विद्या सिन्हा : देसी सौंदर्य का दमदमाता चेहरा
मुझे तो पता ही नही था कि विधा सिन्हा जी का निधन तो 2019 में ही हो गया था.. आज मैं उनका एक गीत सुन रहा था.. कई बार यू भी देखा है, ये जो मन की सीमा रेखा है.. बहुत ही प्यारा ओर सारगर्भित गीत.. मन को असीम शांति देने वाला.. फिर मैंने सहज ही गूगल पर टटोला की आजकल विधा जी क्या कर रही है तो उनके निधन की तारीख सामने आ गयी।
मुझे बड़ा दुःख हुआ.. हमारे मन की सीमा रेखाएं भी कितनी अजीब है.. जिन से कोई रिश्ता नही, पहचान नही फिर भी उनके लिए व्याकुल हो जाता है.. विधा सिन्हा जी का परलोक सिधार जाना मुझे स्वयं के लिए क्षति सा लगा.
मेरे बचपन की पसंदीदा अभिनेत्रियों में हेमा जी के साथ साथ विधा सिन्हा जी भी रही है.. वे एक उम्दा कलाकार थी और जितना कुछ एक इंसान बोल कर भी नही कह पाता है उस से भी अधिक वे न बोल कर भी कह जाती थी.. उनकी आंखों में ईश्वर ने न जाने कौंन से अमृत के घड़े भरे थे कि हर कोई बस उन आंखों में खो जाना चाहता था।
आँखों से न जाने क्यो यह प्रकट होता था कि उन्हें इंतजार है किसी का.. वे बाट जो रही है.. ये इंतजार सदियों का है.. ये प्रतीक्षा जन्मों जन्मों की है.. वे सुंदरता की अदभुत मूरत थी.. अब नही है वे हमारे साथ.. दूर बहुत दूर चली गयी है.. शायद स्वर्ग में ही.. इतनी प्यारी इतनी खूबसूरत, दिलो में तूफान उठाने वाली कोई यू ही साधारण महिला नही हो सकती.. वे स्वर्गलोक की अप्सरा थी।
यकीनन उनका मुकाम अभी स्वर्ग में ही होंगा.. जनता उनकी दीवानी थी.. अभिनय तो उनका उत्तम दर्जे का था ही मगर दैहिक सौंदर्य दुनिया के सर चढ़ कर बोलता था.. वे लाखो कुँआरो की आस थी.. वे करोड़ो शादीशुदाओ के मन मे दबी आग थी.. उनकी दीवानगी आम लोगो मे ही नही बल्कि देश के बड़े बड़े दिग्गज नेताओं में भी थी.. यह इस कदर थी कि उन दिनों के बहुत बड़े कद्दावर नेता विद्याचरण शुक्ल भी इनके मोहपाश में बंध गए थे।
उन्होंने तो बड़े ही शायराने अंदाज में अपने मन के भावों को विधा जी के सामने प्रकट भी कर दिया था.. मुझे जहा तक याद बनता है यह खबर शायद मैने भी किसी अखबार या पत्रिका में पढ़ी थी.. विद्याचरण शुक्ल ने अपने प्रेम निवेदन में विधा सिन्हा जी से कहा तू भी विधा मैं भी विधा.. यह बहुत बडी बात थी कि किसी फिल्म अभिनेत्री को कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता इस कदर चाहता था.. संजीव कुमार के साथ विधा जी ने कई फिल्में की है और संजीव कुमार भी उनके मोहपाश में बंधे थे।
विधाजी ने मात्र अठारह वर्ष की उम्र में ही मिस बॉम्बे का खिताब जीत लिया था.. इक्कीस बावीस वर्ष की उम्र में अपने पसंद के लड़के से ब्याह भी कर लिया था.. अठारह की उम्र में वे सुनहरे पर्दे पर आ गयी।
मुझे उनकी फिल्मो के बारे में नही लिखना है.. मुझे तो उनके सौंदर्य को प्रस्तुत करना है जो अस्सी के दशक में जादू बनकर दुनिया पर छा गया था.. भरी पूरी उनकी देहकाठी.. नजरे एक टक जिसे देखती रहे ऐसा प्यारा प्यारा मुखड़ा.. चेहरा उनका मीठे मीठे प्रश्नों सा सवाल करता.. थेट देसी सौंदर्य को परिभाषित करती उनकी मदमस्त चाल ओर चुप रहकर भी वारी वारी जाऊ हजार बार जाऊ कहने की उनकी अदा।
विधा जी आज हमारे बीच नही है मगर उनके हमउम्र जिन्होंने ने भी उन्हें देखा है उनके मन की अथाह गहराइयों से यह यकीनन आज भी पूरे प्रेम प्रवाह से यह गीत गूंज रहा होंगा.. न जाने क्यो होता है ये जिंदगी के साथ.. अचानक ये मन किसी के जाने के बाद.. करे फिर उसकी याद छोटी छोटी सी बात.. न जाने क्यो।
मेरे अपने मन की कल्पनाओं में आ रहा है कि फिर कोई विधा जी जैसी नायिका हमारे बीच मे आये.. हमारे सपनो को पंख दे.. हमारी पलके मूंद जाए.. हम उनके पावन पवित्र सौंदर्य के चरणों मे झुक जाए.. अनेक अनेक धन्यवाद।

रमेश तोरावत जैन
अकोला
मोब 9028371436
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