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हे सरकार ! कुछ तो करो | Political kavita
ByAdminहे सरकार ! कुछ तो करो ( Hey sarkar kuch to karo ) हे सरकार! कुछ तो करो क्यूँ छोड़ दिया मरने को सड़कों और पटरियों पर दर-दर की ठोकरें खाने को खाने को तरसने को। हे सरकार! कुछ तो करो क्या बीत रही है उन गर्भवती और नव माताओं पर सड़कों पर…

शहर में कोई अपना रहबर नहीं
ByAdminशहर में कोई अपना रहबर नहीं दें सहारा मुझे वो मिला घर नहीं शहर में कोई अपना रहबर नहीं कर लिया प्यार का फ़ूल उसनें क़बूल आज उन हाथों में देखो पत्थर नहीं क़त्ल कर देता मैं उस दग़ाबाज का हाथ में मेरे ही वरना ख़ंजर नहीं हर तरफ़ नफ़रतों…

ग़म से जीना सदा मुहाल रहा
ByAdminग़म से जीना सदा मुहाल रहा ग़म से जीना सदा मुहाल रहा।। फिर भी जीते रहे कमाल रहा।। क्यूं दबे हम ग़मों के बोझ तले। जिंदगी भर यही मलाल रहा।। पास रह के भी दूर -दूर रहे। दूरियां क्यूं बढी सवाल रहा।। याद आती रही दुखाने दिल। दिल यूं होता सदा…

ओ मेरी प्रियसी
ByAdminओ मेरी प्रियसी ( नेपाली कविता ) तिम्रा ति घना काला नयनहरु मा कतै त हौंला म तिम्रा चयनहरु मा अपार प्रेम राखी हृदय को द्वारमा आएँ म प्रिय तिम्रो सयनहरु मा पिडा को गाथा लिई म आएँ तिमि सामु तिमि तर आयौं कथा का बयानहरू मा मेरो गीत, मेरो…

वादा कर लो | Prerna kavita
ByAdminवादा कर लो ( Wada karlo ) जब लक्ष्य बना ही ली हो, तो हर कीमत पर उसे पाने का भी अब वादा कर लो और कर लो वादा कभी हार ना मानने का, एक जज्बा जगा लो दिल में, एक जुनून खुद में ला लो, समर्पित कर दो स्वयं को, …

कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है
ByAdminकहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है कहीं ग़म कहीं पे ख़ुशी है! कहीं पे हंसी तो नमी है कोई जीवन अच्छा गुजारे कहीं ग़म भरी जिंदगी है मुहब्बत को कोई निभाये कहीं दिल में ही बेरुख़ी है कोई रिश्ता दिल से निभाता कहीं हर घड़ी बेदिली है कहीं पे …

