Tag: कविता
मां की वेदना
मां की वेदना मां कोख में अपने खून से सींचती रही। अब तुम बूंद पानी देने को राजी नहीं। मां थी भूखी मगर भरपेट खिलाती रही। अब तुम इक रोटी देने को राजी नहीं। मां थी जागती रात भर गोद में सुलाती रही। अब तुम इक बिस्तर देने को…
वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए
वक्त रुका ही नहीं कभी किसी के लिए ऊंचे नीचे पथरीले रास्ते का प्रारब्ध सफर कारवां गुजर जाने के बाद धुंधला दिखा जीवन का बहुमूल्य अंश बीत जाने पर अस्थिर और अविचर सी दशा में रुका बीते लम्हेंआंखों में कैद कुछ इस तरह हुए डूबे जैसे दरिया में हम समंदर छोड़कर…
इंसान और पेड़ में अंतर
इंसान और पेड़ में अंतर ****** वो कहीं से भी शुरूआत कर सकता है, सदैव पाज़िटिव ही रहता है। उसे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता मौत के मुंह में जाकर भी त्यागता नहीं जीजिविषा सदैव जीवन की है उसे लालसा कभी हिम्मत न हारता बना लेता हूं कहीं से भी कैसे भी जतन कर…
कोरोना की बरसी !
कोरोना की बरसी ! ***** सुन आई हंसी देखा केक काट थी रही! किसी ने कहा- जन्मदिन मना ली? अब जाओ इतना भी न सताओ। करोड़ों पर तेरी कृपा हुई है लाखों अब भी पीड़ित हैं इतने ही हुए मृत हैं। न दवा है न वैक्सीन और कितना रूलाएगी? ऐ हसीन! हसीन कहने पर लोग…
बताओ कौन ?
बताओ कौन ? ***** परिस्थितियों का मारा बेचारा! थका-हारा लिए दो सहारा चल रहा है चला रहा है सातवीं बार आगे आगे जा रहा है! देखिए आगे क्या हो रहा है? किधर जा रहा है? लड़खड़ा रहा है या निकल जा रहा बेदाग? अभी तक तो नहीं लगे हैं उसे कोई दाग! सिवाए कुछ आरोपों…
चांद पर मिला पानी
चांद पर मिला पानी ****** सुन हुई हैरानी शुरू हो सकेगी जिंदगानी करने को मिलेगी मनमानी! यान धरती से होगा रवाना अब लगा रहेगा आना जाना अब न रह जाएगी कोई कहानी बहुत किए हो अपनी मनमानी तेरी सुन रखीं हैं कितनी कहानी दूध भात लाने में करते हो देर बच्चे इंतजार करते जाते हैं…
जस्टिस फॉर गुलनाज
जस्टिस फॉर गुलनाज ****** #justice_for_Gulnaz चाहे सरकारें बदलती रहें राज जंगलवाली ही रहे ऐसे में हम कहें तो क्या कहें? जब प्रशासन ही अपना चेहरा उजागर करे! कौन जीये/मरे फर्क जरा नहीं पड़े सिस्टम हैं सड़े आम आदमी है डरे अपराधी मजे ले अफसर चलें सियासी चाल सरकारों की रखें भरपूर ख्याल होते मालामाल ठोकते…
पछतावा
पछतावा *** नहीं हो सका तुझसे कुछ भी अच्छा! रहा बच्चा का बच्चा, दिल का सादा और सच्चा। ईर्ष्या द्वेष वैमनस्य न जाना, ज़माने की दस्तूर न माना; देते हैं लोग अब ताना। मूर्ख ! तू इतना भी न जाना? छल कपट का है जमाना। कुछ कराने को ‘कुछ’ करना पड़ता है, वरना फाइल ठंडे…
भावनाएँ
भावनाएँ भावनाएँ अनमोल होती है.. जिंदगी खुशी और सकून देती है यह हौसला, उम्मीद और ताकत देती हैं भावनाएं ही हमें जीव से इंसान बनाती हैं जब तक भावनाएं हैं तब तक ही हम इंसान है सही मायने में भावना ही इंसानियत का पाठ पढ़ाती है हमें..! भावनाओं से ही तो रिश्ते बनते हैं..…
आओ मिलकर दीप जलाएं | Poem on Diwali in Hindi
आओ मिल कर दीप जलाएं ( Aao milkar deep jalaye ) ***** आओ मिलकर दीप जलाएं, अपने जैसा हर घर चमकाएं। पुष्पों दीपों से रौशन करें आंगन, खुशियों से भर दें हर एक दामन। जलाएं हंसी की फुलझड़ी, टपके खुशियां घड़ी घड़ी। ठहाकों की फोड़े पटाखा, दूर करें जग की निराशा। कृत्रिम रौशनी और…