Vivash

विवश | Vivash

विवश

( Vivash ) 

 

उम्मीदों के टूट जाने पर
शोर तो नहीं होता
बस, उठती है टीस एक हृदय मे
और ढलक जाते हैं दो बूंद आंसू
पलकों के कोने से
जो सूख जाते हैं चेहरे पर ही

उम्मीदें भी किसी गैर से नही होती
हर रिश्ते भी
उम्मीद के काबिल नही होते
दर्द तो और अधिक तब बढ़ जाता है
जब अपने ही
किसी और की उम्मीद बन जाते हैं

भीतर की आग भी
न जमकर बर्फ बनती है
न उसकी लौ ही निकलती है
कतरा कतरा खून मे
फैलने लग जाती है सड़ांध
और आदमी
खामोशी मे हंसता हुआ भी
गलने लग जाता है

खुद से खुद की उम्मीद भी
रख तो सकती थी उसे जिंदा
कुछ और दिन
किंतु,अपनों की चाहत में विवश
आदमी कुछ नही कर सकता

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

सुनामी | Tsunami

Similar Posts

  • साहब | Sahab par Kavita

    साहब ( Sahab )   जब भी मुॅंह को खोले साहब। कड़वी बोली बोले साहब।   नफरत दिल में यूॅं पाले हैं, जैसे साॅंप, सॅंपोले साहब।   राजा के संग रंक को क्यों, एक तराजू तोले साहब।   भीतर कलिया नाग बसा है, बाहर से बम भोले साहब।   वोट के लिए दर-दर घूमे, बदल-बदल…

  • हम तुम्हारे है सनम | Hum Tumhare Hain Sanam

    हम तुम्हारे है सनम ( Hum Tumhare Hain Sanam )   मन में कभी तुम ना लाना प्रियवर ऐसा ये विचार, छोड़ जायेगी हमको ऐसे कर देगी जीवन बेकार। सात-वचन से बंधकर आयी मैं पतिव्रता यह नार, साथ रहूॅंगी पूरी उम्रभर मैं भरती हूॅं ऐसी हूॅंकार।। एक तेरे ही खातिर छोड़ आई हूॅं मैं सारा…

  • Romantic Poetry In Hindi -बावरा मन

    बावरा मन ( Bawara Man )     बावरा   मन   मेरा,  हर  पल  ढूंढे   तुमको। नैना द्वारे को  निहारे, एकटक देखे  तुमको।   प्रीत  कहते  है  इसे, या  कि कोई रोग है ये। जो  झलकता तो नही, दर्द  का संयोग है ये।   कहना चाहूं कह न पाऊं, ऐसा  मनरोग है ये। झांझरी सा मन…

  • तुलसी | Tulsi par kavita

    तुलसी ( Tulsi )   हरी पूजन तुलसी बिना रहता सदा अधूरा हैl विष्णु आशीष से पूजित घर-घर तुलसी चौरा है l वृंदा के पतिव्रत के आगे नारायण भी हारे है l शालिग्राम से ब्याह रचाया तुलसी मान बढ़ाया हैl भोग बिना तुलसी के हरि को कब भाया हैंl नारी की सतीत्व ने हरि को…

  • नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) नवम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( अश्विन ) नवम दिवस भुवाल माता के स्मरण से सब पहचान लो ।छोड़ जगत की चिन्ताखुद को जान लेखुद को समझ लेयही है सच्चाईहम तो धीरे – धीरे छान ले ।कौन कहाँ से आया हैयहाँ और कहाँ पर जाएगा ।छिपे हुए इस गूढ़ तत्व कोकौन जानने पाएगासब झंझट तज वर्तमान पहचान ले…

  • मुहूर्त | Muhurat par kavita

     मुहूर्त  ( Muhurat )   क्यों भागे मनवा व्यर्थ मुहूर्त के पीछे || 1.न जन्म मुहूर्त से हुआ, न मृत्यू होगी किसी मुहूर्त मे | फिर क्यो सारी जिन्दगी घूमें, शुभ मुहूर्त के चक्कर मे | क्या शुभ है क्या अशुभ, सब आधीन है प्रकृति सूत्र मे | फिर क्यों सारी जिन्दगी ढूंडे, खट्टापन मीठी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *