Tag: कविता
बंधु अपने दिल की सुन | Geet
बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon ) चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु अपने दिल की सुन। अपनी धुन में बढ़ता जा, उन्नति शिखर चढ़ता जा। आंधी से तूफानों से, हर मुश्किल से लड़ता जा। हौसला करके बुलंद, गा मस्ती…
प्रतिशोध | Pratishodh
प्रतिशोध ( Pratishodh ) मै हार नही सकता फिर ये, जंग जीत दिखलाऊंगा। फिर से विजयी बनकर के भगवा,ध्वंजा गगन लहराऊगा। मस्तक पर चमकेगा फिर सें, चन्दन सुवर्णा दमकांऊगा। मै सागर जल तट छोड़ चुका पर,पुनः लौट कर आऊँगा। जी जिष्णु सा सामर्थवान बन, कुरूक्षेत्र में लौटूंगा। मैं मरा नही हूँ अन्तर्मन…
आयी देखो फुहार सावन की | Aazam Poetry
आयी देखो फुहार सावन की ( Aayi dekho phuhaar sawan ki ) आयी देखो फुहार सावन की ! खिल रही है बहार सावन की बूंदों में सरगम उल्फ़त की ऐसी दिल करे बेक़रार सावन की प्यास तन की जाने बुझेगी कब कर रहा इंतिजार सावन की गीत गाये ग़ज़ल यादों…
इस महफिल में न यादों की खुशबू आती है | Kavita
इस महफिल में न यादों की खुशबू आती है ( Is mehfil mein na yaadon ki khushboo aati hai ) ना पुराने इश्क पर चर्चा होती है। ना अब किसी की टांग खींची जाती है। ए मेरे दोस्त लगता है सब जिम्मो तले छोटी सी झपकी लेने चली जाती है। आओ ना यारों फिर…
Ja-Ra-Mat Bhojpuri Kavita -जरअ मत !
जरअ मत ! ** (भोजपुरी भाषा में) ****** ना त राख हो जइब, कोयला नियर खाक हो जइब। बाॅडी मास ( Body, Mass ) सब हो जाई हवा, एकर नइखे कवनो दवा। इ प्रकृति के नियम बा- जे जरी ऊ साफ होई, जरला पर राख होई। हवा उड़िया ले जाई, अस्तित्व तोहार मिटाई। त…
Hindi Poem Makarsankranti – मकर संक्रांति
मकर संक्रांति ( 2 ) सूर्य देव ने मकर राशि में प्रवेश कर मकर संक्रांति के आने के दी है खबर सोंधी सोंधी गुड़ की वो महक कूटे जाते हुए तिल का वो संगीत मौज-मस्ती बेसुरे कंठो का गीत गंगा स्नान खिचड़ी का वो स्वाद आज होगी आकाश में पतंगबाजी रंग बिरंगी पतंग से भरा…
कहने को नया साल है
कहने को नया साल है कहने को नया साल है, मेरा तो वही हाल है। वही दिन महीने वही खाने-पीने वही मरना जीना जिंदगी का जहर पीना वही जी का जंजाल है .. कहने को नया साल है.. वही मन में सपने जो पूरे नहीं अपने जिसके लिए मन प्यासा हर साल नयी आशा…
अमेरिका में यह क्या हो गया?
अमेरिका में यह क्या हो गया? ********* एक झटके में खो दिया प्रतिष्ठा पुरानी, याद करो सन् 1489 वाली लोकतंत्र की कहानी। जार्ज वाशिंगटन ने रखी थी जिसकी नींव, जड़ें जिसकी गहरी थीं अतीव। जनतंत्र का पोषक वह! नाम पर इसके, न जाने कितने देशों को डराया धमकाया; परिवर्तन सत्ता का कराया? कालचक्र में…
कलम का जादू चलाओ
कलम का जादू चलाओ लिखने वालों कलम उठाओ लो तेरी सख्त जरूरत है बदलनी देश की सूरत है गर रहे अभी मौन सोचो आगे संभालेगा कौन? नवजवानों किसानों आमजन की खातिर लिखो, कुछ दो सुझाव, जो उनके हक की है बताओ , समझाओ। करो रहनुमाई, क्या है इस बदलती आबो-हवा की दवाई? कैसे पटरी पर…