Poem in Hindi on Bitiya

बिटिया तू हो गई है अब स्यानी | Poem in Hindi on Bitiya

बिटिया तू हो गई है अब स्यानी

( Bitiya tu ho gayi hai ab shayani ) 

 

मेरी प्यारी बिटिया रानी तू हो गई है अब स्यानी,
मेरे कलेजे के टुकड़े अब न करों कोई मनमानी।
समझा रहें है आपको आज आपकें नाना-नानी,
हर लड़की की विधाता ऐसी लिखता है कहानी।।

आपकें विवाह के खातिर मैं देकर आया ज़ुबान,
निपुणता-कर्मठता से बनाना अब वहां पहचान।
मान-सम्मान करना सभी का रखना स्वयं ध्यान,
मुसीबतों का करके सामना बनके रहना चट्टान।।

यह जीवन है ऐसी यात्रा जो स्त्री बिना निराधार,
वंश बढ़ाकर पालन करती भरा है त्याग अपार।
बिटिया अपना साथ था बस इतने ही समय का,
जुदाई का कहर सहना आप हो गई समझदार।।

मेरी प्यारी लाड़ली ना करना सोच फ़िक्र हमारी,
यही दस्तूर है जमाने का व मेरी भी ज़िम्मेदारी।
बस कर दूं पीलें हाथ तुम्हारे और कर दूं विदाई,
दो परिवार को जोड़कर रखती समझदार नारी।।

अपनों से बिछुडने का तुम दुख कभी ना करना,
नूतन‌ नये रिश्तो में मिश्री जैसे घुल-मिल जाना।
विदाई समारोह के समय तुम आंसू नही बहाना,
ख़ुश होकर ससुराल जाना सुध-बुध लेते रहना।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • अब निद्रा से उठना चाहिए | Ab Nidra se Uthana Chahiye

    अब निद्रा से उठना चाहिए ( Ab nidra se uthana chahiye )   हमको अब गहरी निद्रा से उठ जाना ही चाहिए, बहुत सो लिए साथियों ये देर करनी न चाहिए। ख़ामोश रहकर मन ही मन में घुटना ना चाहिए, शिकायत चाहें किसी से हो छुपानी न चाहिए।। समय अनुसार साथियों सबको बदलना चाहिए, ये…

  • चौखट | Chaukhat Kavita

    चौखट ( Chaukhat ) *** घर के बीचों-बीच खड़ा, मजबूती से अड़ा। आते जाते लोग रौंदते, चप्पल जूते भी हैं घिसते; ‘चौखट’ उसे हैं कहते । घरवालों की मान का रक्षक ‘चौखट’ लोक लाज की रखवाली और – है मर्यादा का सूचक! ‘चौखट’ सुनकर कितने गाली, ताने, रक्षा करे, न बनाए बहाने ! धूप ,…

  • बसंत ऋतु | Basant Ritu

    बसंत ऋतु ( Basant Ritu )    आ गए ऋतुराज बसंत चहुं ओर फैल रही स्वर्णिम आभा, सुंदर प्राकृतिक छटा में खिली पीले पुष्पों की स्वर्ण प्रभा। मां शारदे की पूजा का पावन अवसर है इसमें आता, ज्ञानदायिनी देवी की कृपा से जगत उजियारा पाता। बसंत ऋतु आते ही सुंदर सुरम्य वातावरण हुआ, ठंडी पवन…

  • वो देखो चाँद इठलाता हुआ | Vandana jain poetry

    वो देखो चाँद इठलाता हुआ ( Wo dekho chand ithalata hua ) वो देखो चाँद इठलाता हुआ, वो देखो धरा कसमसाती हुई   प्रेम को दिखाकर भी छुपाती हुई साँस में आस को मिलाती हुई   सुगंध प्रेम की कोमल गुलाब सी स्नेह दीप प्रज्वलित बहाती हुई   नयनों से हर्षित मुस्कानों को अधरों पर…

  • करवा चौथ पर कविता | Karwa Chauth Poem in Hindi

    करवा चौथ पर कविता ( Karwa Chauth par kavita ) ( 5 ) मिट्टी से बने बर्तन और चतुर्थी कृष्ण पक्ष कितना प्यारा, सुहागिन स्त्रियां खास विधान पूजा करती श्रृंगार न्यारा। करती श्रृंगार,चूड़ी,कंगन,बिंदिया,सिंदूर,मेहंदी हाथों पर, शतायु हो,खुशियां हों जीवन में,अमर रहे सुहाग हमारा।। चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती खुशियां मांगती जीवन में, कामना करती,गणेश जी…

  • गुस्ताखी | Gustakhi

    गुस्ताखी ( Gustakhi )    कलियों के भीतर यूं ही , आ नही जाती महक समूचे तने को ही , जमीं से अर्क खींचना होता है चंद सीढ़ियों की चढ़ाई से ही, ऊंचाई नही मिलती अनुभवों के दौर से गुजर कर ही, सीखना होता है सहयोग के अभाव मे कभी, मंजिल नही मिलती अकेले के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *