Kavita Choti Chijen

छोटी चीजें | Kavita Choti Chijen

छोटी चीजें

( Choti Chijen )

 

छोटी चीज़ों पर नजर रखना
बहुत बड़ा काम है

छोटी चीज़ें ही जनम देती है
विराट चीज़ों को

पैदा होता है बरगद का पेड़
छोटे से बीज से

देख लेती है छोटी-सी आँखे
बड़ी दुनिया को

शुरु होती है मीलों का सफर
छोटे से कदम से

फूटते हैं क्रान्तियों के विचार
कारा की कोठरीमें

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :-

बड़ा ही महत्व है | Kavita Bada hi Mahatva hai

Similar Posts

  • Love kavita | Mohabbat |-मोहब्बत|

    मोहब्बत ( Mohabbat | Love kavita ) मोहब्बत कैसी होती हैं जुदाई कितनी रोती है ।। चैन आए नहीं रैन जाए नहीं रात बेबसी में नीद आए नहीं कटती नहीं है रात जल्दी सुबह नहीं होती है । मोहब्बत …… प्यार जलता रहे दिल पिघलता रहे हर घड़ी ख्वाब में फूल खिलता रहे जलती रहे…

  • मासूमियत | Masoomiyat par Kavita

    मासूमियत ( Masoomiyat )    मासूम सी वो भोली भाली सूरत वो अल्हड़पन इठलाता सा निश्चल निर्भीक मासूमियत चेहरा कोई अनजाना सा दुनिया के आडंबर से दूर अपने आप में मशगूल बेखबर जहां के दुष्चक्रो से खिलता सा प्यारा फूल मधुर सी मिठास घोलता प्यार भरे मृदु वचन बोलता मासूमियत भरी नैनों में लगा बचपन…

  • पर्यावरण | Paryavaran

    पर्यावरण ( Paryavaran )    विविध जीवों का संरक्षण मान होना चाहिए। स्वस्थ पर्यावरण का संज्ञान होना चाहिए।। प्रकृति साम्यता रहे धरा का भी श्रृंगार हो, वृक्षों की उपयोगिता पर ध्यान बार बार हो। वृक्ष, प्राणवायु फल छाया लकड़ियां दे रहे, उसके बदले में हम उनकी संख्या न्यून कर रहे। ‘दस पुत्र समो द्रुम:’ यह…

  • श्याम सलोने | Kavita

    श्याम सलोने ( Shyam Salone )   राधा को मिल गए श्याम राधा प्यारी गाती फिरे राधा जाने लगी संग गईया चली श्याम माखन में डुबकी लगाने लगे संग राधा के झूम झूम गाने लगे राधा बैठन लगी संग पायल बजी श्याम पांव में मेहंदी लगाने लगे संग राधा की झूम-झूम गाने लगे राधा खेलन…

  • बुंदेलखंड का केदारनाथ | Kavita Bundelkhand ka Kedarnath

    बुंदेलखंड का केदारनाथ ( Bundelkhand ka Kedarnath)   गोमुख से बहता पानी जब शिवलिंग का अभिषेक करें जैसे गंगा शिवलिंग का, नतमस्तक हो अभिषेक करें प्रकृति से घिरा वह हरा भरा शिव स्वयं ही आकर यहाँ बसे है कुंड सदा पानी से भरा सर्दी में गर्म और गर्मी में सर्द वातावरण के विपरीत मिले ऐसा…

  • निद्रा

    निद्रा     शांत क्लांत सुखांत सी पुरजोर निद्रा। धरती हो या गगन हो हर ओर निद्रा।।   विरह निद्रा मिलन निद्रा सृष्टि निद्रा प्रलय निद्रा, गद्य निद्रा पद्य निद्रा पृथक निद्रा विलय निद्रा, आलसी को दिखती है चहुंओर निद्रा।।धरती०   सुख भी सोवे दुख भी सोवै सोना जग का सार है, सोना ही तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *