भी जो तंज गई। ऐसा ही रंग डाल चुनरिया श्याम रंग में… मोरी रंग दे ओ रंगरेज चुनरिया…
सावन | Sawn par Kavita
सावन ( Sawan ) सावन सरस सुखमय सुधा बरसा रहा, कलियन के संग मधुकर बहुत हर्षा रहा।। नभ मेघ गर्जत दामिनी द्युतिया रही, प्रिय कंत केहि अपराध बस न आ रहा।। ज्येष्ठ की सूखी धरा तरुणित हुयी, मोरनी संग मोर बहु सुख पा रहा।। बारिश की शीतल बूंदें तन जला रही, हे…
बलिदान | Kavita
बलिदान ( Balidan ) क्या है आजादी का मतलब देश प्रेम वो मतवाले लहू बहाया जिन वीरों ने बलिदानी वो दीवाने मातृभूमि पर मिटने वाले डटकर लोहा लेते थे देश भक्ति में ऐसे झूले फांसी तक चढ़ लेते थे जलियांवाला बाग साक्षी अमर कथा उन वीरों की वंदे मातरम कह गए जो…
शब्द | Hindi Poetry
शब्द ( Shabd ) मेरे शब्दों की दुनिया में, आओं कभी। स्वर में कविता मेरी, गुनगुनाओ कभी। बात दिल की सभी को बता दो अभी। मेरे शब्दों की दुनिया में…….. ये जो रचना मेरी देगी जीवन तभी। लय में सुर ताल रिद्धम में बाँधो कभी। अपने भावों को इसमें मिलाओ कभी। मेरे…
तुम मेरे हो | Geet
तुम मेरे हो ( Tum mere ho ) तुम मेरे हो तुम मेरे हो, सुंदर शाम सवेरे हो। जीवन की बगिया में तुम, खिलते फूल घनेरे हो। मुस्कानों से मोती झरते, प्रेम उमड़ता सागर सा। महक जाता दिल का कोना, प्रेम भरी इक गागर सा। मधुबन मन का खिलता जाता, प्रियतम तुम…
गुरु शिष्य का भाग्य संवारते | Kavita
गुरु शिष्य का भाग्य संवारते ( Guru shishya ka bhagya sanwarte ) किस्मत का ताला खुल जाता, गुरु शिष्य का भाग्य विधाता। ज्ञान ज्योति जगा घट घट में, अंतर्मन उजियारा लाता। शिल्पकार मानव निर्माता, शत शत वंदन हे गुण दाता। बुरे मार्ग से हमें बचाओ, प्रगति का मार्ग दिखलाओ। गढ़कर नित नये…
फूलों सा मुस्काता चल | Hindi Poetry
फूलों सा मुस्काता चल ( Phoolon sa muskata chal ) फूलों सा मुस्काता चल, राही गीत गाता चल। मंजिल मिलेगी खुद, कदम बढ़ाना है। आंधी तूफान आए, बाधाएं मुश्किलें आए। लक्ष्य साध पथ पर, बढ़ते ही जाना है। नेह मोती बांट चलो, हंस हंस खूब मिलो। अपनापन रिश्तो में, हमको फैलाना है।…