बताओ कौन ?

बताओ कौन ?

बताओ कौन ?

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परिस्थितियों का मारा
बेचारा!
थका-हारा
लिए दो सहारा
चल रहा है
चला रहा है
सातवीं बार आगे आगे जा रहा है!
देखिए आगे
क्या हो रहा है?
किधर जा रहा है?
लड़खड़ा रहा है
या निकल जा रहा बेदाग?
अभी तक तो नहीं
लगे हैं उसे कोई दाग!
सिवाए कुछ आरोपों के।
जिसका सिर पैर नहीं होता?
रोने वाला तो अक्सर
यूं ही है रोता
जब उससे कुछ नहीं होता!

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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