Kahani Kya Khoya Kya Paya

क्या खोया? क्या पाया? | Kahani Kya Khoya Kya Paya

घर में चारों ओर जाले लगे हुए हैं। कूड़ा कटकर भी जहां देखो पड़ा हुआ है । अबकी होली में घर में पुताई नहीं हुए हैं तो कोई बात नहीं लेकिन जाला भी नहीं साफ हो सकता है। बेटों की शादी करके बहू लाने से क्या फायदा जब बहुएं घर के साफ सफाई नहीं कर सकती हैं।

यह नजारा राम सुमेर जी के घर का है। उनकी बहुत इच्छा थी कि बेटों को पढ़ाया है बहू भी पढ़ी-लिखी लाना चाहिए। उनके तीनों बहूए हैं तो पढ़ी-लिखी लेकिन घर का काम नहीं करना चाहती । अधिकांश घर का काम राम सुमेर की पत्नी को ही करना पड़ता है । पत्नी को सारे कामों को करते देखा तो उनका कलेजा तार तार हो जाता।

एक दिन उन्होंने अपनी पत्नी से कहा -” सुनो! बाबू की मां तुम जो घर का काम करती हो तो मेरा कलेजा तार तार हो जाता है ।सुबह उठकर जानवरों के लिए चारा पानी करना । फिर भोजन बनाना। खेत के सारे काम करना आखिर किस काम की हैं ये बहुएं।

उनकी पत्नी ने कहा-” मैं कह रही थी ना कि बेटे भले पढ़े लिखे हैं लेकिन बहू किसी गरीब घर की लाना लेकिन तुम माने नहीं। ससुराल में आने के बाद भी तुमने बहू को सर चढ़ा रखा था । मेरी तो एक नहीं सुनी । अब जैसे किए हो जाओ भोगो । बहू को ससुराल में पीएचडी क्यों कराने लगे।”

पत्नी बड़बड़ाए जा रही थी लेकिन वह कुछ नहीं बोल रहे थे। जब वह शांत हो गई तो उन्होंने पत्नी से कहा -” एक बात कहूं मानोगी ।”
उनकी पत्नी ने कहा -” मानने लायक होगी तो क्यों नहीं मानेंगे कहोगे तो !”
उन्होंने कहा -” बात दरअसल यह है कि यह बहुएं काम तो करने से रही । सोच रहा हूं क्यों ना खेत को बेच दिया जाए। ना तो ससुरे खेत में काम करने जाते, ना तो उनकी बहुएं। हम बूढ़ा बूढ़े कब तक मेहनत करेंगे जब से हमारे शुगर हो गई है तब से काम नहीं हो पा रहा है।”

पत्नी ने कहा -” पैतृक जमीन क्यों बेचेंगे ? हम करेंगे ! बच्चे नहीं करते हैं तो ना करें हम करेंगे।”
उन्होंने कहा-” आखिर तू कब तक करेगी । मैं देख रहा हूं तुझसे भी काम तो नहीं हो नहीं रहा ।तुझे भी तो मेरी तरह शुगर हो गई है।”

पति-पत्नी कुछ क्षण तक एक दूसरे को देखते रहे। कोई किसी को कुछ नहीं बोल रहा था । उनका भी मन खेत बेचने का नहीं था लेकिन कोई चारा भी तो नहीं था। अंत में उन्होंने निर्णय लिया कि खेत को बेच दिया जाए।

खेत बेचने के बाद भी बुढ़िया का काम थोड़ा आसान हुआ लेकिन इतनी राहत हुई अब दूर खेत में धूप में आना जाना छूट गया।

राम सुमेर जी आज अपने को अकेला महसूस कर रहे हैं । ऐसी बहूं आएगी कि खेती बारी भी बेचना पड़ेगा। वह सोचने लगे कि हमारे जमाना कुछ अच्छा था। कम से कम बहूं तो घर का काम तो कर लेती थीं । लेकिन एक आज की बहुएं है जो चाहती हैं कि सासु हीं बहूं का पैर दबाए।

आखिर उन्होंने क्या खोया ?क्या पाया? सोचते रहे। कहीं बच्चों को उच्च शिक्षित करना, शिक्षित बहू लाना घर का कबाड़ा बन जाना क्या यही आधुनिक समाज है ?यह सोचते हुए उन्हें कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

यह भी पढ़ें :-

अछूतो का भगवान | Kahani Achuto ka Bhagwan

नोट – यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है। पात्र और स्थान बदल दिया गया है।

Similar Posts

  • श्राद्ध | Shraddh

    “हेलो पण्डित जी प्रणाम!…… मैं श्यामलाल जी का बेटा प्रकाश बोल रहा हूं, आयुष्मान भव बेटा!….. कहो कैसे याद किया आज सुबह सुबह। जी पण्डित दरअसल बात ये है कि हमारे पिताजी का स्वर्गवास हुए एक साल हो गए हैं और उनका श्राद्ध का कार्यक्रम हम धूमधाम से मना रहे हैं जिसमें मैंने नाते रिश्तेदारों…

  • समझदारी | Laghu Katha Samajhdari

    आज फिर राजीव और सुमन के कमरे से एक दूसरे पर चीखने-चिल्लाने की आवाजें से आ रही थी। सप्ताह में एक बार तो यह होता ही था। दो दिन बाद फिर से वे एक हो जाते थे। मुझे इसकी आदत थी। मैं दोनों मियां-बीबी के बीच में बोलना उचित नहीं समझती थी। आज भी मैंने…

  • उपहार

    “मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे अपने प्रेम की कोई निशानी दो। मुझे तुमसे एक शर्ट चाहिए।” लव बोला “बिल्कुल दूँगी। मैं भी काफी दिनों से तुम्हें कुछ उपहार देने की सोच रही थी। तुम्हें पता भी नहीं है, मैंने दो दिन पहले ही तुम्हारे लिए एक उपहार ले लिया है लेकिन आज लाना भूल…

  • कर्ण | Karn

    कर्ण एक ऐसा महायोद्धा महादानी जो उसकी स्वयं की गलती नहीं होने पर भी जीवन भर अपमानित होता रहा। आखिर उसकी गलती ही क्या थी? जो जन्म के साथ ही उसकी मां ने उसे त्याग दिया ।शिक्षा प्राप्त करने गया तो वास्तविकता जानने पर गुरु ने समय पर सीखी हुई विद्या न याद होने का…

  • सही फैसला

    राजू और रीना एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे एक दूसरे से अलग हो गए थे। राजू की शादी कविता से हो गई थी, लेकिन वह अभी भी रीना को प्यार करता था, उसे भुला नहीं पाया था। उसके दिल में रीना के लिए एक गहरा प्यार और आकर्षण…

  • आंखों की चमक | Kahani Aankhon ki Chamak

    राधिका शादी होने के बाद अपने ससुराल में आई थी भरा पूरा परिवार था। ससुर भी पढ़े लिखे थे। दकियानूसी विचारधारा को नहीं मानते थे। राधिका को याद है एक बार मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला का देहांत हो गया था। राधिका उनके यहां बैठने गई। लौट कर आने पर दरवाजे पर ही नहाना पड़ता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *