Tag: Hindi Kavita
बेटी | Chhand
बेटी ( Beti ) ( मनहरण घनाक्षरी छंद ) लक्ष्मी अवतार बेटी घर का संस्कार बेटी देश का सम्मान होती दो दो वंश तारती शिक्षा की जोत जलाती घर में रौनक लाती हुनर कौशल दिखा घर को संवारती मां का अरमान बेटी पिता का सम्मान बेटी वतन की बागडोर कमान संभालती गुणों…
कान्हा चले आएंगे | Chhand
कान्हा चले आएंगे ( Kanha chale aayenge ) ( मनहरण घनाक्षरी छंद ) मन में विश्वास रखो हृदय में आस रखो जगत के स्वामी खुद दौड़े चले आएंगे मोहन मुरली धारी सुदर्शन चक्र धारी विपदा हरने प्रभु लीलायें रचाएंगे मुरली की तान प्यारी ध्यान धरे नर नारी सुखचैन सुखदाता खुशियां लुटाएंगे …
प्रभु वंदना | Prabhu Vandana
प्रभु वंदना ( Prabhu Vandana ) ( मनहरण घनाक्षरी छंद 8,8,8,7 वर्ण ) दीनबंधु दीनानाथ सबका प्रभु दो साथ संकट हर लो सारे विपदा निवारिये रण में पधारो आप जनता करती जाप सारथी बन पार्थ के विजय दिलाइये मन में साहस भर हौसला बुलंद कर जन-जन मनोभाव सशक्त बनाइये मुरली की…
समांं महका दो आज | Chhand
समांं महका दो आज ( मनहरण घनाक्षरी छंद ) गीतों का सजाओ साज समां महका दो आज झड़ी बरसाओ ऐसी धूम होनी चाहिए खूब गाओ छंद गीत मुक्त कंठ नव गीत रस बरसे प्रेम का भाव होना चाहिए शौर्य पर लिखो गीत योद्धा जंग जाए जीत हिम्मत हौसला मिले ओज होना चाहिए…
मीठी वाणी मीठी बोली | Kavita
मीठी वाणी मीठी बोली ( Mithi vani mithi boli ) एक सैलानी मुझसे बोला क्या करते हो गदेना, गुठियार में ऐसा क्या है यार तेरे गढ़वाल में। मुस्कुराते हुए मैंने कहा मीठी वाणी मिट्ठी पाणी है मेरे गढ़वाल में। हिमालय का चौखंबा बसा है मेरे पहाड़ में 52 गढ़ है मेरे गढ़वाल में। मां…
गर है लिखने का शौक | Kavita
गर है लिखने का शौक ( Gar hai likhne ka shauq ) गर है लिखने का शौक तो कविता चुपचाप चली आती है। टूटे-फूटे शब्दों में भी भावनाएं निकल जाती है। हम तो मिश्रित भाषी हैं कभी हिंदी कभी सिंधी कभी पंजाबी कभी गुजराती निकल जाती है। भाषा के झरोखों से दिल की ऋतु…
कौन हूँ मैं | Kavita
कौन हूँ मैं? ( Kaun hoon main kavita ) सहमी सहमी कमजोर नहीं हूं भीगी भीगी ओस नहीं हूं आसमान पर उड़ने वाली चंचल चितवन चकोर नहीं हूँ कोमल कच्ची डोर नहीं हूं अनदेखी से उड़ने वाली शबनम सम छोटी बूँदों जैसी खुशबू भीनी हिलौर नहीं हूं कुछ जुमलों से डर जाउंगी…
नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना | Kavita
नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ( Naina bawre dhoondhe meet purana ) नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना पल-पल ढूंढे बीता सावन ढूंढे बीती रतिया नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️? जिन बगिया में फूल खिले थे जिनमें बीते सावन जिस घर में था संग तुम्हारा ढूंढे वोही आँगना नैना बावरे ढूंढे मीत पुराना ?☘️?…
पर्यावरण देता हिदायत || Kavita
पर्यावरण देता हिदायत ( Paryavaran deta hidayat ) मैं पर्यावरण हूं, तुम सब का आवरण हूं। रख लोगे गर मुझे सुरक्षित , हो जाओगे तुम भी सुरक्षित। मैं करू सहन अब कितना? होता न सहन अब इतना। तुम मानव की गलती पर , मैं कुढ़ कुढ़ रोता हूं। मेरी एक ही गलती पर, देखो…
जिंदगी | Kavita
जिंदगी ( Zindagi ) मेरी जिंदगी से पूछा मैंने एक रोज जीने का वह तरीका जो घुटन पीड़ा और दर्द से हो बिल्कुल अछूता जिंदगी के पास नहीं था कोई जवाब मुस्कुराकर वह बोली बताती हूं तुझे सलीका बहुत जिया अपने लिए जीवन जी कर देखो जीवन पराया दो कदम बढ़ाओ तुम किसी निर्बल…