Kavita Tum Tum Hi Ho

तुम तुम हि हो | Kavita Tum Tum Hi Ho

तुम तुम हि हो

( Tum Tum Hi Ho )

 

कौन कहाँ है, कितनी दूर है
पहुुंचेगा कब
यह आपका नही उसका विषय है
आप कहाँ हो कितनी दूर हो और पहुँचना कैसे है
यह तुम्हे स्वयं सोचना है, क्योंकि
मंजिल तुम्हारी है
जीतना या पराजित होना तुम्हे है

और की देखा देखी मे
जीत भी शामिल है और हार भी शर्त भी जरूरी है और संकल्प भी
साथ भी जरूरी है और सहयोग भी
इंतजार भी जरूरी है और दौड़ भी मगर
समझौता कोई भी हो
बाधक से मित्रता नही होती

लक्ष्य एक हो सकते हैं
किंतु,, जरिया और गतिशीलता मे
भिन्नता स्वासभाविक है जरूरत और जिद्द में भिन्नता स्वभाविक है
सोच और विचारों में भिन्नता जरूरी है

सभी के साथ होकर भी
स्वयं में आप अकेले हैं
अपने निर्णय मे आप अकेले हैं
अपने स्वप्न मे आप अकेले हैं
और इस, अकेलेपन के साथ भी
जीत भी तुम्हें हि
हासिल भी करनी है
सभी से आगे भी तुम्हें हि निकलना है
आपकी अपनी जिम्मेदारी भी तुम्हारी है
और तुम तुम हि हो
अब, सोचिये की तुम कहाँ हो
कितनी दूर हो
और पहुँचना कब है

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

ख्वाहिशें | Kavita Khwahishen

Similar Posts

  • वर्षा ऋतु | Varsha Ritu

    वर्षा ऋतु ( Varsha ritu )    रिमझिम फुहारों से दिल फिर खिलेंगे, मेघों के काँधे नभ हम उड़ेंगे। बात करेंगे उड़ती तितलियों से, भौंरों के होंठों से नगमें चुनेंगे। चिलचिलाती धूप से कितना जले थे, मिलकर बरखा से शिकायत करेंगे। पाकर उसे खेत -खलिहान सजते, आखिर उदर भी तो उससे भरेंगे। धरती का सारा…

  • प्रियतम | Geet priyatam

    प्रियतम ( Priyatam : Geet )   आशाओं के दीप तुम ही हो तुम ही नैनो का करार दिल में बसने वाले प्रियतम प्रिय लगे तुम्हारा प्यार   हो मधुर मुस्कान लबों की मेरे दिल की धड़कन हो खुशबू हो महकी बगिया की लगे सुहाना मौसम हो   नेह की बहती सरिता प्यार का उमड़ता…

  • विजय संकल्प

    विजय संकल्प     हार माने हार होत है जीत माने जीत, जीतने वाले के संग सब लोग लगावत प्रीत।   मन कचोटता रह जाता जब होता है हार, मन ही बढ़ाता है मनोबल जीवन सीख का सार।   जीत-हार का जीवन चक्र सदैव चलता रहता है, जीत-हार उसी की होती है जो खेल खेलता…

  • दोस्ती | Dosti

    दोस्ती ( Dosti )    कुछ कही अनकही बातों की दास्तान है दोस्ती, आज के जमाने में भी इंसानियत की पहचान है दोस्ती, पहले त्याग और समर्पण की मिसाल थी दोस्ती, आज तो मतलब के रिश्तों से बदनाम है दोस्ती, सही दोस्त अगर मिल गया तो ईश्वर का दूसरा नाम है दोस्ती, वरना तो इसकी…

  • इंसान स्वयं को तू पहचान | Insan par kavita

    इंसान स्वयं को तू पहचान! ( Insan swayam ko to pehchaan )  ऐ इंसान स्वयं को तू पहचान! जन्म हुआ किस हेतु तुम्हारा ? इस दुनिया जहान में, मानव खुद को तू पहचान रे। पेश करो तू मानवता की मिशाल, टिकते वही धरा पर जिनके होते हृदय विशाल। ऐ इंसान स्वयं को तू पहचान, विनम्रता…

  • भीगी पलकें | Bheegi Palken

    भीगी पलकें ( Bheegi palken )    पलके भीग जाती है, बाबुल की याद में, तन्हाई बड़ी सताती है, अब मायके के इंतजार में।। यह कैसे रीत तूने खुदा है बनाई, बचपन का आंगन छोड़, होजाती है परियो की विदाई।। जिम्मेदारी के ढांचे में ढलना ही होता है, पलके पर आंसू छुपकर , हर फर्ज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *