वर्ष 2023 की मंगलमय विदाई | 2023 ki Vidai

वर्ष 2023 की मंगलमय विदाई

( Varsh 2023 ki mangalmay vidai )

 

सिंहावलोकन कर,अंतरतम विजय ज्योत जला

अभिज्ञ अनभिज्ञ हर मनुज,
दिशा भ्रम त्रुटि संदेह शिकार ।
प्रेरणा संचेतना उदयन तत्व,
पुनः ऊर्जस्वित पथ विहार ।
आशा उत्साह उमंग संग,
हर स्वप्न यथार्थ रूप ढला ।
सिंहावलोकन कर,अंतरतम विजय ज्योत जला ।।

क्रोध घृणा द्वेष नैराश्यता,
सफलता राह परम बाधक ।
स्नेह प्रेम अपनत्व व्यवहार,
लक्ष्य बिंदु सहज साधक ।
श्रम निष्ठ सकारात्मक सोच,
मूलाधार प्रगति सिलसिला ।
सिंहावलोकन कर,अंतरतम विजय ज्योत जला ।।

विगत काल संश्लेषण विश्लेषण,
निर्माण प्राप्य अप्राप्य तलपट ।
पुनः दृढ़ संकल्प लक्ष्य निर्धारण,
आत्मविश्वास सह मैत्री झटपट ।
असंभवता शब्दकोश विलोपन,
उरस्थ अर्जुन दृष्टि बिंब पला ।
सिंहावलोकन कर,अंतरतम विजय ज्योत जला ।।

जप तप अनवरत कर्म साधना,
अनूप भाग्य निर्माण रेखा ।
पटाक्षेप हर स्तर हीनता,
शौर्य जोश संधारण लेखा ।
स्पंदन अलौकिक पराकाष्ठा,
सर्वत्र दर्शन मनुजता जलजला ।
सिंहावलोकन कर,अंतरतम विजय ज्योत जला ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

यह भी पढ़ें:-

पद्मजा | Padmaja

Similar Posts

  • पापा | Papa

    पापा ( Papa )    वह झुके नहीं वो रुके नहीं वह मेरी बातों पर देखो हंसकर हां कर जाते थे l गुस्सा होने पर मेरे कैसे पास बुला समझाते थेl सही गलत के भेद बता राह नयी दिखाते थे l मेरी लाडो रानी कहकर मुझे सदा बुलाते थे l नपे तुले शब्दों में बोलो…

  • सबल- स्वस्थ हो देश

    सबल- स्वस्थ हो देश।।   योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग। तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत। आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।। खुश रहते हर पल सदा, जीवन में वो लोग। आत्म और परमात्म का, सदा कराते योग।। योग करें तो रोग सब, भागे…

  • संत गुरु घासीदास | Sant Guru Ghasidas

    संत गुरु घासीदास छोटे-बड़े का भेद मिटाकर,सबको एक समान बनाए।संत गुरु घासीदास का संदेश,जो जग को राह दिखाए।दूसरे का धन पत्थर समझो,परस्त्री को माता मानो।सत्य की डगर पर चलकर,जीवन को उजियारा जानो। जुआ-शराब के मोह को छोड़ो,ये दुख का कारण है।पाप की राह जो चुने,वो केवल संकट का दर्पण है।संत की वाणी अपनाकर, सत्य की…

  • साथ | Sath

    साथ ( Sath )    वह साथ ही तुम्हे कभी साथ नही देता जिस साथ मे साथ की निजी लालसा हो दीवार कभी भी इतनी ऊंची न उठाओ की पड़ोसी के चीखने की आवाज सुनाई न दे ऊंचाई के भी हर पत्थर तो पूजे नही जाते तलहटी की शिलाओं मे भी भगवान बसते हैं तुम…

  • हाथों से छीनों न अमराइयाँ | Kavita Amraiyan

    हाथों से छीनों न अमराइयाँ   सौदा परिंदों का हम न करेंगे, साँसों की रफ्तार घटने न देंगें। हाथों से छीनों न अमराइयों को, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? रोते हैं पेड़ देखो कुल्हाड़ियों से, हम सब बँधे उसकी साँसों की डोर से। हरियाली का प्याला कैसे पिएंगे, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? सौदा परिंदों का… बित्ताभर…

  • पलके अपनी खोल प्रभु | Poem palke apni khol prabhu

    पलके अपनी खोल प्रभु ( Palke apni khol prabhu )     तुमने भेजा है धरती पे क्या होता मेरे साथ प्रभु पलके अपनी खोल जरा देखो हे मेरे नाथ प्रभु   कोई आंख दिखाता कोई मुझको धमकाता है मेहनत खून पसीने की कोई कमाई खा जाता है   मेरी हर तकलीफों का बढ़ गया…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *