मां और बाप | Maa aur Baap

मां और बाप

( Maa aur Baap )

 

कोन कहता है कि मां जन्नत नहीं होती,
पिता की अहमियत मां से कम नहीं होती।

दोनों साथ-साथ चले नयी दिशा देते हैं,
बच्चों के लिए मां बाप की मन्नत नहीं होती।

हर वक्त मां बाप को याद करते हुए आज,
हमेशा बोझ रहेगा आपका बिन आप रंगत नहीं होती।

भुलेंगे नहीं आप को बिठायेंगे हम ह्रदय में,
दिल के अलावा कोई अच्छी जन्नत नहीं होती।

मां बाप तुम ने इतना प्यार दिया कैसे मैं बताऊं,
पढ़ाकर आगे बढ़ाया है जिन्दगी खंड खंड नहीं होती।

पहले आप की भावना को इस कदर देखा मुझे,
कितनी बताई मैं मां बाप की इसमें पाखंड नहीं होती।

आप ने अखंडता की ज्योति जागृति की हमेशा हमेशा,
चलूंगा आप के पगो पर इसमें कोई घमंड नहीं होती।

कुलनीति रणनीति अनुभूति जो सिखाई आपने,
खान मनजीत चेता जा इसमें कोई फ्री फंड नहीं होती।

 

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

मेरा आबाद वतन | Mere Aabad Watan

Similar Posts

  • किस मूरत को हम पूजे

    किस मूरत को हम पूजे किस मूरत को हम पूजे, जिसमें प्राण प्रतिष्ठा है। या मन मन्दिर में मेरे जो, जिसमें मेरी निष्ठा है।।१ बिना प्राण की मूरत पूजे,क्या मुझको फल देगी । मेरी विनय पुकार सुनेगी, मेरे कष्टों का हल देगी।।२ जिस मूरत में प्राण भरा है ,वह मूरत क्या सच्ची है । जिसमें…

  • प्रकृति का मानवीकरण

    प्रकृति का मानवीकरण प्रकृति की गोद में हम रहते हैं,उसकी सुंदरता से हमें प्रेरणा मिलती है,की उसकी शक्ति से हमें जीवन मिलता है। प्रकृति की हरियाली में हम खो जाते हैं,उसकी ध्वनियों में हमें शांति मिलती है,की उसकी सुंदरता में हमें आनंद मिलता है। प्रकृति की शक्ति से हमें प्रेरणा मिलती है,उसकी सुंदरता से हमें…

  • जिन्दगी चार दिन की | Zindagi Char Din Ki

    जिन्दगी चार दिन की ( Zindagi Char Din Ki ) लहरों के संग चलो ठिठोली करते हैं, बस एक बार तुम हम हम तुम बनते हैं। आओ ज्वार संग भाटा के साथ जाने के लिए , जिन्दगी चार दिन की खुश रहो कुछ पाने के लिए । हाँ ठीक समझे वक्त को साथ लेकर आना,…

  • ढेरा | Dhera

    ढेरा ( Dhera )    सवालों का ढेरा है बस दुआओं का सहारा है।। मंजिल की राहों में बसेरा है बस वक्त का चेहरा है।। सवालों ने घेरा है जिम्मेदारियों का पहरा है।। ख़्वाब में तो आसमान की उड़ान है खुदकी बनानी पहचान है।। सवाल है दिल में फैला, क्यू चल रहा तू दलदल में…

  • बुद्ध होना चाहती हूं | Buddh Hona Chahti Hoon

    बुद्ध होना चाहती हूं ( Buddh hona chahti hoon )   सब त्याग दिया जिसने पल भर में, हर रिश्ते के मोह पाश से मुक्त होकर मैं बुद्ध होना चाहती हूं! बुद्ध शरण में जो भी आए पार भौतिक संसार से पाएं पीड़ा में भी मधुरता झलके सारे दुख फूल से बन जाए ।। मांगना…

  • रामलला की प्राण प्रतिष्ठा | Ram Lala ki Pran Pratishtha

    रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ( Ram lala ki pran pratishtha )    अब आ गई तारीख जिसका था हमें इन्तज़ार, राम लला की प्राण प्रतिष्ठा अब होगी साकार। सज गई अयोध्या नगरी सज गए वहां बाज़ार, सारा विश्व बोल रहा वाह भारत तेरे संस्कार।। ढोल-नगाड़े एवं पटाखें संग जलेंगे दीप हजार, भवसागर से पार करेंगे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *