टेडी डे

टेडी डे – दिकु के नाम

टेडी डे – दिकु के नाम

तेरी बाहों सा एहसास लिए,
टेडी को दिल से लगा रखा है।
तेरी यादों की ख़ुशबू संग,
हर लम्हा इसमें बसा रखा है।

रुई सा कोमल, प्यार सा प्यारा,
तेरे जैसी मासूमियत समेटे,
रहती है इसमें मेरे मन की बातें,
तेरी यादें धागों की तरह मुझको है लपेटे।

दिकु, तू जो होती यहां,
टेडी की जगह तुझे ही थाम लेता,
तेरी बाहों में सिमटकर मैं,
हर ग़म को पीछे छोड़ देता।

पर जब तक दिकुप्रेम मिलन ना हो,
ये टेडी दिल का सहारा रहेगा,
तेरी यादों को पास समेटे,
दिल हरदम तेरा ही नाम कहेगा।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • सर्द हवाएं | Sard hawayein kavita

    सर्द हवाएं ( Sard hawayein )   सर्द हवाएं ठंडी ठंडी तन ठिठुरन सी हो जाती है कंपकंपी छूटती तन बदन में सर्दी खूब सताती है   ठंडा माह दिसंबर का सर्दी का कोप बड़ा भारी कोहरा धुंध ओस आये होती कहीं बर्फबारी   बस दुबके रहो रजाई में अलाव कहीं जला देना स्वेटर मफलर…

  • एकता का सूत्र | Kavita Ekta ka Sutra

    एकता का सूत्र ( Ekta ka Sutra ) समय की पुकार को समझो और अपने आप को बदलो। हम इंसान है और इंसानो की इंसानियत को भी समझो। अनेकता में एकता को देखों आबाम की बातों को सुनों। शांति की राह को चुनो और शांति स्थापित करो।। देश दुनिया की बातें करते है अपने आप…

  • बिहार में पुल बह रहे हैं | Kavita Bihar mein

    बिहार में पुल बह रहे हैं! ( Bihar mein pul bah rahe hain )  बिहार में विकास की गंगा नहीं पुल बह रहे हैं, नेता प्रतिपक्ष तो यही कह रहे हैं। बाढ़ से नवनिर्मित पुलों का ढ़हना जारी है, ढ़हने में अबकी इसने हैट्रिक मारी है। पहले सत्तरघाट- फिर किशनगंज और अब अररिया, के पुल…

  • विजय संकल्प

    विजय संकल्प     हार माने हार होत है जीत माने जीत, जीतने वाले के संग सब लोग लगावत प्रीत।   मन कचोटता रह जाता जब होता है हार, मन ही बढ़ाता है मनोबल जीवन सीख का सार।   जीत-हार का जीवन चक्र सदैव चलता रहता है, जीत-हार उसी की होती है जो खेल खेलता…

  • मेरी बीवी मायके चली गई | Meri Biwi Maike Chali Gayi

    मेरी बीवी मायके चली गई ( Meri biwi maike chali gayi )    आठ दस दिन ही सही वो आफतें सारी भली गई। अब मौज मस्ती मर्जी मेरी बीवी मायके चली गई। ना कोई टोका टोकी होगी ना कोई रोका रोकी होगी। कोई खलल नहीं लेखन में मेरी कविता चोखी होगी। आंखों का पहरा रखती…

  • आतंक | Aatank

    आतंक ( Aatank )   सुंदर घर थे घर के अंदर नन्हे बच्चे रह गए रात के अंधेरे में राख के ढेर बस वह नन्ही कोप्ले खिल भी ना पाई मुट्ठी पूरी खुल भी ना पाई सिसकियों में दब गई मुस्कुराहट रह गई गाजा मे सिर्फ राख और विनाश त्रासदी का मंजर घर में चहकती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *