ग़म के मारों को खबर क्या दिल्लगी क्या चीज है
ग़म के मारों को खबर क्या दिल्लगी क्या चीज है ग़म के मारों को खबर क्या दिल्लगी क्या चीज है। लोग जिंदा-दिल समझ पाये हँसी क्या चीज है।। दिल मिला हो जिससे गहरा उससे दूरी फिर कहां। दिल लगाकर हमने जाना आशिकी क्या चीज है।। इक नशा सा छा रहा है दिल…










