Kavita Sab Dhoondte Hi Reh Jaaoge

सब ढूंढते ही रह जाओगे | Kavita Sab Dhoondte Hi Reh Jaaoge

सब ढूंढते ही रह जाओगे

( Sab dhoondte hi reh jaaoge ) 

 

आगे आनें वालें वक़्त में सब ढूंढ़ते ही रह जाओगे,
इस उथल पुथल के दौर में ख़ुद को भूल जाओगे।
एक जमाना ऐसा था दूसरे की मदद को‌ भागतें थेंं,
धैर्य रखना विश्वास करना सब-कुछ भूल जाओगे।।

गलतफहमी में उलझकर ये परिवार भूल जाओगे,
कौन है ताऊं कौन ताया पहचानना भूल जाओगे।
पड़ जाते अनजान मुश्किल में तो उन्हें सम्भाल थें,
आज ऐसी हवा है कि मां-पिता को भूल जाओगे।।

जो किसी ने सोचा ही नही वह सोचते रह जाओगे,
चाचा-चाची एवं रिश्ते नाती सबको भूल जाओगे।
कभी दूजो के कष्ट सुनकर वो अपनें भूल जाते थें,
अब अपने काम न आएंगे और की मदद लेओगे।।

यह दर्पण देख-देखकर सब लोग इतरातें जाओगे,
चिनगारी चाहें गिरी पगड़ी में उसे देख न पाओगे।
पहले मेहमानों को उस परमेश्वर का रुप मानते थें,
अब क्या भला क्या बुरा कोई समझ ना पाओगे।।

अब अच्छे कर्मो वालें इंसान ढूंढ़ते ही रह जाओगे,
मीठें बोल पुरानी सभ्यता खोजते ही रह जाओगे।
स्वर्ग नर्क वह पहले वाले लोग कर्मों को मानते थें,
कैसे होती है खेती-बाड़ी सब-कुछ भूल जाओगे।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • मेरे प्यारे पापा | Mere pyare papa | Geet

    मेरे प्यारे पापा ( Mere pyare papa )   अनुभवो भरा खजाना, वो स्नेह का सिंधु सारा। अपनापन अनमोल बांटते, सदा प्रेम की धारा। सबकी खुशियों में खुश रह, भूल जाते बुढ़ापा। मेरे प्यारे पापा, सबसे अच्छे, वो मेरे प्यारे पापा।   जीवन में मुस्कुराते रहते, खिलते हुए चमन से। हंस-हंसकर हम से बतियाते, बड़े…

  • जिंदगी

    जिंदगी ** जिंदगी की समझ, जिंदगी से समझ। जिंदगी से उलझ, जिंदगी से सुलझ। अबुझ है इसकी पहेली, तेरी मेरी ये सहेली। न मिलती यह सस्ती, ऊंची है तेरी हस्ती। कभी किया करो सख्ती, जो चाहो , चलती रहे कश्ती; संभालो कायदे से गृहस्थी। धीरज धैर्य संतोष रखो, अनावश्यक लोभ से दूर रहो। बातें कम,…

  • अपरा शक्ति नारी | Nari shakti par kavita

    अपरा शक्ति नारी ( Apara shakti nari )   आज की नारी तेरी यही कहानी          कदम से कदम मिलाकर चलती हो     नारी तुम हो इस जगत  की महारानी                  मोहताज नहीं पौरुषता की तुझे     किसी आश्रय की मोहताज नही       …

  • नागपाश में गरुण | Nagpash

    नागपाश में गरुण ( Nagpash me Garun )   आचार भंग करना, आचार्यों का आचरण हुआ। अब तो राजनीति का भी अपराधीकरण हुआ। वन-वन भटकें राम, प्रत्यंचा टूटी है। सीता की अस्मिता, रावणों ने लूटी है। क्षत विक्षत है, सारा तन लक्ष्मण का, बंधक रख दी गई, संजीवनि बूटी है। नागपाश में गरुण अब विषैला…

  • दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में

    दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में   रानी भरल खलिहान ई चइतवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। लूहिया-लुहान से ई नाचाला कपरवा, हमरे पसीनवाँ से लूटै ऊ लहरवा। दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। रानी भरल खलिहान ई चइतवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। ठारी पड़े, हाड़ काँपे,…

  • कर्म से तू भागता क्यों | Kavita Karm

    कर्म से तू भागता क्यों ?   क्या बंधा है हाथ तेरे कर्म से तू भागता क्यों? पाव तेरे हैं सलामत फिर नहीं नग लांघता क्यों? नाकामियों ने है डराया वीर को कब तक कहां ? हार हिम्मत त्याग बल को भीख है तू मांगता क्यों ? मानता तू वक्त का सब खेल है बनना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *