Tag: कविता
सावन | Sawn par Kavita
सावन ( Sawan ) सावन सरस सुखमय सुधा बरसा रहा, कलियन के संग मधुकर बहुत हर्षा रहा।। नभ मेघ गर्जत दामिनी द्युतिया रही, प्रिय कंत केहि अपराध बस न आ रहा।। ज्येष्ठ की सूखी धरा तरुणित हुयी, मोरनी संग मोर बहु सुख पा रहा।। बारिश की शीतल बूंदें तन जला रही, हे…
रिश्तों का सच | Kavita
रिश्तों का सच ( Rishton ka sach ) स्वार्थ से परिपूर्ण रिश्ते,इस जहां में हो गए है, पुष्प थे जो नेह के वो, शूल विष के बो गए है। प्रेम से अपनी कहानी, जो सुनाते हैं हमें, हमने जब अपनी कही तो, कोह हमसे हो गए है। फूल मेरे बाग से चुन,आशियां…
बलिदान | Kavita
बलिदान ( Balidan ) क्या है आजादी का मतलब देश प्रेम वो मतवाले लहू बहाया जिन वीरों ने बलिदानी वो दीवाने मातृभूमि पर मिटने वाले डटकर लोहा लेते थे देश भक्ति में ऐसे झूले फांसी तक चढ़ लेते थे जलियांवाला बाग साक्षी अमर कथा उन वीरों की वंदे मातरम कह गए जो…
शब्द | Hindi Poetry
शब्द ( Shabd ) मेरे शब्दों की दुनिया में, आओं कभी। स्वर में कविता मेरी, गुनगुनाओ कभी। बात दिल की सभी को बता दो अभी। मेरे शब्दों की दुनिया में…….. ये जो रचना मेरी देगी जीवन तभी। लय में सुर ताल रिद्धम में बाँधो कभी। अपने भावों को इसमें मिलाओ कभी। मेरे…
तुम मेरे हो | Geet
तुम मेरे हो ( Tum mere ho ) तुम मेरे हो तुम मेरे हो, सुंदर शाम सवेरे हो। जीवन की बगिया में तुम, खिलते फूल घनेरे हो। मुस्कानों से मोती झरते, प्रेम उमड़ता सागर सा। महक जाता दिल का कोना, प्रेम भरी इक गागर सा। मधुबन मन का खिलता जाता, प्रियतम तुम…
जल बिन | Kavita
जल बिन ( Jal Bin ) इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…
शटर उठा दो | Kavita
शटर उठा दो ( Shatar utha do ) मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो। मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो। पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…
पुत्री की वेदना शराबी पिता से | Kavita
पुत्री की वेदना शराबी पिता से ( Putri ki vedna sharabi pita se ) पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है, मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है, सब बेच मेरी खुशियों का शराब पी गए, पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है, सब बेच उनके अरमानों का …
संसय | Kavita
संसय ( Sansay ) मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है। साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है। वश में…