Vivah Panchami

श्री राम सिया की विवाह पंचमी आयी

श्री राम सिया की विवाह पंचमी आयी

श्री राम सिया का विवाह महोत्सव आया
भव्य मंडप सजा विवाह उत्सव का।

आज शुभ मुहूर्त अगहन मास की पंचमी का
दशरथ नंदन जनक दुलारी के विवाह का।

चारों दिशाओं कोने कोने से राजकुमार है आये
शिव धनुष हिला ना सका एक भी बलवान ।

दुख से जनक का दिल दहला क्या होगा पुत्री का
धरती वीरों से विहीन हो गई क्या आज।

तब श्री राम ऋषि विश्वामित्र के आदेश से आगे आये
धनुष उठाया प्रत्यंचा चढ़ाई हुए विजेता श्रीराम।

तीनो लोको में गूंजी शहनाई बजने लगे मृदंग
देवताओं ने पुष्प वर्षा की चारों ओर खुशी का माहौल।

सीता मां ने वरमाला प्रभु श्री राम के गले में डाली
स्वयंबर संपन्न हुआ राजा जनक का मन हर्ष से गद् गद् हो रहा।

राजा दशरथ बारात लाए चारों भाई दूल्हा बने आज
जनक दुलारी संग तीनों बहनें दुल्हन बनी है आज।

अयोध्या दुल्हन की तरह सजी चारों बहुएं घर है आयी
राजा दशरथ तीनों रानियों की खुशी संभाले ना जाए।

Lata Sen

लता सेन

इंदौर ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • भाई दूज पर्व | Bhai Dooj Parv

    भाई दूज पर्व ( Bhai dooj parv )    यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार कार्तिक मास शुक्ल द्वितीया, तिथि अद्भुत अनूप विशेष । सृष्टि रज रज विमल प्रवाह, भाई दूज खुशियां अधिशेष । परस्पर मंगलता कामना अथाह, शीर्ष वंदित परंपरा संस्कार । यम यमुना सा पावन, भाई बहन का प्यार ।। भाई…

  • विश्व बंधुत्व | Vishwa Bandhutva

    विश्व बंधुत्व  ( Vishwa Bandhutva )    चले  हाथों  में  हाथ ,  लेके   बताने बंधुत्व  भावना  को , सबमें  जगाने बांटते  हो  क्यों  आपसी, प्यार  को चाहते   हो  क्यों  छुपाना , हार  को सत्य  के  पथ  पर चलें  हम,एक हो बंधु  सम  रिस्तें  सभी  के , नेक हो, कामना  बंधुत्व  का, मन  में…

  • होली की हलचल | Kavita Holi ki Halchal

    होली की हलचल ( Holi ki Halchal )   रंग -रंगीली होली आई रंगों की बौछार लाई उमंग की उफान उठाई उल्लास दिल में उगाई मजीर मन में बजाई बढ़उ देवर को बनाई रंगों की फुहार में भींगी है राधा कान्हां संग टेसू की बौछार में बौराया है बरसाना सारा डफ-मजीरे की थाप पर डूबा…

  • वास्तविक माया समय व श्वास | Vastavik Maya

    वास्तविक माया समय व श्वास ( Vastavik maya samay wa swas )    चाहें पेड़-पौधे जीव-जन्तु अथवा कोई भी इंसान, इसी प्रकृति से हम है और हमसे ही इनकी शान। कुछ भी तो नही मांगती प्रकृति सदैव देती रहती, अपना‌ सर्वस्व लुटाकर भी समझती है यह शान।। जिसने जो भी खेतों में बोया वह वैसा…

  • बुद्ध वाणी | Kavita Buddha Bani

    बुद्ध वाणी ( Boudha Bani )   सुन प्राणी बुद्ध की वाणी बुद्ध शरण गच्छामि सुन प्राणी धम्म शरण गच्छामि संघ शर्ण गच्छामि सुन प्राणी चार आर्य सत्य दुख कारण निदान वह मार्ग जिससे होता दुख का पूर्ण निदान पंचशील प्रमुख जान हत्या चोरी व्यभिचार असत्य मधपान अष्टांगिक मार्ग के जीवन सुखमय बनाने के सोपान…

  • हिन्दी के अन्तर के स्वर

    हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा मान्य किये जाने के लिये १९७५ में लोकसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव अमान्य कर दिये जाने के क्षोभ और विरोध में “हिंदी के अंतर के स्वर” शीर्षक रचना लिखी गई।१९७६ में मारीशस के द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह रचना प्रस्तुत हुई तो यह वहाॅं प्रशंसित और अभिनन्दित हुई।इस रचना के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *