Tag: Hindi Kavita
त्यौहार है खुशियों का
त्यौहार है खुशियों का त्यौहार है खुशियों काजब सारे रंग मिलते हैंउल्लास हर्ष उमंग से सब गले मिल जाते हैंगुजिया पूरी पकौड़ी खीरहर घर को महकाते हैं है त्यौहार है खुशियों काजब सारे रंग मिल जाते हैंहै यह एक दिन जोसब एक जैसे हो जाते हैंरंग रूप भेदभावजैसे धरती से खो जाते हैं है त्यौहार…
दरख़्त कुल्हाड़ी | Kavita
दरख़्त कुल्हाड़ी ( Darakht kulhari ) बूढ़ा दरख़्त बोल पड़ा कुल्हाड़ी कहर बहुत ढहाती बिन लकड़ी के तू भी व्यर्थ चोट नहीं पहुंचा पाती जिस लोहे की बनी हुई वह भी तो चोटे सहता है अपना ही जब चोट करें तो दर्द भयंकर रहता है बिन हत्थे के तू कुल्हाड़ी चल…
मानव का उसूल | Kavita manav ka usul
मानव का उसूल ( Manava ka usul ) चकाचौंध में खो गया नर धन के पीछे भाग रहा आज आदमी नित्य निरंतर व्यस्त होकर जाग रहा झूठ कपट सीनाजोरी कालाबाजारी रिश्वतखोरी मानव का उसूल कैसा झूठे वादे बस बातें कोरी प्रलोभन मोह माया के जाल पर जाल फेंक रहा नीली छतरी…
प्यार का तोहफा | Hindi poem pyar ka tohfa
प्यार का तोहफा ( Pyar ka tohfa ) जो हो दिलदार खास उनका स्वागत कीजिए दिल खोल खुशियां बांटो प्यार का तोहफा दीजिए महक उठे मन का कोना सबको खुशियां दीजिए प्यार की खुशबू महकेगी हर पल महसूस कीजिए चार दिन की जिंदगी पल पल जी लीजिए हंसी खुशी से जीवन आनंद…
मैं कविता की हूंकारो से | Kavita
मैं कविता की हूंकारो से ( Main kavita ki hunkaro se ) मैं कविता की हूंकारो से, गगन उठाया करता हूं। सोया सिंह जंगल का राजा, शेर जगाया करता हूं। मात पिता गुरु की सेवा का, धर्म बताया करता हूं। अतिथि देवन हमारे, सम्मान जताया करता हूं। शब्दाक्षर से अल्फाजों में,…
कहां अब पहले से त्यौहार | Tyohar kavita
कहां अब पहले से त्यौहार ( Kahan ab pehle se tyohar ) कहां अब पहले से त्यौहार रहा ना अपनापन प्यार बड़ों का होता सम्मान लुप्त हो रहे सभी संस्कार सद्भावों की बहती गंगा घट घट उमड़ता प्यार बहन बेटी बुजुर्गों का होता तब आदर सत्कार अतिथि को देव मानते पत्थर…
मनभावन कविता | Manbhavan kavita
मनभावन कविता ( Manbhavan kavita ) साहित्य विधाएं मधुरम कवि की कविताएं मधुरम उर पटल आनंद भरती मनभावन रचनाएं मधुरम शब्द सुरीले मीठे-मीठे बहती भाव सरितायें मधुरम छंद सोरठा गीत गजल में सजे नई उपमायें मधुरम कल्पनायें साकार होती सृजन भरी रचनाएं मधुरम भाव सिंधु से मोती बहते काव्य की धाराएं…
कुम्हार | Kumhar kavita
कुम्हार ( Kumhar ) बाबू ले लो ना दिए घर तेरा रोशन हो जाएगा। एक वक्त की रोटी के लिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। मेरी भूख तब मिटेगी जब तेरा हर कोना जगमग आएगा। ले लो ना बाबू जी कुछ दिए मेरा चूल्हा भी जल जाएगा। छोटे बड़े दीपक से अंधकार मिट जाएगा…
रख | Kavita
रख ( Rakh : Hindi Kavita ) खुशियो भरा पिटारा रख । दिल मे जज्बा प्यारा रख ।। तुझे अकेले चलना है । आगे एक सितारा रख ।। मन मे हो मझधार अगर । अपने साथ किनारा रख ।। धुन्धले पन के भी अंदर । सुंदर एक नजारा रख ।। दुनिया से जो भिड़ना…
दीप जलाए प्रेम के | Kundaliya chhand
दीप जलाए प्रेम के ( Deep jalaye pyar ke : kundaliya chhand ) दीप जलाए प्रेम के,पावन है अति पर्व। अनुरंजन वंदन करें,आज सभी को गर्व। आज सभी को गर्व,जगत फैला उजियारा। बढ़े परस्पर प्रेम, बढ़ाएं भाईचारा। लक्ष्मी देव गणेश, आरती मंगल गाये। खुशियां मिले अपार ,प्रेम के दीप जलाये। …