सफ़र | Safar

सफ़र

( Safar ) 

कितना लंबा है;
कोई नही जानता!
कब बदलाव होना है;
किसी को पता नहीं चलता!
सफ़र बस ये चलता रहता है;
शायद ये भी कोशिश!
हां बस कोशिश ही कर पाता है;
दूर से उस रोशनी को पाने की!
हां जो उसके सफ़र को लोगों से
अलग बनाती है।
जो हां यूं कहें तो;
अलग बनाती है; उसे
दूसरो से!
हां खुद से भी;
शायद!
वो भी बदलाव चाहता है;
हां सच कहूं खुद में भी!

 

Rashmi

रश्मि जोशी
( उत्तराखंड )

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ग़ज़ल खंडहर | Khandhar

 

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