तुझ संग जुड़े नेह के तार

Romantic Kavita | तुझ संग जुड़े नेह के तार

तुझ संग जुड़े नेह के तार

( Tujh sang jude neh ke taar )

 

जीवन पथ की हमसफर हो
मेरे  दिल  का  तुम करार
मधुर संगीत का साज हो
तुम संग जुड़े नेह के तार

 

कितना प्यारा प्यारा लगता
सुंदर   सुंदर   यह   संसार
हर्षित मन का कोना कोना
तुझ  संग जुड़ें नेह के तार

 

इन सांसो की सरगम में
बहती हुई हो मस्त बहार
जीवन की डोर सुहानी सी
तुम संग जुड़े नेह के तार

 

फूलों सी खुशबू महकाती
तुम ही खुशहाली आधार
मेरे दिल की धड़कन हो
तुम संग जुड़े नेह के तार

 

अल्फाजों का वो जादू हो
तुम गीतों की झड़ी अपार
कविता में रस घुल जाता
तुझ संग जुड़े नेह के तार

 

चुस्ती फुर्ती तरो ताजगी
तुम  उर्जा  का  हो भंडार
मस्त पवन का झोंका हो
तुम संग जुड़े नेह के तार

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

Kavita | अधरों पर मुस्कान है कविता

Similar Posts

  • चाय की चुस्की | Chai ki Chuski

    चाय की चुस्की  ( Chai ki Chuski ) Love mindfulness on cup of tea   तेरी एक चुस्की पर मैं सदा कुर्बान जाती हूँ अदरक , लौंग, इलायची,दालचीनी हो न हो चीनी कैसी भी, मगर दूध बिल्कुल कम हो तो वारी वारी जाती हूँ कुछ साथ हो न हो अकेले में ‘ तू’ मुझको ज्यादा…

  • मैं कविता की हूंकारो से | Kavita

    मैं कविता की हूंकारो से ( Main kavita ki hunkaro se )     मैं कविता की हूंकारो से, गगन उठाया करता हूं। सोया सिंह जंगल का राजा, शेर जगाया करता हूं।   मात पिता गुरु की सेवा का, धर्म बताया करता हूं। अतिथि देवन हमारे, सम्मान जताया करता हूं।   शब्दाक्षर से अल्फाजों में,…

  • गृहिणी जीवन | Kavita Grhinee Jeevan

    गृहिणी जीवन ( Grhinee Jeevan )   प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र,गृहिणी जीवन से स्वस्थ स्वच्छ घर द्वार , अथक श्रम अठखेलियां । अनूप निर्वहन विविध भूमिका, ताकत नजाकत अबूझ पहेलियां । परिवार सम्मान अभिरक्षा ध्येय, सदा मंगल स्तुति चितवन से । प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र, गृहिणी जीवन से ।। हर सदस्य रूचि ध्यान, पोशाक खान…

  • जातिवाद की आग | Jativad ki Aag

    जातिवाद की आग  ( Jativad ki aag )    जातिवाद की आग न सुलगाओ यारों, अपनी कौमी एकता न घटाओ यारों। बे- नूर जिंदगी जीने से क्या फायदा? देश की सूरत फिर न बिगाड़ो यारों। नदियों खून बहा तब देश हुआ आजाद, देशभक्ति का ग्राफ न झुकाओ यारों। मनुष्य होना अभी है एक कल्पना, जीते…

  • अंधापन | Kavita Andhapan

    अंधापन ( Andhapan ) मेल, एक्स्प्रेस का नही, अब बुल्लेट ट्रेन या हवाई सफर का जमाना है यादों के फूटे हुए घड़े मे अब यादेँ भी अधिक देर तक नही ठहरती भागती हुयी रफ्तार मे वर्तमान बहुत तेजी से अतीत में बदलने लगा है नये की चाहत में पुरानी वस्तुयें हि नही पुराने लोग और…

  • लंपी वायरस | Lumpy virus par kavita

    लंपी वायरस ( Lumpy Virus )   हजारों मवेशियों को निगल चुकीं आज यह बीमारी, बड़ी चुनौती बन गया आज लंपी वायरस यें बीमारी। ख़ासतौर राजस्थान में जिसका टूट रहा कहर भारी, संक्रमित पशु से फ़ैल रहीं दूसरे पशुओ में महामारी।। त्वचा पे गांठें बन जाना चारा ना खाकर सूख जाना, न घूमना न फिरना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *