Tag: Hindi Kavita
Ummeed Shayari in Hindi | उम्मीदों का साथ ना छोड़ो
उम्मीदों का साथ ना छोड़ो ( Umeedon ka sath na chhodo ) कैसी लहर दुबारा आई काली रात अमावस छाई महामारी ये कहर कोरोना संघर्ष में ना धीरज खोना दिल खोलो दिलदार बनो सब फौलादी हथियार बनो अब आज लड़ना महामारी से एक भयानक बीमारी से अभाग्य का भांडा फोड़ो उम्मीदों का…
महामारी | Kavita
महामारी ( Mahamari ) विकट समय में आज परीक्षा मानवता के नाम की चंद सांसों का खेल सारा संपदा किस काम की भूखे को भोजन मिल जाए क्या करना भंडार का अच्छे कर्मों की चर्चा चलती कहना है संसार का रोगी को दवा और सेवा मिल जाए अच्छी बात मानवता अब गर्त में सोई…
हल्ला बोल | Kavita
हल्ला बोल ( Halla Bol ) बोल मजूरे, हल्ला बोल ! खोल के रख दे सबकी पोल सारी दुनिया हो रही डाँवाडोल सोई जनता की आँखें खोल बोल मजूरे, हल्ला बोल । पहले तोल, फिर कुछ बोल दिमाग़ों के बंद दरवाज़ें खोल अब ना होने देंगे कोई झोल अंदर-बाहर के सच को टटोल ।…
ऐसा कौन करता है | Kavita
ऐसा कौन करता है? ( Aisa kon karta hai ) तीव्र ज्वर में, भीषण दर्द में। घर में घर पर ही- जो कोई अपना पुकारे, क्या छोड़ देंगे उसे ईश्वर के सहारे? पीड़ा से भरा वह चीख रहा था, नजरों से अपनों को ढ़ूंढ़ रहा था। सभी थे पास, फर्क ना पड़ रहा था…
शौर्य | Kavita
शौर्य ( Shaurya ) बढ़ चले मतवाले रण में पराक्रम दिखलाने को अरि दल से लोहा लेने को वंदे मातरम गाने को वीर वसुंधरा जननी वीरों की शौर्य साहस से भरपूर बारूद की भाषा में करते मंसूबे दुश्मन के चूर डटकर रहते सीमा पर समर के वो सेनानी तलवारों की पूजा होती…
मजबूरी/ लाचारी | Kavita
मजबूरी/ लाचारी ( Majboori ) सबको रखना दूरी है यह कैसी मजबूरी है कालचक्र का कैसा खेल कोई शक्ति आसुरी है मजदूर आज मजबूर हुआ थककर चकनाचूर हुआ लहर कोरोना कैसी आई अपनों से भी दूर हुआ मजबूर आज सारी दुनिया मुंह पर मास्क लगाने को सावधान रहकर जग में डटकर कदम…
आजमाया करें | Kavita
आजमाया करें ( Aajmaya Karen ) बेवजह बात को ना बढाया करे, मुझसे जब भी मिले मुस्कुराया करे। सारी दुनिया के रंजो व गम भूल कर, दो घडी आँख मुझसे मिलाया करे। आरजू जो दबी सी सनम दिल में है, आप मुझसे कभी ना छुपाया करे। आइने सा ये चेहरा मेरा है सनम,…
रहनुमा | मार्गदर्शक | Kavita
रहनुमा ( मार्गदर्शक ) ( Rahnuma ) रहनुमा कोई मिल जाए राह मेरी आसां हो जाए मेरी मंजिल का ठिकाना मुझको भी नसीब हो जाए मार्गदर्शक बता दे रस्ता कोई खता न मुझसे हो जाए भटक रहा हूं बियावान में हाथ पकड़ कोई राह दिखाये अंधकार का अंत नहीं है रहनुमा का…
भटकता मन | Kavita
भटकता मन ( Bhatakta man ) भटकते मन में मेरे आज भी, कुछ आस जिन्दा है। भरा है चाहतों से शेर मन पर, प्यास जिन्दा है। उसी को टूट कर चाहा, खुदी को ही भुला करके, अधुरी चाहतों का अब भी कुछ,एहसास जिन्दा है। किसी को चाहना और वो मिले, ये सच…
नज़रों का सच | Kavita
नज़रों का सच ( Nazron Ka Sach ) देखती है जो नज़रे वो होता नहीं, चाहती है जो नज़रे वो दिखता नहीं। मन को छू जाए जज़्बात होंठो पे हो, आसूं बनके बहे मानता मन नहीं ।। भीड़ को देखा राहों पे बढ़ते हुए, दे के धक्का बगल में संभलते हुए। आंख में …