Tag: Hindi Kavita
पथिक प्रेमी | Kavita
पथिक प्रेमी ( Pathik Premi ) हे पथिक मंजिल से भटके, ढूंढता है क्या बता। क्यों दिखे व्याकुलता तुझमें, पूछ मंजिल का पता। यू ही भटकेगा तो फिर सें, रस्ता ना मिल पाएगा, त्याग संसय की घटा अरू, पूछ मंजिल का पता। जितना ही घबराएगा तू, उतना ही पछताएगा। वक्त पे ना पहुचा…
आओ मिलकर प्यार लिखें | Geet
आओ मिलकर प्यार लिखें ( Aao milkar pyar likhen ) प्रेम और सद्भावों की मधुर मधुर बयार लिखे खुशियों भरा महकता सुंदर सा संसार लिखे मधुर गीतों की लड़ियां गा गुल गुलशन गुलजार लिखें अपनापन अनमोल जग में आओ मिलकर प्यार लिखें जहां नेह की बहती धारा पावन गंगा की धार लिखें जहां…
भोर की किरण | Kavita
भोर की किरण ( Bhor ki kiran ) भोर की पहली किरण उर चेतना का भाव है उषा का उजाला जग में रवि तेज का प्रभाव है आशाओं की जोत जगाती अंधकार हरती जग का जीने की राह दिखाकर उजियारा करती मन का कर्मवीरों की प्रेरणा हौसलों की उड़ान है योद्धाओं की…
कोरोना का सीजन | Kavita
कोरोना का सीजन ( Corona ka season ) कोरोना का सीजन कोरोना का सीजन बढ़े रोग दिन दिन घटे ऑक्सीजन कोरोना का सीजन…….2 मार्च में आए अप्रैल में छाए पूरी मई यह तबाही मचाए जून में जाने की करे डिसीजन करोना का सीजन……. जुलाई में जोर भयो कमजोर अगस्त में गश्त बची अब थोर…
मैं नहीं हम की बात | Kavita
मैं नहीं हम की बात ( Main Nahi Hum Ki Baat ) करें बंद अब,धरम की बातें। गंगा और जमजम की बातें। चोटिल हैं ज़ज्बात अभी बस, करें फकत मरहम की बातें। भूख प्यास विश्वास की बातें, बोझिल हर इक,साँस की बातें। मिलजुलके सुलाझायें मसले, करें ताल कदम की बातें।…
कोरोना काल का पक्ष एक और | Kavita
कोरोना काल का पक्ष एक और! ( Corona Kal Ka Pach Ek Or ) जरा सोचें समझें कैसा है यह दौर? भविष्य हमारा किधर जा रहा है? देखो कोई चांद पर मंगल पर बस्तियां- बसा रहा है! उधर हम देख सोच भी नहीं पा रहे हैं हम अनजाने डर से डरे जा रहे हैं…
हे नाथ बचा लो | Kavita
हे नाथ बचा लो ( He nath bacha lo ) जग के सारे नर नारी रट रहे माधव मुरलीधारी यशोदा नंदन आ जाओ मोहन प्यारे बनवारी चक्र सुदर्शन लेकर प्रभु नियति चक्र संभालो कहर कोरोना बरस रहा आकर नाथ बचा लो उठा अंगुली पर गोवर्धन बचा लिया गोकुल को हर लो पीर…
मुक्तक | Muktak
मुक्तक ( Muktak ) 1 सच जो लिख न सके वो कलम तोड़ दो, ये सियासत का अपने भरम तोड़ दो, इन गुनाहों के तुम भी गुनहगार हो, यार सत्ता न संभले तो दम तोड दो।। 2 भटक रहा हूँ मैं अपनी तिश्नगी के लिए.. ज़रूरी हो गया तू मेरी जिन्दगी के लिए.. फक़त…
शर्मनाक स्थिति | Kavita
शर्मनाक स्थिति ( Sharmanak sthiti ) ऐसे पिट रहा है साहेब का विदेशों का डंका, आग लगा के रख दी स्वयं की लंका। शवों पर चढ़ शान से सवारी करते रहे, आॅक्सीजन के अभाव में भले हम दम तोड़ते रहे। बिछ गई लाशें चहुंओर, पर थमा ना चुनाव और नारों का शोर। अब मद्रास…
यादें | Kavita
यादें ( Yaaden ) जाती है तो जाने दों,यह कह नही पाया। नयनों के बाँध तोड़ के, मैं रो नही पाया। वर्षो गुजर गए मगर, तू याद है मुझको, मै भूल गया तुमको, ये कह नही पाया। दिल का गुबार निकला तो,शब्दों में जड दिया। तुम जैसी थी इस दिल में तुझे,वैसा गढ़ दिया।…