फिजाओं में जहर घोला जा रहा है
फिजाओं में जहर घोला जा रहा है

फिजाओं में जहर घोला जा रहा है

( Fizaon mein jahar ghola ja raha hai )

 

 

हवाओं में  जहर घोला जा रहा है

जंगलों को जड़ से काटा जा रहा है

शहरों में ऑक्सीजन है नहीं फिर भी

आलीशां महल बनाया जा रहा है।

 

हम भला इंसाफ अब क्या करेंगे

लगा के वृक्ष भला हम क्या करेंगे

वृक्ष काटकर वो जहर पिलाते रहे

हम सींच अमृत से भला क्या करेंगे।

 

वृक्ष काट करके वो जहर पिलाते रहे

सीचे हम अमृत से वो शजर बेचते रहे

 अंदर से दफन हो रही अब इंसानियत

घूस लेकर वनाधिकारी जहर खिलाते रहे।

 

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Dheerendra

लेखक– धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

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