Suneet Sood Grover Poetry

  • सुना है | Suneet Sood Grover Poetry

    सुना है ( Suna hai )   कभी कभी खंडहर भी बोल उठते हैं   वीराने भी खुद ब खुद सज जाते हैं   झींगुरों की ताल पर बेताल भी नाच उठतें हैं   सहरा में भी आब’शार मिल जाते हैं   कभी तो मुर्दा जिस्मों में बसती रूह भी कराह उठेगी   सोई ज़मीर…

  • सोच चुप है | Soch shayari

    सोच चुप है ( Soch chup hai )     सोच चुप है , मौन है क्यों ख़ामोश है   सोच पर लगान नहीं, कोई लगाम नहीं, तो   सोच को ज़बान दो कुछ अल्फ़ाज़ दो   सोच की परवाज़ को इक नया मुकाम दो   सोच है सोचेगी खुद में उलझेगी तुझको उलझायेगी  …