Tag: Hindi Kavita
कवि सत्य बोलेगा | Kavita
कवि सत्य बोलेगा ( Kavi satya bolega ) देश की शान पर लिखता देश की आन पर लिखता देशभक्ति दीप जला राष्ट्र उत्थान पर लिखता आंधी हो चाहे तूफान लेखक कभी ना डोलेगा सिंहासन जब जब डगमगाए कवि सत्य बोलेगा झलकता प्यार शब्दों में बहती काव्य अविरल धारा लेखनी रोशन करे कमाल जग…
तुम अगर साथ दो | Geet
तुम अगर साथ दो ( Tum agar saath do ) तुम अगर साथ दो तो मैं गाता रहूं, लेखनी ले मां शारदे मनाता रहूं। महके जब मन हमारा तो हर शब्द खिले, लबों से झरते प्यारे मीठे मीठे बोल मिले। जब चले साथ में हम हंस कर चले, सुहाने सफर में हम हमसफर…
कशिश | Kavita
कशिश ( Kashish ) एक कशिश सी होती है तेरे सामने जब मैं आता हूं दिलवालों की मधुर बातें लबों से कह नहीं पाता हूं मन में कशिश रहने लगी ज्यों कुदरत मुझे बुलाती है वर्तमान में हाल बैठकर दिल के मुझे सुनाती है प्रकृति प्रेमी बनकर मैं हंसकर पेड़ लगाता हूं…
आज यहां उल्फ़त की टूटी डाली है | Ghazal
आज यहां उल्फ़त की टूटी डाली है ( Aaj yahan ulfat ki tuti dali hai ) आज यहां उल्फ़त की टूटी डाली है ! नफ़रत की दिल पे आज लगी ताली है दी रोठी सब्जी आज किसी भी न मुझे यार रही अपनी तो खाली थाली है जीवन में इतने जुल्म अपनों…
पर्यावरण || Kavita
पर्यावरण ( Paryaavaran ) नीम की डाली ने चिड़िया से कहा आ जाओ। रोकर चिड़िया ने कहा मेरा पर्यावरण लाओ।। धुआ ये धूल और विष भरी गैसों का ब्योम, कैसे पवित्र होगा हमको भी तो समझाओ।। काट कर पेड़ हरे अभिमान से रहने वालों, छांव के लिए सिर धुनकर नहीं अब पछताओ।। कारखानों का…
पर्यावरण | Paryaavaran par kavita
पर्यावरण ( Paryaavaran ) वृक्ष धरा का मूल भूल से इनको काटो ना , नदी तालाब और पूल भूल से इनको पाटो ना! वृक्षों से हमें फल मिलता है एक सुनहरा कल मिलता है पेड़ रूख बन बाग तड़ाग , सब धरती के फूल … भूल से इनको काटो ना .. इनकी करो…
अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं | Kavita
अपनी खुशियों को पंख लगाते हैं ( Apni khushiyon ko pankh lagaate hain ) चलो अपनी खुशियों को जरा पंख लगाते हैं।?️ फिर से दोस्तों की गलियों में छुप जाते हैं।? फिर वही अल्हड़ पन? अपनाते हैं। कुछ पल के लिए अपनी जिम्मेदारियों से जी चुराते हैं।? फिर वही बचपना अपनी आंखों में लाते…
अन्नपूर्णा हो तुम घर की | Kavita
अन्नपूर्णा हो तुम घर की ( Annapurna ho tum ghar ki ) संस्कार संजोकर घर में खूब ख्याल रखे घर का अन्नपूर्णा हो तुम घर की घर लगता तुमसे स्वर्ग सा मधुर विचारों से सुसज्जित महके घर का कोना कोना नारी कर कमलों से ही प्यारा लगे घर सलोना स्वच्छ धुले हाथों…
आइए प्रभु आइए | Chhand
आइए प्रभु आइए ( Aaiye Prabhu Aaiye ) मनहरण घनाक्षरी छंद लबों की हो मुस्कान भी पूजा और अजान भी अंतर्यामी प्रभु मेरे दौड़े-दौड़े आइए जग पालक स्वामी हो हृदय अंतर्यामी हो हाल सारा जानते देर ना लगाइये पलके अब खोल दो सबको आ संबल दो पीर भरे मेंघ छाये विपदा निवारिये…
व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू कभी | Ghazal
व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू कभी ( Waqt mile to aankhon se aankhen milana tu kabhi ) व़क्त मिले तो आँखों से आँखें मिलाना तू कभी ! खीर खाने प्यार की तू मेरे घर आना तू कभी प्यार के तू बांटना हर शख़्स को गुल देखले साथ नफ़रत का नहीं…