बताओ कौन ?

बताओ कौन ?

बताओ कौन ?

*****

परिस्थितियों का मारा
बेचारा!
थका-हारा
लिए दो सहारा
चल रहा है
चला रहा है
सातवीं बार आगे आगे जा रहा है!
देखिए आगे
क्या हो रहा है?
किधर जा रहा है?
लड़खड़ा रहा है
या निकल जा रहा बेदाग?
अभी तक तो नहीं
लगे हैं उसे कोई दाग!
सिवाए कुछ आरोपों के।
जिसका सिर पैर नहीं होता?
रोने वाला तो अक्सर
यूं ही है रोता
जब उससे कुछ नहीं होता!

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : 

चांद पर मिला पानी

Similar Posts

  • बिन बादल बरसात | Kavita bin badal barsaat

    बिन बादल बरसात ( Bin badal barsaat ) महक जाए चमन सारे दिल की वादियां घर हमारे। झूम उठे मेरा मन मयूरा मुस्कुरा उठे चांद वो तारे।   हो जाए दिल दीवाना मधुर सुहानी जब लगती रात। मन का मीत तेरे आने से होती बिन बादल बरसात।   कोई नया तराना लिखता होठों का मुस्कुराना…

  • प्रकृति | Prakriti par Kavita

    प्रकृति ( Prakriti )   इस प्रकृति की छटा है न्यारी, कहीं बंजर भू कहीं खिलती क्यारी, कल कल बहती नदियां देखो, कहीं आग उगलती अति कारी।   रूप अनोखा इस धरणी का, नीली चादर ओढ़े अम्बर, खलिहानों में लहलाती फसलें, पर्वत का ताज़ पहना हो सर पर।   झरनों के रूप में छलकता यौवन,…

  • गणेश स्तुति | Ganesh Stuti

    गणेश स्तुति ( Ganesh Stuti )   कवि जन की कलम हो तेजस्वी कुछ ज्ञान प्रकाश दो गणपति जी निज सेवक जान अनुग्रह का वरदान दो मेरे गणपति जी हम सबके नाव खेवैया हो तुम पालक सृष्टि रचैया हो हो मातु पिता गुरु स्वामी तुम कण- कण में तुम्हीं बसैया हो संताप कष्ट हो या…

  • माता हरती हर संताप

    माता हरती हर संताप देव, ऋषि और पितृ ऋण होते,जग में ऋण के तीन प्रकार।इन्हें चुकाना सनातनी का,होता जन्मसिद्ध अधिकार।पर इन तीनों से पहले है,सर्वोपरि माता का ऋण।इसे चुकाना परमावश्यक,हो सकते ना कभी उऋण।माता ने ही जन्म दिया और,मां ने हमको पाला है।इसीलिये अनगिन रूपों में,मां का रूप निराला है।बेटी, बहन, मां रूप साथ में,पत्नी…

  • मां शारदे | Maa Sharde

    मां शारदे ( Maa Sharde )  ( 3 ) हो ज्ञान का भंडार माँ,यह लेखनी चलती रहे। शुभदा सृजन उपवन खिले,नित ज्योति बन जलती रहे।। कर्तव्य का पथ हो विमल,हर स्वप्न भी साकार हो। पावन रहे ये गंग सी,हर शब्द में रसधार हो।। हो भावना कल्याण की, बस प्रेम का गुंजार हो। रस छंद जीवन…

  • सफलता | Safalta

    सफलता ( Safalta )    उनको आज कल,  एक ही धुन सवार है,  चाहे कुछ भी करना पड़े , परंतु सफलता पाकर रहूंगा । इस सफलता को पाने के लिए, उन्होंने त्याग दिए घर बार , दोस्ती यारी को भी भुला दिया,  मशीनों की तरह , सोचना छोड़ दिया है,  सामाजिक रिश्तों के बारे में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *