जलेबी | Jalebi par Kavita

जलेबी

( Jalebi) 

 

हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी,
गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी।
तुर्को ने लाया भारत में देखो,
लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी।

व्यंग्य से भरी है इसकी कहानी,
फीकी न पड़ती इसकी जवानी।
खुशबू है अंदर, खुशबू है बाहर,
खुद को मिटाकर चमकी जलेबी।
हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी,
गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी।
तुर्को ने लाया भारत में देखो,
लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी।

जिन्दगी – जलेबी दोनों में झाँको,
खट्टी- मीठी बातें लोगों में बाँटो।
राष्ट्रीय मिठाई का पाई है तमगा,
हूर के जैसी ये दिखती जलेबी।
हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी,
गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी।
तुर्को ने लाया भारत में देखो,
लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी।

लड्डू, इमरती से ज्यादा है बिकती,
बर्फी औ पेड़ा से देखो है सस्ती।
गरीबों का आँसू सदा से है पोंछी,
हर उम्रवालों को भाती जलेबी।
हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी,
गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी।
तुर्को ने लाया भारत में देखो,
लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक), मुंबई

यह भी पढ़ें :-

हमारे राम | Ram Ji par Kavita

Similar Posts

  • सीखो | Kavita Seekho

    सीखो! ( Seekho )    कुदरत से संवरना सीखो, दीपक जैसा जलना सीखो। नहीं बनों तू नील गगन तो, बनकर मेघ बरसना सीखो। आदमी से इंसान बनों तुम, औरों का बोझ उठाना सीखो। काटो नहीं उन हरे वृक्षों को, नई पौध लगाना सीखो। कद्र करो तू छोटे-बड़े का, फूल के जैसे खिलना सीखो। हुनर,जमीं,आसमां अपना…

  • कृष्ण | Krishna Kavita Hindi

    कृष्ण ( Krishna )    सूर्य से चन्द्र में आए कृष्ण, बाल रूप दिखाए कृष्ण। काल-कोठरी में लिए जनम, माखन, माटी खाए कृष्ण। ब्रह्मांड दिखाए यशोदा जी को, नन्द की गाय चराए कृष्ण। राधा -मीरा दोनों ने चाहा, प्रेम की ज्योति जलाये कृष्ण। एक दरस दीवानी, एक प्रेम दीवानी, प्रीति का स्वाद चखाए कृष्ण। प्रेम…

  • दुस्साहस | Kavita dussahas

    दुस्साहस ! ( Dussahas ) *** भय से भी भयभीत नहीं हो रहे हैं हम, लाख चेतावनियों के बाद भी- कान में तेल डाल, सो रहे हैं हम। दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा आंकड़ा- दानव रूपी कोरोना का, हम ताली थाली पीट रहे- सहारा ले रहे जादू टोना का ! सरकार जुटी है सरकार बनाने…

  • ऐ दीप दिवाली के | Aye Deep Diwali ke

    ऐ दीप दिवाली के ( Aye deep diwali ke )   ऐ दीप दिवाली के तुम एक बार फिर आओ, जग में फैले अज्ञानता के अंधकार को मिटाओ, प्रेम-एकता-बंधुत्व से सबको रहना सिखाओ, अभिमान-द्वेष-अहं सबके दिलों से मिटाओ । ऐ दीप दिवाली के तुम एक बार फिर आओ । भक्ति-श्रद्धा का चाँद गुम हो गया…

  • रात ना होती | Raat na hoti | Kavita

    रात ना होती ( Raat na hoti )   मधुर ये बात ना होती, मधुर मुलाकात ना होती। धड़कनें थम गई होती, अगर ये रात ना होती।   खिलती हुई सुबहें, सुहानी शाम मस्तानी। हसीं पल ये प्यारे लम्हे, रात हो गई दीवानी।   सुहाने ये प्यारे जज्बात, दिलों की बात ना होती। हसरतें रह…

  • जीवन है अनसुझी पहेली | Jeevan

    जीवन है अनसुझी पहेली  ( Jeevan hai anasujhi paheli )    हे! मां आकर मुझे बताओ यह मुझे समझ ना आए क्यों? सब क्यों उलझा उलझा लगता यह कोई ना समझाए क्यों?   पूछो पूछो पुत्र सयाने है खीझा खीझा उलझा क्यों? कौन प्रश्न हैं इतना भारी जो नहीं अभी तक सुलझा क्यों?   जीवन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *