चांद पर मिला पानी

चांद पर मिला पानी

चांद पर मिला पानी

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सुन हुई हैरानी
शुरू हो सकेगी जिंदगानी
करने को मिलेगी मनमानी!
यान धरती से होगा रवाना
अब लगा रहेगा आना जाना
अब न रह जाएगी कोई कहानी
बहुत किए हो अपनी मनमानी
तेरी सुन रखीं हैं कितनी कहानी
दूध भात लाने में करते हो देर
बच्चे इंतजार करते जाते हैं ढ़ेर ( सो जाना)
सिर्फ नाम के हो मामा
करते अक्सर हो ड्रामा
कभी दिखते कभी छुपते
एक सा न कभी रहते
कभी तेरी रौशनी में चमकता ताजमहल
तो अमावस्या को रौशन करते स्वयं हम महल
लेकिन अब तेरी चौधराहट कम होगी
तेरा बचना अब मुश्किल होगी
स्वयं आ रहे हैं तेरी खबर लेने?
दूध भात तो नहीं लाए
कई रात भूखे हो सुलाए
पर हम ऐसा नहीं करेंगे
तेरे साथ तुझी पर रहेंगे
तेरे रहस्य खोजेंगे
करीब से तुझको देखेंगे
पृथ्वी सा तुझको कर देंगे
तेरे संसाधनों का उपयोग कर तुझे मसल देंगे
फिर किसी और की तलाश में आगे चल देंगे।
यही इंसानी फितरत है
जाने रब की यह कैसी कुदरत हैं?

 

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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जस्टिस फॉर गुलनाज

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