पुनर्विवाह
पुनर्विवाह

एक लड़की, पलक | अमृतसर मे, अच्छे जीवनसाथी पाने के लिए माथा टेक रही है, तभी पीछे दो लड़के अलग-अलग शहरों से आये (1>पवन {अनाथ अमीर,बिजनेश}) और (2> पुनीत {मिडिल परिवार,जॉब}) पलक के अगल-बगल बैठ माथा टेक, अपने घर की सुख-शांती और सुन्दर सुशील जीवन साथी की कामना की दर्शन कर पलटे, तो पलक को देख, थम से गए |

तीनो ने बातचीत शुरू की, दोनो को पलक की सुन्दरता और संस्कार अच्छे लगे, गाना हुआ, गाने के बीच मे दोनो ने पलक को परखा, पलक ने दोनो को समझा, और दोनो ने अपने-अपने ढंग से, प्रपोज किया | पलक कनफ्यूज थी,दोनो को अपने परिवार से मिला,परिवार पर फैसला छोडा | परिवार अंधविश्वासी, रूढीबादी है | माँ बाप ने पुनीत को प्राथमिकता दी, क्योंकी पुनीत का परिवार है, पवन ने लाख कोशिस की, नहीं माने |

पवन उदास हो जाता है, तब पुनीत ने गले लगा, शादी मे आने को कहा, पवन हाँ कह,जाता है | पलक के पापा मोहन शर्मा ने पंडित से कुन्डली मिलवा पुनीत के पापा रामकृष्ण भाटिया को बताया, रामकृष्ण ने कहा, आप अपनी तसल्ली कीजीए,हमारे तो दिल मिल गए, मानो सब सही है,लड़की वाले थोड़ा नर्वस हो पूँछा, आप क्यो नहीं मानते, तब रामकृष्ण बोले, “दुनियां मे दो ही अटल सत्य है, एक जन्म, और दूसरा म्रत्यू (मौत)इनके लिए किसी मुहूर्त या कुन्डली की जरूरत नहीं होती |

तो सारी जिन्दगी कुन्डली और मुहूर्त के पीछे क्यो भागें, सुन कर सब शांत | पर कुन्डली सही मिली, बात आगे बढ़ी | इंगेजमेन्ट हुई, दोनो परिवार बैठे, मोहन ने पंडित से मुहूर्त निकलवा रामकृष्ण को बताया, कुछ दिन बाद शादी की तैयारियाँ जोरों से चल रही है, शादी की सारी रस्में हंसी-खुशी सम्पनं हुई | पवन उदास हो जाने लगा, पुनीत ने पूँछा, तो बोला पलक जैसी जीवन-साथी मिले, गले लगा बिदा किया |

अब पलक के लिए पुनीत के दिल मे गहरी जगह बन गई | सुहागरत पर बातें हुई, प्यार जताते हुए लाइट बंद हुई | हंसी-खुशी के साथ प्यार भरी नोंक-झोंक चलती पुनीत ऑफिस जाता | एक दिन पलक ने खुश-खबरी सुनाई, की वो प्रेग्नेंट है, परिवार बधाई दे ही रहा है, तभी पवन को फोन आया, एक और खुशी, पवन का प्रमोशन हो गया |

ड़बल खुशी,सबने मिठाई की फर्माइस की, रामकृष्ण निकले, तभी पुनीत ने उंहें रोक, खुद गया |…उधर…पुनीत का एक्सीड़ेंट हो गया , गांभीर हालत में बस पलक का नाम लिए जा रहा है…इधर…सब खुश हैं, अचानक खबर आई , सब रोते-बिलखते भाग पहुँचे | रामकृष्ण ने गोद मे सिर रख हांथ फेरा, पुनीत ने पिता से वचन लिया, की पलक का पुनर्विवाह करायेंगे | इस वचन के साथ दम तोड़ दिया | सब बेहाल हैं, तभी पुनीत की आत्मा निकल कर खडी हुई |

अंतिम-संस्कार के बाद,सब उदास है, तभी मोहन शर्मा ने कुन्डली की बात की, पलटबार करते हुए रामकृष्ण ने कहा, आपने तो मिलाई थी, क्या हुआ?क्या किया मुहूर्त ने | शांत होते हुए पुनीत की अंतिम इच्छा की बात बताई | मोहन के परिवार ने बिरोध कर कहा, हमारा समाज पुनार्विवाह की अनुमति नहीं देता, ना हमारे खानदान मे कभी हुआ है, अब पलक को भी बिधवा बेश मे रह कर समाजिक नियमों का पालन करना होगा |

रामकृष्ण बोले, आप समाज के डर से कुरीतियों को बढाबा दे रहे हैं |अपनी ही बेटी को इस अपार दुख को आप नहीं समझेंगे, तो कौन समझेगा, समाज मे बदलाव कैसे आएगा, आत्मा सब सुन परेशान हो रही है | मोहन नहीं माने, भला-बुरा कहा, और विवाह न होने देंगे की धमकी दे, चले गये | बातें सुन पलक ने भी मना किया, रामकृष्ण बोले, कोई अपनी बेटी को इस तरह कैसे देख सकता है, दोनो रो पड़े |

कुछ दिन मे रामकृष्ण कई जगह गए, उनके साथ आत्मा भी जाती | बात करते, पर कुछ नही होता, कोई मना करता, कोई बच्चे को गिराने बोलता,तो कोई दुतकार कर, समाज की बात कर भगाता, जो हाँ कहता शराबी होता, रामकृष्ण एक दिन थक कर आ रहे थे,..उधर… आत्मा पवन के घर जा पवन को,सपने मे,बैठ पवन को सारी बात बताई |

पवन की आँख खुली, उसी समय गाडी उठा निकला, रात भर गाडी चला सुबह, पुनीत के शहर पहुँचा |…इधर… रामकृष्ण तैयार हो पुनीत की फोटो से थकने की बात कर बोले, इस कुरीतिक अंध-बिश्वासी समाज मे बदलाव लाना बड़ा मुश्किल है बेटा तु ही रस्ता बता,की तभी गेट खोल पवन अंदर आया, फोटो में माला देख, किसी से कुछ पूँछने की जरूरत नहीं रही, पवन की आँखे भर आई |

पिता ने पुनीत की अंतिम इच्छा बताई,साथ ही समाजिक भावना और कुरीतियों को बताया | सोचते हुए पवन ने लड-खडाते हुए अपने जज्बात बताये, की पलक को दोनो ने एक साथ पसंद किया था | शादी तब नहीं हुई, पर आपको कोई ऐतरज ना हो, तो मैं पलक से शादी करना चाहता हूँ |

रामकृष्ण आँखे भर कर बोले, बेटा आज मैं अपनी बहू नहीं, बल्की बेटी की शादी कर रहा हुँ बड़ी धूम-धाम से करूँगा, पवन को गले लगा कर हाँ कहा | पुनीत की आत्मा खुश हुई, शादी की तैयारियां हो रही है, तभी मोहन आया, धमकी दी, पलक को साथ ले जाने बोला, तो पलक ने मना किया, रामकृष्ण ने रोका | अब मोहन ने पुलिस को बुलाया, पुलिस ने पवन और पलक से पूँछा, दोनो की सहमति पा कर पुलिस भी रामकृष्ण के साथ हो मोहन को समझा वापस भेजा |

अगले दिन शादी की तैयारियां चल रही हैं, सब खुश हैं, तभी गुंडे आ धमके, डराया-धमकाया, किसी ने पुलिस को फोन किया | पवन ने बात की, तो उसे मारकर बेहाल,बेहोश कर दिया | रामकृष्ण का परिवार और मेहमान घबरा रहे हैं, रामकृष्ण ने बेटे से फरियाद की, तभी पुनीत की फोटो टूट गई,सबने देखा, इधर पवन मे आत्मा समा गई, अचानक पवन उठा, सारे गुंडो को धूल चाटाई, पुलिस आई, गुंडो को पकडा, मोहन ने भेजा सुन मोहन को पकडा, पवन को पकडना चाहा,तो पवन ने पुलिस को भी पछाडा और बताया, कि पवन के शरीर मे, मैं पुनीत हूँ, पलक की शादी के बाद ही मेरी आत्मा मुक्त होगी, जो भी बीच मे आएगा, मार दूँगा |

रामकृष्ण खुश हुए,शादी शुरू हुई, मंत्र पढ़े, मांग भरी, [(पवन+पुनीत की आत्मा) और 9माह के पेट के साथ पलक के] फेरे हुए, कि अचानक पलक को दर्द हुआ, सारी महिलाओं ने पलक को घेरा, जब तक कोई कुछ सोचता, उससे पहले लड़के का जन्म हुआ, उधर जन्म हुआ, इधर पवन से आत्मा निकल सिर के ऊपर है | सब डरे, आत्मा बोली, डरो मत, सब खडे हो सुनने लगे, उधर पवन को होश आया, बच्चे को ले खडा हुआ |

आत्मा—>””आपके समाज की कुरीतियों को खत्म करने की एक पहल मेरे परिवार से हुई,हम जिसे प्यार करते हैं,समाज के डर से उन्हे तकलीफ मे क्यों रहने देते हैं |अगर किसी बिधवा के पुनर्विवाह से उसकी,बेरंग पड़ी जिन्दगी मे फिर से रंग भर सकते हैं,तो क्यों उंहे घुट कर जीना पड़ता है,क्या समाज की जिम्मेदारी नहीं है,कुरीतियों को खत्म करें |या समाज को किसी की खुशी बर्दास्त नहीं होती |

कुरीतियों को बढाबा देने वाले समाज को क्यों माने, किस काम का ऐसा समाज ? समाज तो वो होता है,जो किसी की खुशी के लिए कुरीतियो, परम्पराओं को परे रख दे, क्यों बर्तमान की खुशियो से ज्यादा महत्त्व पुराने रिति-रिवाजों को दिया जाता है | क्या जीवन की खुशी से ज्यादा जरूरी हैं परंपराएं, अगर हैं भी, तो तोड़ दो इन्हे |

अगर किसी की जिन्दगी संबर रही है,तो खत्म करो अपनी पुरानी सोच,अंध-विस्वास से निकलो छोडो फालतू की बातें |मैं तो चला,पर सबसे विनती है, कि समाज के डर से किसी की खुशी मत छीनो, जो समाज आपकी खुशियां न समझे, छोड दो ऐसे समाज को””अलविदा कहा, और रोकेट की तरह आसमान मे तारा चमका |

सब की आँखे नम हैं, मोहन के परिवार ने रामकृष्ण से माफी मांगी, पवन बच्चे को ऊपर उठा कर बोला, ये हमारा बेटा है, सब खुश हुए, बेटा मुस्कुराया,……….

फिल्म–> पुनर्विवाह
लेखक –> सुदीश कुमार सोनी
गीत लेखक –> सुदीश कुमार सोनी
रजि.सदस्य –> 25830
रजिस्टेशन संख्या –>398851
~~~~~~सुदीश कुमार सोनी

°°°°°°समाप्त°°°°°°

लेखक:  सुदीश भारतवासी

मो .9770740776
Email: sudeesh.soni@gmail.com

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